Saturday, April 18, 2026
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ऋतुराज बसंत …..के. सी. राजपूत, कोटा

ऋतुराज बसंत …..

 

बहि रही मंद सुगंध हवाएं, मलय पवन सभी को भाएं |

कोयल, पंख, पपीहे गायें, अपना भी किरदार निभाएं ||

है रहो ऊर्जा कौ संचार, आयो ऋतु बसंत कौ राज |

अब बदल रह्यौ व्यवहार, कलिका खिली खिली हैं आज ||

ऐसो आयो है ऋतुराज….

 

सजा लिया रथ ऋतु वसंत ने, पकड़ी राह अवनि की |

भ्रमण पर पंख पखेरू आए, अब देखें राह गमन की ||

दीख रहे हैं कोयल खंजन, अतिथि विदा हो रहे आज |

खुशियां छाइ रही हैं जगत में, खुल गए कुदरत के राज |

तरुओं पर पुष्पों का राज, ऐसो आयो है ऋतुराज …

 

होनी है अब शरद विदाई, नई कलियाँ कोंपल आईं |

बदल गई रंगत कुदरत की, खुशियां सब ओर ही छाई ||

दीख रही है नई सी वसुधा, सजा रही है यौवन कौ साज |

कदम बढ़ाए ऋतु बसंत ने, सज गया सामानो साज ||

घर में है सुगंध कौ राज, ऐसो आयो है ऋतुराज …

 

मदमाती ऋतु का प्रभाव यह, नित नई रंगत भाई है |

मानव मन आमोद भरा है, ऊर्जा नई नई आई है ||

तीखी सर्दी विदा हो रही, अब दिनकर खोलेंगे राज |

खुशियां हर मनमें छाई हैं, नियति सजा रही है साज ||

तरु पहनेंगे पुष्पों का ताज, ऐसो आयो है ऋतुराज ..

 

मौषम ने करवट बदली है, मुखर हुए पलास कदली हैं |

ऋतुएं जीवन का पर्याय, वे करती अदला बदली हैं ||

व्यवहार सुधारों सब जन, नियति बदल रही है आज |

सुरभि खोले कुदरत के राज, ऐसो आयो है ऋतुराज …

 

तरुओं में कोंपल आई हैं, कलियाँ सबके मन भाई हैं |

हो रहा जीवन में बदलाव, खुशियां चहुं ओर छाई हैं ||

सरस्वती की माया है, उन्हें ही पहनाओ ताज |

है रह्यो नवरस कौ आगाज, ऐसो आयो है ऋतुराज ..

के. सी. राजपूत, कोटा |

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