कोटा/ श्री हिंदी साहित्य समिति कोटा एवं ब्रजभाषा साहित्य समिति कोटा के संयुक्त तत्वावधान में कारगिल युद्ध के विजेता परमवीर चक्र से सम्मानित सेनानायक श्री योगेंद्र यादव को समर्पित 161वीं काव्य गोष्ठी का आयोजन संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम श्री हिंदी साहित्य समिति के साहित्य मंत्री खुशीराम सिंह चौधरी के आवास पर उनके 73वें जन्मदिन के अवसर पर रखा गया। श्री हिंदी साहित्य समिति के अध्यक्ष डॉ. रघुराज सिंह कर्मयोगी ने अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि पद को आगरा से पधारे विद्वान एवं प्रख्यात कवि रमेश अग्रवाल ने सुशोभित किया।
मंचासीन द्वारा मां सरस्वती की पूजा अर्चना, माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के बाद वरिष्ठ साहित्यकार, गजलकार,समीक्षक एवं संस्था के संरक्षक भगवत सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर काव्य गोष्ठी का आगाज किया। सफल संचालन कालीचरण राजपूत कर रहे थे। काव्य गोष्ठी में विमला चौधरी, मनीषा चौधरी, खुशीराम सिंह चौधरी, रामगोपाल गौतम, भगवत सिंह मयंक, कमलेश कमल दीनानाथ त्रिपाठी, श्रेयास, राम मोहन कौशिक ने ने मधुर काव्य पाठ किया। विभिन्न रसों में बहुत-बहुत कविताओं ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। डॉ. रघुराज सिंह कर्मयोगी ने अध्यक्षीय संबोधन के बाद राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कविता प्रस्तुत की। जिसे श्रोताओं को पसंद किया –
राष्ट्र धर्म की बलिवेदी पर, पगड़ी पहन बसंती निकले।
मां के आंसू पोंछ दीवाने,अरि का शीश काटने निकले।
गुरु गोविंद सिंह नीली पगड़ी, वार सहे सब छाती पर।
कांप गया था वजीर खां तब,खांडा खड़का हाथी पर।
चमक उठा भाला प्रताप का,गोगुंदा पीली माटी में।
देख पागड़ी सांगानेरी,अकबर रुका न हल्दीघाटी में।

कमलेश कमल ने अपने चिर परिचित अंदाज में ग्रामीण अंचल से जुड़ी कविता प्रस्तुत की तो राममोहन कौशिक ने अजय आहूजा की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए काव्य गोष्ठी को संबोधित किया। दीनानाथ त्रिपाठी ने “पीड़ा तो पीड़ा होती है” प्रस्तुत की। जिसे श्रोताओं को पसंद किया। रामगोपाल गौतम ने दोहे सुनाएं। खुशीराम सिंह चौधरी ने ब्रजभाषा की कविताएं मधुर आवाज में पेश कीं तो श्रोताओं खूब आनंद लिया। कालीचरण राजपूत ने भी बहुत अच्छी रचना प्रस्तुत की।






