कोटा, 5 अप्रैल: खारवाल खारोल समाज की आस्था का केंद्र सांभर झील स्थित भगवती माता शाकंभरी देवी के दर्शनार्थ एवं शाकंभरी पूजा समिति सांभर लेक के सानिध्य में दो दिवसीय मेले के साथ आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों एंव सामूहिक विवाह सम्मेलन आदि कार्यक्रमों मे लेने हेतु “खारवाल खारोल समाज समिति संभाग” के अध्यक्ष- सत्यनारायण खारवाल के नेतृत्व मे कोटा संभाग समिति के पदाधिकारीगण एवं सदस्यो का जत्था कोटा घटोत्कच सर्किल से 5 अप्रैल को रवाना हुआ। कोटा संभाग के अलावा भी अपनी कुलदेवी मां शाकंभरी के दर्शनार्थ प्रदेश के अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़, उदयपुर, पाली, जोधपुर, केकड़ी, मालपुरा, टोंक जयपुर सहित गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली आदि प्रदेशों से पदयात्रीयो सहीत हजारों भक्तो एंव श्रद्धालु समाजजनों के जत्थे निजी वाहनों से सांभर पहुंच रहे है। *शाकंभरी माता मंदिर का महत्व*
शाकंभरी माता मंदिर राजस्थान के अलौकिक मंदिरों में से एक है, जो जयपुर शहर से लगभग 100 किलोमीटर दूर सांभर खारे पानी की झील के बीच पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर माता शाकंभरी के भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। माना जाता है कि यह मंदिर सातवीं-आठवीं शताब्दी में बनाया गया था।






