Sunday, August 30, 2026
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वरिष्ठ साहित्यकार श्री जितेन्द्र निर्मोही व देवकी दर्पण सम्मानित

🌷वरिष्ठ साहित्यकार श्री जितेन्द्र निर्मोही व देवकी दर्पण सम्मानित🌷

12 जनवरी अक्षर सम्मान समारोह व हिन्दी साहित्य भारती का प्रांतीय अधिवेशन जिला इकाई का शपथ ग्रहण समारोह कोटा मे समपन्न हुआ।

समारोह मे हिन्दी और राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार श्री जितेन्द्र निर्मोही को हिन्दी साहित्य भारती सम्मान २०२५ और श्री देवकी दर्पण को अक्षर सम्मान २०२४ से विभूषित किया गया।

यह सम्मान आयोजन के मुख्य अतिथि हिन्दी साहित्य भारती के अध्यक्ष डॉ रविन्द्र गुप्ता थे अध्यक्षता भाई परमानन्द जी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के ओज के प्रमुख स्वर योगेन्द्र शर्मा, रजनीश जी, प्रांतीय संरक्षक मैं , जिला अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा निदेशक शिशु भारती शिक्षण संस्थान कोटा और राजस्थान प्रांत के अध्यक्ष जगदीश सोनी*जलजला* द्वारा दिया दिया गया। आयोजन के एक ओर मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के केबिनेट मंत्री शिक्षा मदन दिलावर जी आयोजन के अंतिम चरण में उपस्थित हुए।

समारोह का आगाज लोकेश मृदुल की सरस्वती वंदना से हुआ। मातृ वंदना मदर टेरेसा स्कूल की बालिकाओं द्वारा की गई। आजादी के बाद देश की आज़ादी और उस पर छाये खतरे पर वक्तव्य डॉ रविन्द्र शुक्ला जी ने दिया उसका निर्वाह योगेन्द्र शर्मा ओजस्वी गीतकार ने किया। ऐसा लगा जैसे रामधारी सिंह दिनकर के संस्कृति के चार अध्याय से आगे की बात उन्होंने की हो,मंच की सात्विकता से यूं लग रहा था कि उक्त दोनों कवियों के साथ मैं देवराज दिनेश और रामकुमार चंचल के कवि सम्मेलन की परंपरा में बैठा हूं। प्रारंभिक चरण का संचालन भाई महेश पंचौली जी ने किया उसके बाद सफल संचालन साहित्य भारती के उद्देश्य और इस साल के प्रस्ताव सहित जगदीश जलजला ने अपनी बात रखी। संगठन महामंत्री सोनी जी ने भी अपनी बात रखी।

योगेन्द्र शर्मा जी की कार्यकारिणी में युगल सिंह, डॉ वैदेही गौतम, प्रतिभा शर्मा, मुरली धर गौड़, लोकेश मृदुल, श्यामा शर्मा, गरिमा गौतम, महेश पंचौली, बाबू बंजारा, अनुराधा शर्मा*अनुद्या, पल्लवी न्याती , डॉ हिमानी भाटिया, अश्विनी त्रिपाठी, साधना गौतम, राम कल्याण गौतम आदि ने शपथ ली डॉ रविन्द्र शुक्ला जी ने शपथ दिलाई।

आयोजन में डा प्रभात सिंघल जी और योगेंद्र शर्मा जी निदेशक शिशु भारती शिक्षण संस्थान कोटा की कृतियों का लोकार्पण हुआ।

कुल मिलाकर यह सांस्कृतिक विरासत का महनीय आयोजन था जिसमें विवेकानंद को भी उनकी जन्म जयंती पर याद किया गया।

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