Saturday, April 18, 2026
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भारत में शूटिंग के लिए एक साल के भीतर इंडिया सिने हब (आईसीएच) में सौ से अधिक आवेदन प्राप्त हुएः पृथुल कुमार, एमडी, एनएफडीसी

नई दिल्ली/अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने आज मुंबई में वेव्स 2025 के दौरान’लाइटस, कैमरा, गंतव्य! फिल्मों के माध्यम से भारत की ब्रांडिंग ‘विषय पर पैनल चर्चा में कहा, “यह भारत का समय है; दुनिया भर में हर कोई यह बात जानता है।”

चर्चा के अन्य पैनलिस्टों में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव  पृथुल कुमार, एनएफडीसी के एमडी श्री नितिन तेज आहूजा, प्रोड्यूसर्स गिल्ड के सीईओ  राजेंद्र कुमार, गुजरात सरकार के सचिव) पर्यटन (, आईटीडीसी की एमडी मुग्धा सिन्हा शामिल थीं।

पृथुल कुमार, संयुक्त सचिव) सूचना एवं प्रसारण (और एनएफडीसी के एमडी ने बताया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा गठित इंडिया सिने हब) आईसीएच (वैश्विक फिल्म निर्माताओं के लिए भारत में फिल्म शूटिंग को बढ़ावा देता है और सुविधा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह भारत में फिल्मांकन के लिए वन-स्टॉप गंतव्य है, जिसमें फिल्म-निर्माण सुविधा के लिए विभिन्न राज्य पोर्टलों केलिंक भी मौजूद हैं। यह एकल-खिड़की सुविधा और मंजूरी तंत्र के रूप में कार्य करता है, जो भारत में फिल्मांकन को आसान बनाता है।

आसान बनाता है। इसके साथ ही यह फिल्म-अनुकूल इकोसिस्टम बनाने और देश को फिल्मांकन गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने का प्रयास करता है। 2023 में प्रोत्साहनों को बढ़ाया गया है और इसके परिणामस्वरुप, व्यापार में दस गुना वृद्धि हुई है और पोर्टल पर भारत में शूटिंग करने के लिए सौ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन प्रोत्साहनों ने विदेशी फिल्म निर्माताओं के लिए भारत को एक आकर्षक शूटिंग गंतव्य बना दिया है।

 

भूमि पेडनेकर ने कहा कि आने वाले दिनों में बहुत सारे विदेशी फिल्म-निर्माण कंपनियां भारत आने वाली हैं। उन्होंने कहा, “दुनिया के कई हिस्सों में लोग हमारे सिनेमा की वजह से मुंबई को जानते हैं। “भारत के गंतव्यों में शूटिंग की अपनी प्राथमिकता के बारे में भूमि पेडनेकर ने कहा, “मेरी अधिकांश फिल्में सांस्कृतिक रूप से गंभीर हैं और देश के केन्द्रीय स्थल की फिल्में हैं। हमारा जज्बा और हमारे सिनेमा के लिए प्यार, जिस तरह से हमारे कलाकार और क्रू समर्पण के साथ काम करते हैं, वह अतुलनीय है।”

भारत के फिल्म उद्योग के बारे में भूमि पेडनेकर ने कहा कि अब फिल्म सेट पर काम करने वाले पुरुषों और महिलाओं की संख्या लगभग बराबर है। उन्होंने कहा कि भारत में फिल्म निर्माण में लगातार बेहतर लोग आ रहे हैं।

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