Saturday, October 10, 2026
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ईद की मुबारकबाद के साथ एक ग़ज़ल शकूर अनवर

ईद की मुबारकबाद के साथ एक ग़ज़ल शकूर अनवर

कितनी खुशियों भरा है ईद का दिन। सब दिनों से जुदा है ईद का दिन ।।

जैसे अब्रे-बहार * का झोंका। जैसे बादे-सबा* है ईद का दिन ।। *

है सराबोर रंगो-ख़ुशबू से। फूल जैसे खिला है ईद का दिन ।।

न कोई वाक़िया* न पसमंज़र *। सिर्फ़ शुक्र ए ख़ुदा है ईद का दिन ।।

क्यूँ न मग़रूर हो ये ईद की शब। ख़त्म इस पर हुआ है ईद का दिन ।।

तुम भी ख़ुशियाँ समेट लो “अनवर”। लो चला है चला है ईद का दिन ।।

 

✍️शकूर अनवर

 

(शब्दार्थ)

अब्रे-बहार’ बसंत ऋतु के बादल बादे-सबा* सुबह की ठंडी हवा वाक़िया घटना पसमंज़र

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