Sunday, August 30, 2026
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शाहबाद के जंगल भी देश भर के लोगों के जीवन के लिए आवश्यक है-पर्यावरण विद् रॉबिन सिंह

बारां/शाहबाद जंगल के 119759 पेड़ों को काटा जाना पर्यावरण को प्रभावित करता है और यह सीधे तौर पर आम आदमी के जीवन को प्रभावित करता है। इस नाते यह कार्य संविधान के विरुद्ध है जो न केवल देश को प्रभावित कर रहा है बल्कि पूरे मानव समुदाय को खतरे में डाल सकता है। ये विचार अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण विद् और मैग्सेसे अवॉर्ड प्राप्त डॉ. राजेंद्र सिंह ने भारतीय सांस्कृतिक निधि वराह नगरी बारां अध् याय, दिया फाउंडेशन, वृक्ष मित्र फाउंडेशन और शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां द्वारा आयोजित पर्यावरण संरक्षण कार्यशाला में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए।

अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण विद् रॉबिन सिंहने कहा कि जिस तरह ऑक्सीजन पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए आवश्यक है ठीक उसी तरह शाहबाद के जंगल भी देश भर के लोगों के जीवन के लिए आवश्यक है।

शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन को समर्थन देते हुए डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि एक पौधे को पेड़ बनने में कई वर्ष लग जाते हैं जिसमें 150 से 200 वर्ष तक की उम्र के पेड़ों को काटा जाना इस देश की नहीं पूरे विश्व की पर्यावरणीय क्षति है जिसमें लगभग 600 तरह के औषधीय गुणों वाली प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं। यह घटना पूरी मानवता के लिए विनाशकारी दुर्घटना है जिसके रोके जाने के लिए जितने भी कदम उठाने पड़े उठाए जाएंगे। गायत्री प्रज्ञा पीठ के सभागार में आयोजित कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण विद प्रशांत पाटनी ने कहा कि इस जंगल द्वारा जैव विविधता, वन्य जीव आवास, जलवायु परिवर्तन, कृषि उपज, वर्षा जल प्रतिशत के साथ साथ हमारे जीवन जीने के अनेक कारक जुड़े हुए है। इन पेड़ों से के साथ हम सभी लोगों का जीवन जुड़ा हुआ है जो इन पेड़ों के कटने से सीधे तौर पर प्रभावित होगा।

 

 

 

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