Saturday, April 18, 2026
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अशोक चक्र विजेता कमलेश कुमारी यादव – रघुराज सिंह कर्मयोगी 

–  रघुराज सिंह कर्मयोगी

बच्चो, हमारे देश में अनेक बहादुर वीर वालाएं हुई है। जिन्होंने अपने शौर्य के बल पर देश का नाम रोशन किया है। उनमें सबसे पहला नाम रानी लक्ष्मीबाई का आता है। इसके बाद अहिल्याबाई होल्कर, महारानी अवंती बाई लोधी सहित अन्य कई ऐसी वीर वालाएं हैं।जिन्होंने देश की रक्षा करते-करते अपने प्राणियों न्योछावर कर दिए।अभी मैं एक नाम मैं कमलेश कुमारी यादव नाम लेना चाहूंगा। जब आतंकवादियों ने संसद भवन पर हमला किया तो केंद्रीय रिजर्व बैंक पुलिस बल की महिला कांस्टेबल कमलेश कुमारी ने लोकतंत्र के मंदिर की रक्षा करते करते स्वयं को बलिदान कर दिया। मगर आतंकवादियों के मंसूबे पूरे नहीं होने दिए।

संसद भवन पर हुए हमले को नाकाम करने वाली वीर कांस्टेबल कमलेश यादव के बलिदान को पूरा देश सदैव के लिए याद रखेगा। बच्चो, तुम्हें पता होना चाहिए कि संसद भवन की सुरक्षा करने के लिए केंद्रीय रिजर्व सुरक्षा बल के जवान मुस्तैदी के साथ दिन-रात तैनात रहते हैं। उनकी अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति अंदर नहीं आ जा सकता है। वे अंदर प्रवेश करने वाले व्यक्तियों की सघन तलाशी लेते हैं। संतुष्ट होने पर ही आगंतुकों को अंदर प्रवेश दिया जाता है। यहां मैं एक बात और बताना चाहूंगा कि पाकिस्तान जब से भारत से अलग हुआ है। तभी से वह अच्छा पड़ोसी बनने के बजाय शत्रुता का भाव रखे हुए है। वह चाहता है कि किसी भी तरह कश्मीर को हड़प लिया जाए।

उसने 1947,1965,1971 और 1999 में भारत के साथ आमने-सामने के युद्ध लड़े। सभी युद्धों में उसे पराजय का मुंह देखना पड़ा। लेकिन अनुकूल अवसर मिलते ही सन् 1971 में भारत ने पाकिस्तान के दो टुकड़े करवा दिए। फलस्वरूप बंगला देश बन गया। पाकिस्तान के शासक सदैव यही सोचते रहते हैं कि भारत को कैसे खंडित किया जाए? सात दशक गुजर गए। उनके सभी प्रयास विफल रहे हैं। अब उसने गोरिल्ला युद्ध की नीति अपनाई है। अयूब खान से लेकर शहबाज खान तक को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जब भी अवसर मिला,भारत के विरुद्ध जहर उगलते रहे हैं।

एक दिन असाधारण घटना घटी। 13 सित. 2001 को संसद भवन में शीतकालीन सत्र चल रहा था। तभी आधुनिक रायफलों से लैस पांच आतंकवादियों के एक समूह ने संसद भवन पर हमला कर दिया। उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री जसवंत सिंह जैसे बड़े राजनेता अंदर थे। आतंकवादियों का इरादा भारतीय संसद का अपहरण करने का था। जिससे वह अपनी मांगें मनवा सकें। देश के समक्ष विकट स्थिति पैदा हो गई। आतंकवादी गेट नंबर 1 से अंदर घुसे। जहां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान तैनात थे। इस बल में कमलेश कुमारी यादव आगंतुकों की जांच कर रही थीं।

हुआ यूं कि दोपहर 11:50 बजे एक एंबेसडर कार नं. DL 3 CJ 1527 विजय चौक से रोड नं.1 की तरफ आई। कमलेश कुमारी को कुछ गड़बड़ का आभास हुआ। वे शीघ्र कार की तरफ लपकीं। कार के पास पहुंचने वाली पहली सुरक्षा कर्मी थीं।वह गेट बंद करने के लिए अपनी पोस्ट पर वापस दौड़ी। साथ ही अलार्मिंग सीटी बजा दी। जिससे चेतावनी वाले सायरन बजने लगे। उसने शीघ्र गेट बंद कर दिया। आतंकवादी संसद भवन में प्रवेश नहीं कर पाए। आतंकवादियों ने कमलेश कुमारी पर गोलीबारी प्रारंभ कर दी। उसके पेट में 11 गोलियां लगीं। घायल होते हुए भी कमलेश कुमारी उनसे भिड़ गईं। उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया। तब तक दूसरे जवान आ गए। उन्होंने चार आतंकवादियों को मार गिराया। एक को पकड़ लिया। जिसका नाम मोहम्मद अफजल था।

इन आतंकवादियों में एक आत्मघाती हमलावर भी था। कमलेश कुमारी यादव द्वारा फुर्ती से कार्रवाई करने के कारण वह अपनी योजना को अंजाम नहीं दे पाया। अलार्म की आवाज सुनते ही अन्य सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत पोजीशन ले ली। उन्होंने आत्मघाती हमलावर को मार गिराया। ठंडी के दिन थे। चारों तरफ घना कोहरा था। संसद की दर्शक दीर्घा में काफी संख्या में महिला और पुरुष एकत्रित थे। यदि कमलेश से जरा सी चूक हो जाती तो आतंकवादी भारतीय संसद को बंदी बना लेते। अपनी मांगों को मनवाने में कामयाब हो जाते। बड़े-बड़े राजनेताओं और दर्शकों की जान को खतरा हो सकता था। कमलेश कुमारी एवं सुरक्षा कर्मियों ने उस हमले को विफल कर दिया। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने कमलेश कुमारी को पुष्प चक्र भेंट कर श्रद्धांजलि दी।

बच्चो, कमलेश कुमारी नेअसाधारण बहादुरी और अदम्य साहस के साथ कर्तव्य पालन किया। आतंकवादियों के मंसूबे नाकाम कर दिए। उनके पेट में 11 गोलियां लगीं। इसके बावजूद भी संसद भवन की रक्षा की। पूरे देश ने उनकी भूरि भूरि प्रशंसा की। देश में लोकतंत्र के गौरव को अक्षुण्य बनाए रखने में अपना अमूल्य बलिदान दिया। इसलिए 26 जन. सन् 2002 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में भारत के राष्ट्रपति डॉ. एपीजे. अब्दुल कलाम द्वारा देश का शांति काल में दिया जाने वाला सर्वोच्च वीरता पुरस्कार “अशोक चक्र” से कमलेश कुमारी यादव को सम्मानित किया।

मोहम्मद अफजल को जांच कर्ताओं ने संसद हमले में मास्टर माइंड के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए निर्धारित किया गया। उसे भारत की सार्वभौमिकता को भंग करने का दोषी माना गया। सर्वोच्च न्यायालय ने उसे मृत्यु दंड की सजा सुनाई।

9 फरवरी 2013 को प्रातः 8:30 बजे अफजल को तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई।

ज्योति कुमारी और श्वेता कुमारी,कमलेश कुमारी यादव की दो बेटियां हैं। पति अवधेश कुमार यादव हैं। वे पैतृक गांव कन्नौज के सिकंदरपुर उत्तर प्रदेश में रहते थे। सर्विस के दौरान उनका परिवार दिल्ली आ गया और विकासपुरी में रहता था। कमलेश कुमारी द्वारा देश की सार्वभौमिकता की रक्षा करने के प्रेरणादायक कार्य से प्रेरित होकर आगे आने वाली हमारी पीढ़ियां देश की रक्षा करने में अग्रणी भूमिका निभाएंगीं। बच्चो,इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि देश की रक्षा के लिए हमें अपना बलिदान भी देना पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए। “राष्ट्र प्रथम है। राष्ट्र है तो हम हैं”। इस मंत्र को याद रखते हुए हमारी युवा पीढ़ी को राष्ट्र रक्षा के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहना चाहिए।

रचना अप्रकाशित एवं मौलिक है।

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