बिगुल जैन
कोटा/कृषि विश्वविद्यालय कोटा का अष्टम् दीक्षांत समारोह दिनांक 19 जून, 2025 गुरूवार राज्य कृषि प्रबंध संस्थान (SIAM), कोटा के सभागार में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता माननीय राज्यपाल महोदय राजस्थान एवं कुलाधिपति, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा श्री हरिभाऊ बागडे ने की। डॉ. जे.पी. शर्मा, पूर्व कुलपति, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर की कार्यक्रम के दीक्षांत अतिथि रहे।
विश्वविद्यालय के माननीय कुलगुरू डॉ. अभय कुमार व्यास द्वारा अतिथियों का स्वागत एवं विश्वविद्यालय प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया तथा इस अवसर पर उन्होंने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय कोटा अपने तीनों अनिवार्य क्षेत्रों, शिक्षण, अनुसंधान तथा प्रसार शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल करने हेतु प्रयासरत है। कुलगुरू ने बताया कि अष्टम् दीक्षांत समारोह में अकादमिक वर्ष 2023-24 की स्नातक, स्नातकोत्तर एवं विद्यावाचस्पति परीक्षाओं में उत्तीर्ण 343 अभ्यर्थियों को उपाधियां प्रदान की गयी। इनमें से 287 कृषि, उद्यानिकी एवं वानिकी स्नातक, 44 कृषि, उद्यानिकी एवं वानिकी स्नातकोत्तर तथा 12 कृषि एवं उद्यानिकी विद्यावाचस्पति के अभ्यर्थी शामिल हैं। दीक्षांत समारोह में कुल 14 अभ्यर्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किये गये जिनमें से 09 स्वर्ण पदक छात्राओं तथा 05 छात्रों ने प्राप्त किये।
अकादमिक वर्ष 2023-24 हेतु सुश्री आरती चन्द्रन स्नातकोत्तर (वानिकी), वनोत्पाद एवं उपयोग को कुलाधिपति स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इसी प्रकार अकादमिक वर्ष 2023-24 हेतु सुश्री ट्विंकल वर्मा स्नातक (ऑनर्स) कृषि को कुलपति स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
स्नातक अभ्यर्थियों में आशुतोष पुरोहित, स्नातक (आनर्स) उद्यानिकी, बाबूलाल धाकड, स्नातक (आनर्स) वानिकी एवं ट्ंिवक्ल वर्मा, स्नातक (आनर्स) कृषि को स्वर्ण पदक दिये गये।
स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों में कुलदीप सिंह डागर, स्नातकोत्तर (उद्यानिकी) सब्जी विज्ञान, समीक्षा नागर, स्नातकोत्तर (उद्यानिकी) फल विज्ञान; आरती चन्द्रन, स्नातकोत्तर (वानिकी) वनोत्पाद एवं उपयोग; कविता रणवाँ, स्नातकोत्तर (कृषि) शस्य विज्ञान; उत्कर्ष गोयल, स्नातकोत्तर (कृषि) मृदा विज्ञान; निकिता कुमारी, स्नातकोत्तर (कृषि) पादप रोग विज्ञान; राजेश नागा, स्नातकोत्तर (कृषि) अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन एवं कलावती मीणा, स्नातकोत्तर (कृषि) कृषि प्रसार शिक्षा को स्वर्ण पदक दिये गये।
विद्यावाचस्पति अभ्यर्थियों में रूचि विश्नोई, अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन को विद्यावाचस्पति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।
दीक्षांत समारोह में माननीय राज्यपाल राजस्थान एवं कुलाधिपति, कृषि विश्वविद्यालय कोटा श्री हरिभाऊ बागडे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि डिग्री सिर्फ एक प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि आप-विद्यार्थियों के संघर्ष, धैर्य और निरंतर प्रयासों का सम्मान हैं। मैं चाहता हूं, आपने जो डिग्री प्राप्त की है, उसका उपयोग अब राष्ट्र और समाज के विकास में करें। यह भी गर्व की बात है कि कुल 14 पदकों में से 9 पदक छात्राओं द्वारा प्राप्त किये गये है वह लगभग 64 प्रतिशत है जिसमें कुलाधिपति व कुलगुरु पदक भी हमारी बेटियों द्वारा प्राप्त किये गये है। मैं सभी बेटियों को आशीर्वाद देता हूं। बेटियां आगे बढ़ेगी तभी समाज समुचित रूप में उन्नति के पथ पर अग्रसर हो सकता है। मुझे खुशी है कि राजस्थान में बेटियां उच्च शिक्षा में निरंतर आगे बढ़ रही है।
उन्हांेने कहा कि जैविक खेती से अधिक उत्पादन कैसे लिया जाए, इसके लिए हमारे कृषि विश्वविद्यालयों को ध्यान देने की जरूरत है तथा कृषि वैज्ञानिकों को इस हेतु चिंतन एवं मनन करने की आवश्यता है। क्योंकि इस तरह कृषि करने के लिए किसी भी रासायनिक कीटनाशक का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है। कृषि के अंतर्गत हमें इस समय एक ’स्वास्थ्य सिद्धांत’ की आवश्यकता है। यह इस तरह की हो जिसमें मिट्टी, मानव, पशु और पर्यावरण का स्वास्थ्य एक-दूसरे के साथ गहराई से जुड़ा रहे। इसी क्रम में ‘एग्री-फूड सिस्टम’ पर काम करने की आवश्यकता है। इसके अंतर्गत खेत से प्लेट तक का समग्र चक्र सम्मिलित होगा। इसमें उत्पादन, प्रसंस्करण, वितरण और पोषण सुरक्षा शामिल है।
डॉ. जे.पी. शर्मा, पूर्व कुलपति, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के द्वारा दीक्षांत उद्बोधन में कहा कि संस्था के सम्रग विकास के लिए उस संस्था के कर्मचारियोें की दक्षता व क्षमता निर्माण के लिए आवश्यकतानुसार समय-समय पर प्रशिक्षण देना अति महत्वपूर्ण होता है। इस ओर कृषि विश्वविद्यालय, कोटा ने अपने सभी वर्गों के कर्मचारियों के समग्र विकास हेतु टेªनिंग पॉलिसी निर्धारित कर उसे लागू कर दिया है और सभी वर्ग के लगभग 100ः स्टाफ को प्रशिक्षण दे चुका है। उन्होंने जैविक खेती पर जोर देते हुए कहा कि खेती में रसायनों के अंधाधुन प्रयोग से मानव स्वास्थय पर पडने वाले दुष्परिणाम सभी जानते हैं। इनसे बचने के लिए आने वाले समय में रसायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को कम करके समेकित फसल प्रबंधन, जैविक खेती तथा समेकित कृषि प्रणाली को अपनाने की आवश्यकता है।
दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा विकसित चना, मसूर एवं अलसी की पांच नई किस्मों (कोटा देशी चना-4, कोटा देशी चना-5, कोटा देशी चना-6, कोटा मसूर-5 एवं कोटा बारानी अलसी-7) का लोकार्पण किया गया। इसी के साथ पांच इकाईयों का भी लोकार्पण किया गया जिसमें विश्वविद्यालय परिसर में मॉल, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, झालावाड में एक पुस्तकालय भवन, कृषि अनुसंधान केन्द्र, कोटा पर बीज भण्डारण गोदाम तथा साथ ही कृषि महाविद्यालय, कोटा की मुख्य सडक एवं प्रवेश द्वार का शिलान्यास किया गया। समारोह के दौरान छः प्रकाशनों जिसमें पांच कृषि सफल उद्यमी बुकलेट एवं एक स्वर्ण जयंति मशाल संचलन अभियान बुकलेट का विमोचन किया गया।
दीक्षांत समारोह का लाईव स्ट्रीमिंग कृषि विश्वविद्यालय कोटा के यूनिवर्सिटी वेबसाइट, फेसबुक पेज एवं यू-ट्यूब चैनल पर भी लाईव किया गया।
दीक्षांत समारोह में राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा के कुलगुरू प्रो. एस. के. सिंह, कोटा विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत सहित माननीय सदस्य प्रबंध मण्डल, विद्या परिषद, महाविद्यालयों के अधिष्ठातागण, विश्वविद्यालय के निदेशकगण, वित्त निंयत्रक, परीक्षा नियंत्रक, सम्पदा अधिकारी एवं विश्वविद्यालय की सभी ईकाइयों के अधिकारी व कर्मचारीगण एवं सेवानिवृत अधिकारी भी उपस्थित रहे। दीक्षांत कार्यक्रम में जिला प्रशासन के अधिकारीगण, विभिन्न विभागों के अधिकारीगण, कृषि उद्योगपति श्री ताराचंद गोयल तथा कृषि उद्यमी, नवोन्मेषी कृषक, कृषि स्टार्टअप्स उद्यमी, विभिन्न उपाधि प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी एवं उनके अभिभावकगण तथा प्रेस मीडिया, समाचार पत्रों, चैनल्स के संवाददातागण इत्यादि भी समारोह में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अन्त में विश्वविद्यालय कुलसचिव श्रीमती मनीषा तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए दीक्षांत समारोह के सफल आयोजन हेतु सभी का आभार व्यक्त किया।






