Tuesday, June 2, 2026
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राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री व केंद्रीय गृहमंत्री से IAS संतोष वर्मा की बर्खास्तगी की मांग, कोटा में भी होगी एफआईआर दर्ज ब्राह्मण कल्याण परिषद, कोटा ने संभागीय आयुक्त को सौंपा ज्ञापन

कोटा / ब्राह्मण बेटियों के विरुद्ध आपत्तिजनक व अमर्यादित टिप्पणी करने वाले एससी/एसटी कर्मचारी–अधिकारी संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष एवं IAS अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ हाडोती के ब्राह्मण समाज में गहरा रोष व्याप्त है। इस संदर्भ में ब्राह्मण कल्याण परिषद, कोटा ने राष्ट्रपति, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन लाल यादव के नाम संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर संतोष वर्मा की तत्काल बर्खास्तगी तथा उनके निजी आवास को ध्वस्त करने की मांग की।

“मानसिक आतंकवाद जैसा बयान” — अनिल तिवारी

परिषद के संयोजक अनिल तिवारी ने कहा कि संतोष वर्मा द्वारा मंच से ब्राह्मण बेटियों को अपमानित करने वाला बयान देना एक प्रकार का मानसिक आतंकवाद है। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारी की सिविल सेवा समाप्त कर उसके विरुद्ध संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाना चाहिए।

तिवारी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय पर कार्रवाई नहीं की तो हाडोती में ब्राह्मण समाज बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होगा।

“यह व्यक्ति समाज को तोड़ने की मानसिकता से ग्रसित” — ब्रजराज गौतम

संभागीय अध्यक्ष ब्रजराज गौतम ने कहा कि संतोष वर्मा मानसिक रूप से असंतुलित व समाज को विभाजित करने वाली सोच रखता है। इसे हिंदू समाज को बांटने का कोई अधिकार नहीं।

पूर्व में भी गंभीर आरोप — धर्मेंद्र दीक्षित

शहर अध्यक्ष धर्मेंद्र दीक्षित ने बताया कि इस अधिकारी पर पूर्व में भी महिलाओं से छेड़छाड़ तथा जज के जाली हस्ताक्षर करवाने जैसे गंभीर आरोप दर्ज रह चुके हैं।

“संपूर्ण नारी शक्ति का अपमान” — भगवती शर्मा

परिषद की पदाधिकारी भगवती शर्मा ने कहा कि यह टिप्पणी केवल ब्राह्मण बालिकाओं का ही नहीं, बल्कि संपूर्ण नारी शक्ति का अपमान है। उन्होंने कहा—

“एक पिता जब अपने पुत्र के लिए किसी योग्य कन्या को अपने घर लाना चाहता है, वह कन्या पक्ष के लिए सम्मान का क्षण होता है।

संतोष वर्मा ने ‘बेटी’ शब्द का प्रयोग कर इस पवित्र भावनात्मक संबंध पर अपनी विकृत मानसिकता की गंदगी उड़ेली है।

लोकेश शर्मा ने कहा कि ब्राह्मण शब्द का प्रयोग उसकी सनातन संस्कृति के प्रति गहरी घृणा का परिचायक है।

इस सैडिस्ट मानसिकता वाले व्यक्ति के लिए किसी भी समाज की बेटी सुरक्षित नहीं है।”

उन्होंने कहा कि आरक्षण पर बहस मर्यादा में रहकर भी की जा सकती थी, परंतु वर्मा द्वारा समाज को आहत करने के लिए बेटियों को निशाना बनाना सामाजिक स्वास्थ्य के लिए ज़हर है।

ज्ञापन देने वाले प्रमुख पदाधिकारी

अनिल तिवारी, ब्रजराज गौतम, धर्मेंद्र दीक्षित, बृजेशकांत शर्मा, दिनेश शर्मा, लोकेश शर्मा, एस.एन. शर्मा, सुनील गौतम, दिलीप आदित्य, मनीष तिवारी, राकेश शर्मा, रूद्रेश भारद्वाज, अजय शर्मा, भगवती शर्मा, सुरेश व्यास,विनीत बाजपेई, अशोक मिश्रा, रमेश चंद्र शर्मा, हरिओम सनाढ्य, बुद्धि प्रकाश दाधीच, शशि शंकर चिरौरा, मनमोहन शर्मा, नरेंद्र शर्मा, उमेश गौतम, राजेंद्र दाधीच, लालचंद शर्मा, अमित शर्मा, विजय शर्मा, उत्तम शर्मा, राघव मिश्रा, संजय झा, पीयूष शर्मा, बुद्धि प्रकाश शर्मा, अतुल पाठक, राजकुमार तिवारी, प्रमोद शर्मा, हरीश गोतम, महेंद्र शर्मा, ब्रिजसुंदर शर्मा, उमाकांत शर्मा, कृष्णपाल शर्मा, खेमराज शर्मा, विकास शर्मा, राजीव भारद्वाज, पंकज शर्मा, अनिल शर्मा, दिवाकर शर्मा, जितेंद्र चतुर्वेदी, कीर्ति स्वरूप शर्मा, विनोद शर्मा, चंद्रप्रकाश गौतम, सत्येंद्र शर्मा, अक्षय शर्मा, चेतन शर्मा, महेश रावत, लेखराज शर्मा, राजेश शर्मा, विपिन शर्मा आदि उपस्थित रहे।

“यह संघर्ष मातृशक्ति के सम्मान का” — परिषद

परिषद ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि समाज की सम्माननीय मातृशक्ति की गरिमा की रक्षा के लिए चलाया जा रहा है।

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