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– श्री नसियां जी क्षेत्रीय दिगम्बर जैन समाज प्रबन्ध कार्यकारिणी- श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन त्रिकाल चौबीसी पुण्योदय अतिशय क्षेत्र नसियां जी दादाबाड़ी,
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कोटा श्री 1008 भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महामहोत्सव
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प.पू.सन्त शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभाव शिष् यपं.पू. निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री 108 सुधा सागर जी महाराज के आशीर्वाद से मुनी श्री 108 अरह सागर जी एवं विभोर सागर जी महाराज के सानिध्य 10.04.2025, गुरुवार, समयः प्रातः 5.15 बजे – पुण्योदय अतिशय क्षेत्र नसियां जी दादाबाड़ी, कोटा भव्य प्रभात फेरी छोटा चौराहा, पोस्ट ऑफीस की गली से होते हुये नसियां जी पहुंचेगा जिसमें मुख्य आकर्षक पाठशाला के बच्चों के द्वारा बैंड प्रदर्शन,त्रिशला माता के 16 सपने,श्री 1008 महावीर भगवान के जीवन चरित्र पर आकर्षक झांकियां ,11 पालकीयो में विराजमान माँ जिनवाणी की प्रभावना, दादाबाड़ी महिला मण्डल के द्वारा आकर्षक प्रदर्शन होगा,श्रुत ज्ञान धार्मिक तंबोला अनेक उपहार के साथ,भक्तिमय पालना झूलाना,विभिन्न धार्मिक आयोजन होगे
सुधा सागर बालिका छात्रावास कोटा की अध्यक्ष श्रीमती अर्चना ( रानी) जैन सर्राफ का कहना है कि हमें महावीर जयंती भगवान महावीर के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करती हे भगवान महावीर स्वामी की शिक्षाओं से हमें अहिंसा करुणा क्षमता और सत्य संयम जैसे नैतिक मूल्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करती है महावीर जयंती केवल एक धार्मिक त्योहार ही नहीं बल्कि यह एक आत्म सुधार और आत्म शुद्धि के मार्ग को अपनाने का अवसर है संयम भगवान महावीर द्वारा जीवन की जटिलताएं एवं सुविधाओं में राहत पाने का दिशाकृ दर्शन इसी से प्राप्त होता है। अभाव आदि संभावनाओं का समाधान भी संयम से प्राप्त किया जा सकता है आज राष्ट्र जिस संकट पूर्ण स्थिति से गुजर रहा है उसके समाधान के लिए सभी देशवासियों के लिए संयम साधना अति आवश्यक है जो संयम करता है वह अधिक समाधान एवं राहत प्राप्त करता है आज के युग में सत्ता और तानाशाही का भी बोलबाला है अतरू हम सभी संयम से काम लें तो सुख शांति मिल सकती है।
श्री दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र नसियां जी दादाबाड़ी के अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ का कहना है कि सर्दी गर्मी बरसात हर मौसम दिगंबर अवस्था बिना जूते चप्पल के पद बिहार 24 घंटे में एक बार भोजन और पानी, औषधि दवाइयां, का आजीवन त्याग कंकड़ पत्थर पर चलना और जमीन पर रात्रि में चार घंटे वह भी एक करवट में शयन एसी कूलर पंखे आदि का त्याग आजीवन ब्रह्मचर्य कंचन कामिनी के त्यागी ऐसे होते हैं दिगंबर मुनि यह तो मुनि का बाहरी स्वरूप है जिसे देखकर सुनकर हम संसारी कल्पना भी नहीं कर पाते आश्चर्य चकित हो जाते हैं यह वर्तमान में विश्व की सर्वोत्कृष्ट कृति एवं भगवत स्वरूप में मनुष्य को देखा जा सकता है और हमने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को 56 वर्षों तक इस भारत भूमि पर स्व पर कल्याण के लिए विहार करते देखा है आज भी हजारों की संख्या में दिगंबर संत इस भारत भूमि को विचरण कर पवित्र कर रहे हैं यह भगवान महावीर का बाहरी स्वरूप है अंदर में भगवान महावीर सच्चे वैज्ञानिक थे आज के वैज्ञानिकों के सिद्धांतों और नियम अल्पकाल में गलत सिद्ध होने लगते हैं और वैज्ञानिक स्वयं स्वीकार भी करते हैं जिसे हम सब लोगों ने जिस कोरोना काल में स्टेरॉयड और रेमदेसीविर इंजेक्शनके दुष्प्रभाव और साइड इफेक्ट के रूप में देखा है और देख रहे हैं किंतु भगवान महावीर ने जो सिद्धांत कार्य और परिणाम के रूप में चेतन आत्माओं पर प्रयोग कर प्रतिपादित किए हुए आज भी उतने ही सत्य, उपयोगी और प्रासंगिक है जितने उनके काल में थे आज 2550 वर्ष के बाद भी वर्तमान में वर्धमान की आवश्यकता है भगवान महावीर के सिद्धांत जियो और जीने दो, परस्परोपग्रहो जीवानाम् , अहिंसा, विश्व धर्म, समाजवाद और अपरिग्रह प्राणी मात्र के प्रति दया स्व पर हितकारी जीवन और सत्य अचोर्य जैसे सिद्धांतों को अपनाया जाए खान-पान और जीवन शैली को ठीक कर लिया जावे तो विश्व में शांति और मैत्री स्थापित हो सकती है जिसके लिए पूरा विश्व चिंतित है इन्हीं सिद्धांतों पर चलकर भारत विश्व गुरु बनेगा








