Wednesday, September 30, 2026
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प्रेमचंद जयंती – विविध भाषाओं में गूंजा प्रेमचंद का यथार्थ — कोटा से निकली साहित्य की नई ध्वनि

कोटा/महान साहित्यकार प्रेमचंद के 145 वां जन्म दिवस 31 जुलाई को एस.आर. रंगानाथन हॉल में गत वर्षों की निरंतरता में मनाया गया | राजकीय सार्वजनिक मंडलीय पुस्तकालय ,कोटा एवं ‘ विकल्प’ जन सांस्कृतिक मंच के साझा अभियान के अंतर्गत आयोजित इस गरिमामय समारोह में समूचे अंचल से प्रबुद्ध जन और साहित्यकार बड़ी संख्या में उपस्थित हुए| समारोह में प्रेमचंद के जीवन और उनके उपन्यासों व कहानियों के पात्रों के जीवन संघर्ष को बेहद रोचक और विविधता के साथ प्रस्तुत किया गया|

समारोह के मुख्य अतिथि , हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष डॉ . रमेश वर्मा ने अपने प्रभावी उद्बोधन में कहा कि प्रेमचंद ने एक सरकारी कर्मचारी होते हुए भी तत्कालीन ब्रिटिश शासन और जमींदारों के आतंक को चुनौती देते हुए गरीब किसानों के जीवन संघर्ष को अपने लेखन के केन्द्र में रखा .उनके उपन्यास सोजे वतन पर प्रतिबन्ध लगाया कर उसकी प्रतियां जला दी गईं , किन्तु उन्होंने परवाह नहीं की .उनके इसी साहस , सामाजिक – परिवर्तन के प्रति समर्पण और स्रजनात्मक -कौशल ने प्रेमचंद को विश्व-स्तरीय लोकप्रिय लेखक की पहचान दी . लेखकीय –संवाद के दौरान उठे एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान दौर में प्रेमचंद होते तो यह व्यवस्था उनकी लेखनी की धार को बर्दाश्त नहीं कर पाती और वे जेल में होते .

समारोह में अंचल के तीन कथाकारों सुषमा अग्रवाल , डॉ. ज़ेबा फ़िज़ा और चन्दा लाल चकवाला को उनके विशिष्ट लेखन के लिए “विकल्प कथा सम्मान “ और शाल ओढ़ा कर सम्मानित किया गया। सुषमा अग्रवाल ने अपनी हिंदी कहानी “विकलांग” , डॉ. ज़ेबा फ़िज़ा ने उनकी उर्दू कहानी ” दाग़” और चंदालाल चकवाला ने अपनी हाड़ौती कहानी ” लाड़ो ठेका पे ” का प्रभावशाली वाचन किया। इन कहानियों पर समीक्षक नारायण शर्मा, डॉ. नंद किशोर महावर और राजमल शर्मा ने अभिमत व्यक्त किया, जिनकी उपस्थित श्रोताओं ने तालियाँ बजा कर सराहना की |

समारोह में डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव को विकल्प जन सांस्कृतिक मंच द्वारा विश्वस्तरीय प्राइड ऑफ कोटा सम्मान प्रदान किया गया।कार्यक्रम का सञ्चालन करते हुए विकल्प के महा सचिव महेन्द्र नेह ने कहा कि डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने पुस्तकों के प्रति अतुलनीय प्रेम और समर्पण से कोटा को अंतर्राष्ट्रीय –स्तर तक पहुँचाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है . डॉ.श्रीवास्तव ने कहा कि प्रेमचंद के प्रेमचंद बनाने के पीछे उनकी साहित्य साधना थी और इस साधना के पीछे उनके विशाल ह्रदय में अनवरत जलने वाली आग थी ,जिसमें करोड़ों देशवासी जल रहे थे .वह देशप्रेम और आज़ादी की चाहत की आग थी |

समारोह में कबीर दर्शन और विचारों को गुरुदेव प्रभाकर साहेब ने व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज को कबीर और प्रेमचंद जैसे लेखकों की सबसे अधिक जरूरत है, जो वर्तमान में फ़ैल रहे अंध विश्वासों , व्यक्तिवाद और सामाजिक पतन के विरुद्ध तन कर खड़े हो सकें ।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश राय द्विवेदी ने कहा कि आज प्रेमचंद के आदर्शों को देश की युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है ,जिससे समाज में छाये हुए दिशाहीन अँधेरे को हटा कर एक नए उन्नत और प्रगतिशील समाज का निर्माण हो सके|

समारोह का प्रारंभ प्रेमचंद की कहानी ” दो बैलों की कथा ” के फिल्मी गीत और प्रेमचंद की कहानी “मंत्र ” की लघु फिल्म के प्रदर्शन के साथ हुआ , जिन्हें सभी उपस्थित दर्शकों ने पूरे मनोयोग से देखा .फिल्म –प्रदर्शन के संयोजक विजय राघव ने अपने वक्तव्य में प्रेमचंद द्वारा फिल्मी –दुनिया में प्रेमचंद के योगदान को विस्तार से बताते हुए कहा कि मिल –मजदूरों की स्थिति पर बनाई गयी उनकी फिल्म को सेंसर की कैंचियों ने काट कर उसे प्रदर्शित नहीं होने दिया ,जिसके विरोध में बंबई के मजदूरों ने ऐतिहासिक हड़ताल की . विकल्प के अध्यक्ष किशन लाल वर्मा ने सभी उपस्थित साहित्य प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया .

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