कोटा/ वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ पश्चिम मध्य रेलवे मंडल कार्यालय के सभागार में ब्रजभाषा साहित्य समिति कोटा एवं सहयोगी संस्था श्री हिंदी साहित्य समिति कोटा के संयुक्त तत्वावधान में स्वामी पीतम सिंह सम्मान समारोह – 2025 कार्यक्रम भव्य तरीके से संपन्न हुआ। अध्यक्षता वल्लभाचार्य संप्रदाय के महाप्रभु श्री श्री 1000 श्री स्वामी विनय बाबा गोस्वामी ने की। केंद्रीय साहित्य अकादमी नई दिल्ली से हाड़ोती भाषा का सर्वोच्च पुरस्कार प्राप्त कर कोटा का परचम लहराने वाले मधुर गीतकार श्री मुकुटमणिराज मुख्य अतिथि के पद पर शोभायमान रहे। इस अवसर पर मथुरा से पधारे ब्रजभाषा के विद्वान श्री अशोक अज्ञ को अंगवस्त्र, शॉल, श्रीफल एवं नगद राशि देकर स्वामी पीतम सिंह सम्मान – 2025 प्रदान किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि ब्रजभाषा भगवान कृष्ण के मुखारविंद से निकली है। इसलिए इसका एक विशेष स्थान है। इसके अतिरिक्त कालीचरण राजपूत को भी उनके साहित्यिक उपलब्धियां के लिए अलंकृत किया गया।
ब्रजभाषा साहित्य समिति के अध्यक्ष श्री शून्य आकांक्षी एवं महासचिव श्री कमलेश कमल, डॉ अशोक कुमार, मंचासीन रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन श्री हिंदी साहित्य समिति के अध्यक्ष डॉ. रघुराज सिंह कर्मयोगी ने किया। मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण करने के बाद सरस्वती वंदना श्री भगवत सिंह मयंक ने की। मथुरा के विद्वान श्री अशोक अज्ञ का परिचय श्री अशोक वशिष्ठ ने दिया। महाप्रभु विनय गोस्वामी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ब्रजभाषा बहुत ही मधुर भाषा है। महाकवि सूरदास एवं रसखान जैसे कवियों ने इस भाषा को समृद्ध किया है। ब्रजभाषा ने मुगल काल में भी ऊंचाइयां प्राप्त कीं। अनेक कवियों ने ब्रज भाषा में भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन बहुत ही सुन्दर तरीके से किया है।
मुख्य अतिथि श्री मुकुटमणिराज ने अपने उद्बोधन में कहा के ब्रजभाषा जिस मुकाम पर पहुंच चुकी थी, देश की दूसरी भाषाएं अभी भी वह स्थान ग्रहण नहीं कर पाई हैं । गंगापुर से लेकर अलवर, भरतपुर, करौली, आगरा, मथुरा, मेरठ तक का क्षेत्र ब्रजभाषा ही बोलता है। इस अवसर पर सलीम स्वतंत्र, ज्ञान सिंह गंभीर, दीनानाथ त्रिपाठी, बालू लाल वर्मा, कालीचरण राजपूत, डॉ अपर्णा पांडे, राजेंद्र मुनि, देशबंधु दिव्य, मनु बशिष्ठ, रघुनंदन हटीला, योगमाया शर्मा,गोविंद सिंह छोकर, यशपाल,नीरज कुमार ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।







