लोकतंत्र भारत का…..
यह जनता का, जनता के द्वारा,भारत का गणतंत्र ।
अब कोई जन परतंत्र नहीं है, सब कोई है स्वतंत्र।।
रीति नई है प्रीति नई, हम खुश भारत के लोग ।
सभी धर्म मिलकर रहते हैं, न कोई सहे वियोग ।।
सब जन मिल सरकार बनाते, ऐसा है देसी तंत्र ।
प्रबुद्ध जन सरकार चलाते, ऐसा भारत का मंत्र ।।
नर नारी सब भारतवासी, थे आंदोलन के हिस्से ।
दादा दादी से सुनते आए, हम ओजस्वी किस्से ।।
मूल मंत्र बने भारत की, जनता के शुद्ध विचार ।
शुद्ध वायु का सेवन करके, शुद्ध किया आहार ।।
शुद्ध रही है मन और बुद्धि, शुद्ध रहे हैं खेल ।
मनमुटाव नहीं किसी से, आपस में बढ़ता मेल।।
मांग उठी थी स्वराज की, पा भी लिया स्वराज ।
सभी धर्म स्वतंत्र, भारत में ,सब ही खुश हैं आज ।।
जय हो वीर सपूतों की, है भारत का ऊंचा ताज ।
जय हो भारत माता की, जन जन खुश है आज ।।
के. सी. राजपूत, कोटा।






