बाल एकांकी –
मधुमक्खियों ने लिया इंसान से प्रतिशोध
डॉ रघुराज सिंह कर्मयोगी
पात्र
शेर सिंह – जंगल का राजा
बाज बहादुर – शेर सिंह का रीडर
रानी मधुमक्खी – रानी मधुमक्खी
अश्वपति – घोड़ों का सरदार
गौरी – गाय
बकरी – अर्दली
अन्य जानवर – भैंस,सूअर,लोमड़ी,चीता,पैंथर, मुर्गा,
गोलू भालू, गिद्धराज, लोमड़ी
( पर्दा उठता है )
(अवंतिका पुरी के जंगलों में शेरसिंह रोजाना अपना दरबार लगाया करता था। वह न्यायप्रिय जज के रूप में माना जाता था। उसकी ख्याति केवल अवंतिकापुरी ही नहीं बल्कि अन्य जंगलों में भी थी। यहां तक कि उसके निष्पक्ष न्याय की कहानियां पाठ्य पुस्तकों में शामिल की गईं। जो छात्रों को पढ़ाई जाती थीं। जिससे छात्रों का चरित्र निर्माण हो सके। एक दिन रीडर बाज बहादुर ने शेर सिंह के समक्ष एक अद्वितीय प्रकरण प्रस्तुत किया। जिसे शेर सिंह ने पढ़ा तो चौंक गया। ऐसा मामला उसके पास पहली बार आया था। वही क्या उसके कर्मचारी साथियों ने भी ऐसा प्रकरण न कभी देखा न सुना। वह बोला )
शेर सिंह – बाज बहादुर क्या है ?
बाज बहादुर – हुजूर यह मधुमक्खियों का प्रकरण है। आप कहें तो पूरा पढ़ कर सुनाऊं।
शेर सिंह – मधुमक्खियां खूंखार और लड़ाकू प्राणी होती हैं। इनका मामला हमारे पास आया है तो कुछ गड़बड़ अवश्य है। इनसे बच कर रहना। जरा भी शक हुआ तो हमला कर देंगी।
बाद बहादुर – सरकार,ये खूंखार अवश्य होती हैं,परन्तु..
शेर सिंह – परन्तु क्या? मैं सही कह रहा हूं। यह डंक मार देती हैं तो प्राणी की जान भी जा सकती है।
बाज बहादुर – सर, वे आपसे मिलना चाहती हैं। आपकी अनुमति हो तो प्रस्तुत करूं।
शेर सिंह – बुलाइए। परंतु सावधानी से। हम जानना चाहते हैं कि ऐसा क्या हो गया जो ताकतवर और समूह में हमला करने वाली मधुमक्खियां हमसे मिलने आई हैं?
बाज बहादुर – जी हुजूर। (बकरी जो उसके यहां अर्दली के पद पर कार्य करती थी। उसकी ओर मुखातिब हो कर कहता है।) उन से कहो कि अंदर कक्ष में आ जायं। परंतु आदर सहित अंदर लाना।
बकरी – (मिमियाती हुई) मधुमक्खियां हाजिर हों। सामूहिक स्वर – चलो बहनो, आवाज पड़ रही है। देर मत करो। अन्यथा शेर सिंह सर! क्रोधित हो जाएंगे।
(मधुमक्खियां इकट्ठी होकर शेर सिंह के दरबार में प्रवेश करती हैं। लकड़ी के दोनों कटघरों के आसपास बैठ जाती हैं।)
शेर सिंह – मेरी प्यारी बहनो, तुम्हें क्या कष्ट है? यहां उपस्थित सभी ध्यान रखें कि कक्ष में मधुमक्खियां को कोई छेड़ेगा नहीं। वह हमला करने में देर नहीं करेंगी।
रानी मधुमक्खी – (क्रोधित होकर कहती हैं) जज साब, आप हमें इस तरह अपमानित मत कीजिए।
लोमड़ी – जज साब गलत नहीं कह रहे। एक बार तुम्हारी सेविकाओं ने किसी बात पर नाराज होकर जज साब के भाई पर हमला कर दिया था। उनकी नाक सूज कर कुप्पा हो गई थी।
रानी मां – आप जज के अलावा जंगल के राजा हैं तो इस का आशय यह नहीं है कि आपको कुछ भी कहने की स्वतंत्रता है।
शेर सिंह – रानी साहिबा। मेरे कहने का यह आशय कतई नहीं है।
रानी मां – फिर क्या आशय है? आप महिलाओं का इस तरह अपमान नहीं कर सकते। उनका सम्मान करना चाहिए।
गौरी गाय – रानी साहिबा, आप जज साब की बात का बुरा मत मानिए। उनकी जबान थोड़ी खरखरी है। फिसल जाती है। वैसे यह दिल के बहुत अच्छे हैं।वह किसी का बुरा करते हैं।
शेर सिंह – रानी मां, गुस्सा थूक भी दीजिए। आप सभी जिस कार्य के लिए एकत्रित हो कर दरबार में आई हैं। उसे बारे में अपना पक्ष रखें।
रानी मां – खम्माघणी हजूर।
शेर सिंह – खम्माघणी रानी सा।
रानी मां – हुजूर मनुष्य नाम का जो प्राणी है, स्वार्थी, खतरनाक और षड्यंत्रकारी भी है। मेरे आस-पास जो मधुमक्खियां बैठी हैं। वे मेहनत करके फूलों का शहद चुन कर लाती हैं। किसी फूल से अधिक शहद मिलता है तो किसी से कम। फिर भी हमारी सैनिक और सेविका मधुमक्खियां हार नहीं मानती। पेड़ पर छत्ता बनाकर उसमें शहद जमा करती हैं। इंसान छत्ता तोड़कर हमारा शहद ले जाता है। छत्ते के नीचे धुआं कर देता है। जहरीले धुएं से बहुत सारी मधुमक्खियां शहीद हो जाती हैं। दूसरी बात यह है कि शहद के लिए इंसानी वैज्ञानिकों ने एक आविष्कार किया है। वह बॉक्स बनाता है। उनमें जालियां रख दी जाती है। फिर उसमें चीनी डाल देता है। हम चीनी के लालच में उस बॉक्स में चली जाती हैं। जो शहद इकट्ठा करके लाती हैं, वह जाली पर लगा देती हैं। इस तरह इंसान शहद जबरदस्ती से खुद खा जाता है। जो बचा उसे बाजार में बेच देता है।
पैंथर – अन्नदाता रानी मां सच कह रही हैं। ये वास्तव में बहुत मेहनत करती हैं। एक एक फूल पर जा कर शहद चूसती हैं। छत्ते में इकट्ठा करती हैं। जिससे आपातकाल में स्वयं को भूखमरी से बचा सकें।
अश्वराज – जज साब, अब मेरी भी सुनो। आदमी मेरी पीठ पर बैठ कर तेज दौड़ाने के लिए चाबुक मारता है। युद्ध में भी ले जाता है। वहां मुझे तलवारों के वार झेलने पड़ते हैं।
शेर सिंह – ठीक है ठीक है। मैं समझ गया कि इंसान सभी जीवों पर अत्याचार करता है। स्वार्थी है। मधुमक्खियों का शहद हजम कर जाता है। इनके लिए कुछ भी नहीं बचता। (पास ही गाय, भैंस, बकरी खड़ी थी। सामूहिक स्वर में बोलते हैं।)
सामूहिक स्वर – अन्नदाता, यह इंसान हमारा दूध खुद पी जाता है। उस में शक्कर या चीनी डालकर स्वादिष्ट मिठाइयां बनाता है। त्योहारों पर परिवार के साथ मजे ले कर खाता है। हमारे बच्चों को दूध की एक बूंद तक नहीं मिल पाती है।
मुर्गा – कुकड़कूं कूं। (मधुमक्खियों को देख कर वह भी आ गया और कहने लगा) सरकार, मुझे तो हर कोई खाने को तैयार बैठा रहता है। चटपटे मसालों में लपेट कर मुझे तेल में तला जाता है। फिर मदिरा के साथ चटकारे ले ले कर खाते हैं।आप ही बताइए मैं क्या करूं?
गिद्धराज – मधुमक्खियों की समस्या तो हल हो नहीं पाई है। तुम बीच में क्यों कूद पड़े हो? बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना।
मुर्गा – क्षमा करें महाराज गलती हो गई। अब बिना अनुमति नहीं बोलूंगा।
गोलू भालू – जज साब इसका एक ही उपाय है। इंसान को अदालत में बुलाइए। उसे फांसी की सजा दीजिए
रानी मां – (आंखों में तेज गुस्सा तैरने लगता है) मुझे लगता है,यहां कुछ होने वाला नहीं है। अब हमें ही कुछ करना होगा। सैनिक मधुमक्खियो, तुम सब एक साथ जाओ। रास्ते में जो भी मनुष्य मिले,उस पर टूट पड़ो। उसे सबक सिखा दो कि हमारे शहद को खा जाने का क्या परिणाम होता है?
शेर सिंह – रानी मां, इंसानों में कुछ अच्छे भी होते हैं कुछ बुरे भी। लेकिन जो प्रजातियां लुप्त होने के कगार पर पहुंच जाती हैं। इंसान उन्हें संरक्षण देता है। उनका जीवन बचाने का प्रयास करता है। जानवर घायल हो जाते हैं तो उनका इलाज करता है। इसलिए कोई भी कदम सोच समझ कर उठाइएगा। मैं मानता हूं कि मधुमक्खियों द्वारा एकत्रित शहद को कुछ स्वार्थी लोग बलात ले जाते हैं।इससे पूरी मानवता को दोषी ठहराया नहीं जा सकता। रानी मां – आप कुछ भी कहिए जज साब,आपकी बात सुनने को तैयार नहीं हूं।
गोरी गाय – सर, कोटा में अवनी शर्मा एक ऐसी डॉक्टर हैं, जो आवारा कुत्ते या आवारा गाएं बीमार हो जाती हैं तो वह उनका अपने खर्चे पर इलाज करती हैं। रात को घर से उबले हुए चावल या बची हुई रोटियां ले कर आती हैं। उन्हें खिलाती हैं। यह उनका प्रतिदिन का नियम है।
(समझाने के उपरांत भी मधुमक्खियों का क्रोध शांत नहीं होता। वह रानी मधुमक्खी के आदेश पर अदालत से निकल जाती हैं। रास्ते में जो भी इंसान मिला उस पर टूट पड़ी और घायल कर देती हैं। )
(पटाक्षेप)
रचना – अप्रकाशित एवं मौलिक है।
(बाल एकांकी) मधुमक्खियों ने लिया इंसान से प्रतिशोध -डॉ.रघुराज सिंह कर्मयोगी






