*जलन से जलतरंग* पुस्तक की समीक्षा.
लेखक…राम शर्मा “कापरेन”.
समीक्षक……दिनेश गौतम.(stn चैनल)
नाटक मंचन की दुनिया अलग ही होती है, इसमें कलाकार अभिनय से पात्र को जीवंत बनाता है, तब जाकर नाटक सफलता के पायदान तक पहुंचता है. प्राचीन समय में नाटक ऐसा माध्यम होता था, मनोरंजन के साथ- साथ नैतिकता का पाठ पढ़ाता था, शहर व गांव में रामलीला रासलीला, के अलावा धार्मिक नाटकों का मंचन इंसान को तनाव से मुक्ति दिलाता था. धीरे-धीरे नाटक मंचन को सोशल मीडिया ने प्रभावित किया हो, लेकिन आज भी उसकी महतता है.
नाटक को प्रदर्शन के एक ऐसे रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें संघर्ष, भावनाएं ,संवाद और क्रिया के माध्यम से मानवीय अनुभवों का चित्रण शामिल है, एक ऐसी कहानी या स्थिति प्रस्तुत करता है जो दर्शकों की भावनाओं को आकर्षित करती है. तनाव उत्तेजना या स्वानुभूति जैसे तीव्र भावनाओं को जगाती है.
राम शर्मा की पुस्तक पढ़कर पाठक को रोचकता दिलाती है. इनके द्वारा लिखे गए नाटक वास्तविक घटनाओं व सामाजिक परिवेश को लेकर लिखे गए, उन्हें मंचों पर सराहा गया.
मूल रूप से श्रीपूरा कापरेन निवासी राम शर्मा हाडोती के ऐसे रंगकर्मी है, जिन्होंने हाडोती के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर अपने द्वारा लिखे नाटक में अपनी पहचान बनाई. अपनी सशक्त कला रंगमंच की दुनिया में और लघु फिल्मों में अपनी जमीन बनाई. नर्सिंग प्रशिक्षण के दौरान उनकी रुचि जागृत हुई, नाटकों में बुजुर्ग पिता मदारी जैसी भूमिका अदा कर दर्शकों के सामने वाही वाही लूटी. उनके द्वारा लिखे गए नाटक” घोड़ा उपचार क्लीनिक” का मंचन जयपुर स्थित जवाहर कला केंद्र में मंचन हुआ. इस नाटक में अन्य कलाकारों के साथ इनका अभिनय सर्वश्रेष्ठ रहा. कोटा आने के बाद रंगकर्मियों के साथ अभिनय में अपनी भूमिका निभाई.
ग्रामीण परिवेश की परिस्थितियों को जानकर अपनी लेखनी को आगे बड़ा कर कई नाटक लिखे.
इनका पहला नाटक” कुकर फट सकता है”… जिसका मंचन कला दीघा में हुआ. इसके अलावा बाल नाटक” सॉरी बेटा” का मंचन स्थानीय बाल कलाकारों द्वारा किया गया जिसे बहुत सराहा. हाडोती भाषा में लोक कथा को रूपांतरित कर” पतासा की बरखा” लिखा. इनके लिखे इस नाटक को संभागीय पुस्तकालय मैं बाल कलाकारों द्वारा मंचन करवाया गया. इसके बाद प्रेमचंद के जीवन का नाटक रूपांतरण कर उसे 2 वर्ष में पूरा किया. इस नाटक का नाम था… ” धनपति नवाब से प्रेम””.
राम शर्मा जी ने कला साहित्य परिषद नई दिल्ली द्वारा मोहन राकेश नाटक लेखन प्रतियोगिता मैं राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया, और नगद राशि देकर पुरस्कृत किया. इस नाटक का मंचन कमानी ऑडिटोरियम नई दिल्ली में राष्ट्रीय नाटक विद्यालय दिल्ली से उत्तीर्ण कलाकारों के द्वारा किया गया. राष्ट्रीय स्तर पर मिले पुरस्कार ने इन्हें आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिली. राम शर्मा जी द्वारा लिखित नाटकों की पुस्तक” जलन से जल तरंग”” साहित्य अकादमी उदयपुर द्वारा प्रकाशित की गई. इन्होंने लघु फिल्मों में भी अभिनय में अपनी अमिट छाप छोड़ी.
नाटक कलाकार राम शर्मा मध्यम परिवार से ताल्लुक रखते हैं, उनकी शिक्षा कापरेन, केशोरायपाटन मैं हुई, बीएससी के बाद नर्सिंग प्रशिक्षण के लिए जयपुर में रहे, इसके अलावा B.Ed . .Ma और नेट हिंदी मैं किया, सन 2006 में राजस्थान लोक सेवा आयोग की परीक्षा से चयनित होकर शिक्षक के तौर पर प्रथम नियुक्ति मिडिल स्कूल अरनेठा में हुई. करीब 2 वर्ष शिक्षक रहने के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की परीक्षा उत्तीर्ण कर नर्सिंग ऑफिसर के तौर पर प्रथम पोस्टिंग बूंदी इसके बाद कोटा मेडिकल कॉलेज के न्यू हॉस्पिटल में पद स्थापित है.
नाटक कला व साहित्य सृजन इनकी अभिरुचि रही है, इनका मानना है रंगकर्मी हमेशा तनाव मुक्त रहता है, और अभिनय से मन को शांति मिलती है.
राम शर्मा ‘कापरेन ‘
*जलन से जलतरंग* पुस्तक की समीक्षा







