कोटा।सप्तर्षि सृजन संस्थान की ओर से आज हिंदी दिवस के पावन अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन सेक्टर-3 नवदुर्गा माता मंदिर प्रांगण, महावीर नगर विस्तार योजना में संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति में काव्य गोष्ठी एवं भामाशाह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान के प्रमुख भामाशाह रमेश चन्द्र नागर को समाज सेवा में उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत सुमंत सरस द्वारा सरस्वती वंदना से हुई, जिसने माहौल को पावनता से परिपूर्ण कर दिया। इसके पश्चात मंच संचालन के ज़िम्मे राम शर्मा ‘कापरेन’ ने समस्त कवियों का स्वागत करते हुए उन्हें काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया। इस काव्य गोष्ठी में उत्कृष्ट रचनाएँ प्रस्तुत की गईं । प्रमुख कवियों में प्रेम शास्त्री, रामेश्वर ‘रामू’, डॉ. शिव लहरी, सुमंत सरस, बंटी सुमन, नहुष व्यास, तंवर सिंह ‘तारज’, हेम सिंह ‘हेम’, गरिमा गर्विता तथा शशि जैन ने अपनी मनमोहक काव्य प्रस्तुतियाँ दीं।
संस्थान का विशेष परिचय अश्वत्थामा दाधीच द्वारा प्रस्तुत किया गया, जबकि डॉ. शिव लहरी ने रमेश चन्द्र नागर को भामाशाह सम्मान पत्र वाचन कर सम्मानित किया। जन सम्पर्क मंत्री रूपनारायण ‘संजय’ ने बताया कि यह आयोजन हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और समाज में उसकी प्रासंगिकता को उजागर करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
इस अवसर पर संस्थान के समन्वयक मंत्री कपिल गौतम ने भविष्य में भी सामाजिक और साहित्यिक क्षेत्र में कार्य करने का आश्वासन दिया। संस्थान की अध्यक्ष हिमानी शर्मा ने सभी अतिथियों, कवियों, और सहभागी जनों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके योगदान को सराहा। कोषाध्यक्ष इंदु गौतम ने संस्था को नई ऊचाइयों तक ले जाने के विचार व्यक्त किए। विशेष रूप से पार्षद शालिनी गौतम ने हिन्दी भाषा के महत्व और उसके प्रचार-प्रसार पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में उपस्थित मयूर सोनी ने सप्तर्षि सृजन संस्थान को अत्यंत उपयोगी एवं सृजनात्मक संस्था बताते हुए हिंदी साहित्य को सशक्त बनाने की दिशा में संस्था के प्रयासों की सराहना की।
यह आयोजन न केवल साहित्यिक मंच के रूप में प्रतिष्ठित रहा, बल्कि सामाजिक समरसता और भाषा प्रेम की भावना को भी एक नयी दिशा देने वाला साबित हुआ
समापन:
इस प्रकार, सप्तर्षि सृजन संस्थान द्वारा हिन्दी दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें साहित्य, समाज सेवा और भाषा प्रेम का सशक्त समावेश देखने को मिला। आगामी दिनों में भी इस तरह के आयोजन साहित्यिक व सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।







