बांरा/जहां एक और पूरी दुनिया और वैज्ञानिक बिगड़ते जलवायु संतुलन पर चिंता व्यक्त कर *पौधारोपण* और उनको संरक्षित करके जंगल और वन क्षेत्र को निरंतर बढ़ाने का कार्य कर रही हैं ।वहीं दूसरी ओर हाडोती का *चेरापूंजी* कहलाने वाला हमारे शाहाबाद का वन क्षेत्र निरंतर कटाई के कारण सिकुड़ता जा रहा है।प्रतिवर्ष लाखों पर्यावरण प्रेमी और स्वयंसेवी संस्थाएं लाखों की संख्या में पौधारोपण करती है। और इस बार तो स्वयं हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा भी *एक पेड़ मां के नाम* अभियान चलाकर लाखों की संख्या में पौधारोपण का कार्य हुआ और इसी अभियान के तहत अभी-अभी उनकी विदेश यात्रा में भी उनके द्वारा पौधारोपण किया गया।
परंतु वही सरकार द्वारा *शाहाबाद* के घने जंगलों में विकास के नाम पर हाइड्रो पावर प्लांट मंजूरी देकर *119759* पेड़ों की बलि देना ।यह बहुत ही दुःख का विषय है।पर्यावरण प्रेमी मुकेश सोनी *श्री राधा गोविंद स्मृति सेवा संस्थान* (श्री राधे ज्वेलर्स परिवार )बारां ने इस पावर प्लांट के लिए अपना विरोध प्रकट किया है। क्योंकि यह जंगल संरक्षित वन क्षेत्र के साथ-साथ अभ्यारण के लिए संरक्षित है ।वही दूसरी और विकास के नाम पर हाइड्रो पावर प्लांट की मंजूरी देकर सरकार पर्यावरण को विनाश की ओर ले जाने का प्रयास कर रही है ।
हां पर देश कीमती आयुर्वेदिक औषधि के साथ-साथ लाखों की संख्या में जीव जंतुओं का बसेरा है ।वह भी समाप्त हो जाएगा।
विकास हो ,,,,
विकास होना भी चाहिए,,,,
और विकास का कहीं विरोध भी नहीं होता ,,,,
परंतु *पर्यावरण* का विनाश होकर विकास बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं है।
इसी विषय को लेकर पर्यावरणप्रेमी मुकेश सोनी ने बारां /अटरु विधायक राधेश्याम बैरवा शाहाबाद के घने जंगलों में लगने वाले हाइड्रो पावर प्लांट को अन्यत्र जगह लगाया जाए ताकि इस जंगल को कटने से रोका जा सके ।साथ ही विधानसभा में भी इस विषय को लेकर चर्चा करने के लिए अपनी बात रखी।
विधायक महोदय ने बताया कि वो अपने प्रश्न काल में इस विषय को रखेंगे और साथ ही माननीय मुख्यमंत्री महोदय को भी इससे अवगत कराया जाएगा।*मुकेश सोनी* ने सभी पर्यावरण प्रेमियों को और स्वयंसेवी सभी संस्थाओं और व्यापार महासंघ के अंतर्गत आने वाले सभी संगठन और खास तौर पर शाहाबाद वासियों जिनको आजीवन पीढ़ी दर पीढ़ी यह *प्रकृति मां* की गोद मिली है उनसे भी आग्रह किया है कि हम सभी को यह मिलकर *जंगल बचाना* चाहिए।सरकार से आग्रह किया की इस प्लांट के लिए पुन: विचार कर इसको अन्यत्र जगह स्थानांतरित करें क्योंकि इस जंगल को काटने के बाद इसको पुनः जीवित करना या लगाना संभव नहीं है।
क्योंकि यह मानव निर्मित जंगल नहीं है यह तो स्वयं प्रकृति मां द्वारा उत्पन्न क्षेत्र है इसलिए इसको बचाये और बढ़ाये।






