कोटा/मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण,जिला बाल संरक्षण इकाई तथा सृष्टि सेवा समिति की पहल पर कोटा में आयोजित हुई कार्यशाला में बाल संरक्षण और बाल अधिकारों के क्षेत्र से जुड़े सभी प्रमुख हितधारक एक साथ आए। कार्यशाला की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोटा की सचिव व अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गीता चौधरी ने की। कार्यशाला में धनफूल मीणा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कोटा ग्रामीण,गंगा सहाय पुलिस उप अधीक्षक कोटा शहर,रामराज मीणा सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई कोटा, राजेंद्र राठौर अध्यक्ष बाल कल्याण समिति कोटा, मानव तस्करी निरोधी इकाई कोटा ग्रामीण से प्रभारी निरीक्षक शौकत अली,शहर से प्रभारी उप निरीक्षक बबिता, निशी शर्मा निरीक्षक श्रम विभाग,संरक्षण अधिकारी दिनेश शर्मा,वरिष्ठ अधिवक्ता भुवनेश शर्मा, रेलवे पुलिस जीआरपी से पुलिस उप निरीक्षक अशोक, युधिष्ठिर चांनसी ,सचिव रामकृष्ण शिक्षण संस्थान, चाइल्ड हेल्प लाइन कोऑर्डिनेट नरेश मीणा,जिला समन्वयक भूपेंद्र सिंह, आउटरीच वर्कर संजय मेहरा कॉउंसलर ममता,फिल्ड कोऑर्डिनेटर रवि,रूकमण,अमित, राजकीय बालिका गृह से हिना,नर्बदा, तेजस्वनी बालिका गृह से प्रभारी प्रभा,AVA से सहायक परियोजना अधिकारी रेखा आदि ने हिस्सा लिया और एक सुर से स्वीकार किया कि बाल दुर्व्यापार यानी बच्चों की ट्रैफिकिंग से निपटने के लिए सभी एजेंसियों व विभागों को साथ मिलकर कार्रवाई करने की सख्त जरूरत है ताकि ट्रैफिकिंग गिरोहों में कानून का भय पैदा हो सके।
सृष्टि सेवा समिति देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है और कोटा में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम कर रहा है। जेआरसी बाल श्रम, बच्चों की ट्रैफिकिंग, बाल विवाह और बाल यौन शोषण के शिकार बच्चों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
बच्चों की ट्रैफिकिंग से निपटने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने आने वाली वाली चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने सामूहिक रूप से यह माना कि मौजूदा कानूनों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, संवेदनशील तबकों को ट्रैफिकिंग गिरोहों और उनके कामकाज के तरीकों के बारे में संवेदनशील बनाना और सभी एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना तत्काल जरूरी है, ताकि मुक्त कराए गए बच्चों के लिए तय समयसीमा में न्याय और पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम के
दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोटा की सचिव व अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गीता चौधरी ने सभी को समन्वय के साथ मिलकर कार्य करने की बात कही,बाल कल्याण समिति अध्यक्ष ने बाल तस्करी की रोकथाम को लेकर अपने अनुभव साँझा किये। सहायक निदेशक राम राज मीना ने जो टीम ग्राउंड लैवल पर कार्य करती है उसको और शशक्त बनाने की बात कही। इसके अतिरिक्त उपस्थित अन्य प्रतिभागियों ने भी अपने विचार रखे।
सृष्टि सेवा समिति ने पिछले वर्ष के दौरान 70 बच्चों को बाल श्रम, ट्रैफिकिंग और बाल विवाह से बचाया है। संगठन ने यह रेखांकित किया कि बच्चों की ट्रैफिकिंग केवल बाल मजदूरी या मुनाफे के लिए यौन शोषण तक ही सीमित नहीं है। बहुत से बच्चे, खास तौर से लड़कियां, जबरन विवाह के लिए भी ट्रैफिकिंग का शिकार बनती हैं। यह एक एक ऐसी समस्या है जिसके बारे में कम ही चर्चा की जाती है और रोकथाम के उपायों पर भी ज्यादा बात नहीं होती।
बताते चलें कि जुलाई में सृष्टि सेवा समिति ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के साथ मिलकर बच्चों की ट्रैफिकिंग को के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए रेलवे स्टेशनों पर अभियान चलाया।






