ईद की मुबारकबाद के साथ एक ग़ज़ल शकूर अनवर
कितनी खुशियों भरा है ईद का दिन। सब दिनों से जुदा है ईद का दिन ।।
जैसे अब्रे-बहार * का झोंका। जैसे बादे-सबा* है ईद का दिन ।। *
है सराबोर रंगो-ख़ुशबू से। फूल जैसे खिला है ईद का दिन ।।
न कोई वाक़िया* न पसमंज़र *। सिर्फ़ शुक्र ए ख़ुदा है ईद का दिन ।।
क्यूँ न मग़रूर हो ये ईद की शब। ख़त्म इस पर हुआ है ईद का दिन ।।
तुम भी ख़ुशियाँ समेट लो “अनवर”। लो चला है चला है ईद का दिन ।।
✍️शकूर अनवर
(शब्दार्थ)
अब्रे-बहार’ बसंत ऋतु के बादल बादे-सबा* सुबह की ठंडी हवा वाक़िया घटना पसमंज़र
ईद की मुबारकबाद के साथ एक ग़ज़ल शकूर अनवर






