कोटा/महान साहित्यकार प्रेमचंद के 145 वें जन्म दिवस पर गत वर्षों के क्रम में विकल्प जन सांस्कृतिक मंच द्वारा उनकी कहानियों के पात्रों और उनके जीवन संघर्ष को केंद्रित करके मनाया गया। समारोह का प्रारंभ प्रेमचंद की कहानी ” दो बैलों की कहानी” के फिल्मी गीत और प्रेमचंद की कहानी “मंत्र ” की लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश राय द्विवेदी ने करते हुए कहा कि आज प्रेमचंद के आदर्शों को देश की युवा पीढ़ी तक पहुंचाहने की जरूरत है। मुख्य अतिथि , हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष रमेश वर्मा ने कहा कि प्रेमचंद के साहित्य को केन्द्र में रख कर आयोजित यह समारोह उनके गरीब किसानों और मजदूर पात्रों की सच्ची दास्तान है। प्रेमचंद ने जिन जीवन मूल्यों के आधार पर सृजन किया यहां आज उनकी पुनर्रचना हुई है।
समारोह के दूसरे सत्र में अंचल के तीन कथाकारों सुषमा अग्रवाल , डॉ. ज़ेबा फ़िज़ा और चांदलाल चकवाला को उनके कहानी लेखन के लिए विकल्प कथा सम्मान प्रदान किया गया। सुषमा अग्रवाल ने अपनी हिंदी कहानी “विकलांग” , डॉ. ज़ेबा फ़िज़ा ने उनकी उर्दू कहानी ” दाग़” और चंदालाल चकवाला ने अपनी हाड़ौती कहानी ” लाड़ो ठेका पे ” का प्रभावशाली वाचन किया। इन कहानियों पर समीक्षक नारायण शर्मा, डॉ. नंद किशोर महावर ने अभिमत व्यक्त किया। समारोह में डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव को
विश्वस्तरीय प्राइड ऑफ कोटा विकल्प सम्मान प्रदान किया गया। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि हम यह सोचें कि यदि आज हमारे समयप्रेमचंद जीवित होते तो उन्हीं क्या अनुभव करते। समारोह में कबीर दर्शन और विचारों को गुरुदेव प्रभाकर साहेब ने व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज को कबीर और प्रेमचंद जैसे लेखकों की सबसे अधिक जरूरत है। कार्यक्रम का संचालन महेन्द्र नेह ने तथा प्रथम सत्र में प्रेमचंद के फिल्मी योगदान का संयोजन भारत ज्ञान विज्ञान समिति के विजय राघव ने किया।
प्रेमचंद जयंती पर तीन कथाकार “विकल्प” कथा सम्मान से सम्मानित किए गए : समारोह में छाए रहे प्रेमचंद और उनके पात्र









