Saturday, April 18, 2026
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गंगा सी धारा फूटै छै ई मायड़ राजस्थानी मं……….देवकी दर्पण

22 फरवरी / काव्य कुंज रोटेदा मे हाडी राणी राजस्थानी भाषा साहित्य एवं सिरजण मंच रोटेदा व अखिल भारतीय साहित्य परिषद कापरेन के तत्वावधान मे अन्तर्राष्ट्रीय मायड भाषा दिवस पर काव्य एवं विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी की अध्यक्षता देवकिशन सैनी व्यवस्थापक ग्राम सेवा सहकारी समिति रोटेदा ने की। मुख्यअतिथि समाजसेवी एवं पत्रकार मयंक जेन व विशिष्ट अतिथि साहित्यकार लोकेश आजाद रहे।

काव्य गोष्ठी की सुरुआत माँ सरस्वती के दीप प्रज्वलन के बाद सत्यप्रकाश गोतम की सरस्वती वन्दना से हुई। वही “मायड़ भासा हर डील मं आर देगी झटको,जध जार दबैगो मानत्या को खटको..व्यंग रचना पढ़ी। मनीष मेहरा ने मायड़ भाषा की मान्यता पर अपने विचार रखे और “मूं जूती कोनै पांव की” नारी चेतना पर बेहतरीन काव्य पाठ किया। मनोज सोनी ने मायड़ भाषा की मान्यता को बहुत जरूरी बताया और “सद्शिक्षा की नसरणी पै लाग्या चरित्र का अेक अेक गात्या पै सबर की झाळ ठैरार….अपना काव्य पाठ किया। पुष्कर चोधरी नै व्यग्यात्मक काव्यपाठ कर मायड़ भाषा की मान्यता हेतु संदेश दिया। मनीष सैनी ने मायड़ भाषा मे अपने अनुभव उद्गार प्रकट किये। गोष्ठी के सफल संचालक लोकेश आजाद ने मायड़ भाषा को अपना गौरव बताते हुये” पूजनीय घणी म्हारी राजस्थानी”कविता पाठ किया। कोमल शर्मा ने मायड़ भाषा मे समसामयिक गीत पढकर तालियाँ बटोरी। देवकी दर्पण ने मायड़ भाषा मान्यता हेतु राष्ट्रपिता महात्मा गांधी रविन्द्र नाथ टैगोर ,विदेसी विद्वान कर्नल टाड ,एल पी टेस्टीटोरी,डा.डब्ल्यू एस आदि को राजस्थानी का पक्षधर बताते हुये भाषा मान्यता हेतु अपना प्रेरक गीत “गंगा सी धारा फूटै छै ई मायड़ राजस्थानी मं। थे लिखारां डूब डूब कै ईं मायड़ की बाणी मं……। अन्त मे हाडी राणी राजस्थानी भाषा साहित्य एवं सिरजण मंच संयोजक देवकी दर्पण ने सभी मेहमान कवियो का आभार एवं धन्यवाद प्रकट किया।

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