Saturday, April 18, 2026
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पुनः प्रक्षेपण यान…..- कवि कालीचरण राजपूत

पुनः प्रक्षेपण यान…..

 

नित नई खोज कर रहा, भारत का विज्ञान ।

हैं इसी धारा पर बन रहे, सारे लॉन्चिंग यान ।।

सारे लॉन्चिंग यान,रॉकेट छोड़ रहे देसी विदेशी ।।

वर्षों से काम रहा यह, क्या इसमें बात विशेषी ।।

बना लिया है लांचर ऐसा, यह इसरो बोल रहा है ।

हिंदुस्तानी तकनीक से, ब्रह्मांड ही डोल रहा है ।।

ब्रह्मांड ही डोल रहा है, ऐसा है विश्व दृष्टि में भारत ।

नित्य नए-नए आयाम, अब परोस रहा है भारत ।।

अन्वेषण के दम पर, अब विद्या गई चरम पर ।

भारतीय विज्ञानी हुंकार, भरते हैं निज दम पर ।।

भरते हैं निज दम पर, नई तकनीक खोज लाए हैं ।

अपने ही लांचर को, वापस पृथ्वी पर लाए हैं ।।

एक नया अध्याय जोड़, दिया भारत ने लांचर में ।

बार-बार प्रयोग करेंगे, नई तकनीक जोड़ लांचर में ।।

नई तकनीक जोड़ लांचर में, संपदा बचे भारत की ।

बचाएं धन तकनीक के द्वारा, कदर बढ़े भारत की । ।

धन्य है हमारा हिंद देश, और इसरो के विज्ञानी ।

फलक चूम रहा देश, कभी हम नहीं करते नादानी ।।

घोष कर रहे वायु पुत्र, अब भारत की ही जय हो ।

मनसे लगे मिशन में, ताकि अंतरिक्ष विजय हो ।।

ताकि अंतरिक्ष विजय हो…

ताकि अंतरिक्ष….

के. सी. राजपूत, कोटा।

रचना_ मूल, अप्रकाशित ।

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