Tuesday, April 21, 2026
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सोलह कारण भावनाओं से बनते हैं तीर्थंकर – पंडित पारस जी शास्त्री

कोटा,8 मई । पुण्योदय अतिशय क्षेत्र नसियां जी दादाबाड़ी कोटा में परम पूज्य आचार्य भगवन 108 श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य गुरूदेव निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद एवं प्रेरणा से आठ दिवसीय पुण्योदय सम्यग्ज्ञान शिक्षण शिविर का पंचम दिवस पर शिविर संयोजिका अर्चना रानी जैन सर्राफ ने बताया कि नसियां जी में प्रातः काल पूज्य मुनि श्री 108 विभोरसागर जी महाराज श्री के प्रवचन हुए जिसमें उन्होंने बताया की जो होता है त्याग से ही जीवन की उन्नति होती है जिसके जीवन में त्याग नहीं होता उसके जीवन में उन्नति का मार्ग अवरुद्ध रहता है जैन धर्म के अनुसार, त्याग जीवन की उन्नति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। त्याग के बिना जीवन में उन्नति प्राप्त करना असंभव है। प्राणी मात्र को त्याग को अपनाना चाहिए और जीवन में उन्नति प्राप्त करनी चाहिए। इसीलिए आचायो ने त्याग को श्रेयस्कर कहा है।

अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ ने बताया कि प्रवचनों के पश्चात सांगानेर से पधारे पंडित श्री पारस जैन शास्त्री ने तत्वार्थ सूत्र की कक्षा में सभी को बताया की तीर्थंकर प्रकृति नाम कर्म की सर्वश्रेष्ठ प्रकृति है इस प्रकृति से तीर्थंकर पद को प्राप्त किया जाता है, तीर्थंकर प्रकृति एक अद्वितीय प्रकृति है जो उदय में आने से पहले ही अपने फल दिखने लगती है। इसका अर्थ है कि जब यह प्रकृति किसी जीव के कर्मों में होती है, तो वह जीव अपने कर्मों के अनुसार पहले से ही शुभ परिणाम और तीर्थंकर बनने की संभावना प्रदर्शित करने लगता है तीर्थंकर प्रकृति के कारण ही कोई जीव तीर्थंकर बन पाता है, जो संसार सागर से पार लगाने वाला तीर्थ की रचना करता है. तीर्थंकर वे व्यक्ति हैं जो पूरी तरह से क्रोध, अभिमान, छल, इच्छा आदि पर विजय प्राप्त करते हैं.| अगर किसी जीव के कर्मों में तीर्थंकर प्रकृति है, तो वह जीव पहले से ही अपने व्यवहार, ज्ञान, और जीवनशैली में तीर्थंकर के गुणों को प्रदर्शित करने लगेगा। यह पहले से ही दर्शाने लगेगा कि वह तीर्थंकर बनने की ओर अग्रसर है.

 

संयोजक धर्मचंद जैन धनोप्या ने बताया कि जहां देव शास्त्र गुरु धर्म, अध्यात्म आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति का अद्भुत संगम से बालबोध भाग (1) एक, बालबोध भाग ( 2) दो, छहढाला (पूर्वार्ध), छहढाला (उत्तरार्द्ध),इष्टोपदेश ग्रंथ,तत्वार्थ सूत्र,प्रश्नोत्तरी रत्नमालिका, आदि ग्रंथों के लाभ मिल रहा हे

 

निदेशक हुकम जैन काका ने बताया आज के अल्पाहार पुण्यार्जक श्रीमति सरिता जी राजेंद्र जी रोहित जी नितिशा जी निमिशा जी समस्त ठग परिवार शादी की वर्षगांठ के अवसर पर दीप प्रज्जवन कर महाराज श्री को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया कार्यकारणी ने पुण्यार्जक परिवार का तिलक माला दुप्पटे पगड़ी पहनाकर कर सम्मान किया

प्रशसनिक मंत्री अशोक खादी ने बताया आज प्रात:11 पांडूशिलाओ पर 11 श्री जी के 11 झारी के द्वारा 11 पुण्यार्जको ने श्रीमान राजेंद्र जी आशा जी हरसोरा,सुशीला बाई विवेक जी ठोरा ,महावीर जी मित्तल, कमलेश जी चक्रेश जी कोटिया, विमलाबाई धनराज जी जेठानीवाल, महेंद्र जी अतुल जी पाटनी, , पुष्पाबाई महावीर जी बागड़िया, गोपाल बाई लोकेश-सारिका पटौदी , सुरेश जी राहुल जी साकुण्या, जयप्रकाश जी सुनीता जी सबदरा , धूमधाम से शांति धारा करके भगवान को विहार करवाया

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