Saturday, April 18, 2026
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लोकतंत्र भारत का…..-के. सी. राजपूत, कोटा

लोकतंत्र भारत का…..

 

यह जनता का, जनता के द्वारा,भारत का गणतंत्र ।

अब कोई जन परतंत्र नहीं है, सब कोई है स्वतंत्र।।

रीति नई है  प्रीति नई,  हम खुश भारत के लोग ।

सभी धर्म मिलकर रहते हैं, न कोई सहे वियोग ।।

 

सब जन मिल सरकार बनाते, ऐसा है देसी  तंत्र ।

प्रबुद्ध जन सरकार चलाते, ऐसा भारत का  मंत्र ।।

नर नारी सब भारतवासी, थे आंदोलन के हिस्से ।

दादा दादी से सुनते आए, हम ओजस्वी  किस्से ।।

 

मूल मंत्र बने भारत की, जनता के शुद्ध विचार ।

शुद्ध वायु का सेवन करके, शुद्ध किया आहार ।।

शुद्ध रही है मन और बुद्धि, शुद्ध  रहे  हैं  खेल ।

मनमुटाव नहीं किसी से, आपस में बढ़ता मेल।।

 

मांग उठी थी  स्वराज की, पा भी लिया स्वराज ।

सभी धर्म स्वतंत्र, भारत में ,सब ही खुश हैं आज ।।

जय हो वीर सपूतों की, है भारत का ऊंचा ताज ।

जय हो भारत माता की, जन जन खुश है आज ।।

के. सी. राजपूत, कोटा।

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