Sunday, April 19, 2026
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बोना है नव वर्ष में, मुस्कानों के बीज

अब खूँटी पर टाँग दे, नफ़रत-भरी कमीज़

बोना है नव वर्ष में, मुस्कानों के बीज ।।

नए साल से हम कहें-करलो दुआ कुबूल ।

माफ़ करें हर एक की, जो-जो खटकी भूल ।।

मुड़-मुड़कर क्या देखना, पीछे उड़ती धूल ।

फूलों की खेती करो, हट जाएँगे शूल ।।

अधरों पर मुस्कान ले, कहता है नव वर्ष ।

छोड़ उदासी को यहाँ, आ पहुँचा है हर्ष ।।

पलकों के तट चूमकर, कहे नयन-जलधार ।

बीते हैं पल दर्द के, हुआ नया भिनसार ।।

 

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