– *बसंत कान्हा सी ऋतु*
कान्हा सी ऋतु
बसंत आ गई है
रंग बिरंगी
पीतांबर ओढ़नी
ओढ़े लगी सुहानी। 1।
मुरली धुन
जैसे कान्हा की होती
बासंती हवा
बहती लयलीन
धरा सुरलोक हो।2।
बासंती मुख
मुलकन कान्हा सी
आशा देती है
पीड़ा से पार पाना
सीख देती हमको।3।
पीत रंग है
संदेश जीत का
भर मन में
हरे भरे कोंपल
उगा नर खुशी के ।4।
राम शर्मा ‘कापरेन’ कोटा
*जैसे ‘हाइकु’ जापानी विधा होती है वैसे ही ‘तांका’ भी जापानी विधा होती है*
*बसंत कान्हा सी ऋतु* राम शर्मा ‘कापरेन’






