Saturday, April 18, 2026
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स्वतंत्रता सेनानी महारानी अवंती बाई लोधी-कालीचरण राजपूत

स्वतंत्रता सेनानी महारानी अवंती बाई लोधी…..

 

मातृभूमि की माटी, हमको सदा_ सदा रही है प्यारी ।

कभी पहचान की मोहताज, रही न भारत की नारी ।।

आजादी के आंदोलन में, उनकी रही भूमिका भारी ।

इसी समय विद्रोह की नेता, थी रही अवंती नारी ।।

स्वतंत्रता का संग्राम रहा, विविध प्रसंगों का चक्र ।

स्त्री पुरुष संघर्ष में रत थे, समय रहा था वक्र ।।

भारत की भूमि पर जन्मी, गार्गी, मैत्री, अनुसुइया ।

लोपमुद्रा, सावित्रीबाई पधारी, और कुंती सी मैया ।।

मातृभूमि की बलिवेदी पर, तब चढ़ी बहुत सी नारी।

अवंतीबाई और पद्मिनी का, कहर रहा था भारी ।

दुर्गावती नहीं थी पीछे, अग्रगण्य रही लक्ष्मीबाई ।

काट काट दोनों ने गोरों को, भर दीं सारी खाई ।।

इन सबका उत्कृष्ट शौर्य, साहस और बलिदान ।

भुला नहीं सकते हैं हम, यह जाने सकल जहांन ।।

स्वतंत्रता का समर दौर हो, भले आज का काल ।

वीरांगनाओं के साहस ने, बुरा किया था हाल ।।

अवंतीबाई ने सोचा था, नहीं दासता स्वीकार करूंगी ।

रणभूमि में जाकर खुद ही, गोरों के प्राण हरूंगी ।।

कूद पड़ी अवंती रण में, मातृभूमि की रक्षा हेतु ।

उनकी अपनी सारी सेना, बनी रण दरिया का सेतु ।।

मातृभूमि की रक्षा में, अवंती ने प्राण गंवाए ।

ओजपूर्ण कर्तव्य रानी के, सबके मन को भाए ।।

कुर्बानी रानी की आज भी, सबको याद दिलाती ।

ओजपूर्ण कौशल की बातें, जन _जन को भाती ।।

के.सी. राजपूत, कोटा

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