श्री राम कैकई के वरदानों को शिरोधार्य कर वनवास के लिए निकल जाते हैं सभी प्रजावासी भी उनके साथ वन में जाने की हट करते हैं तो श्री राम उन्हें तमसा के तीर पर ले जाते हैं तथा जब सभी की निद्रा लग जाती है तो वहां से रात्रि में ही आगे की ओर बढ़ जाते हैं। वहां से वह श्रंगबेरपुर निषाद राज के राज्य में जाते हैं ,निषाद अपने परिवार और समाज सहित श्री राघवेंद्र की भरपूर सेवा करता है तथा वहीं रुकने के लिए आग्रह करता है , किंतु श्री राम वहां से आगे बढ़ गंगा के किनारे पहुंचते हैं और केवट से गंगा पार जाने हेतु नाव मांगते हैं। केवट कहता है हे प्रभु आपके चरणों की महिमा में जानता हूं यदि आपके चरण मेरी नोका पर पड़ गए और यह नारी बन गई तो फिर क्या होगा इसलिए जब तक मैं आपके चरण नहीं धो लूंगा मैं आपको नाव पर नहीं चढ़ने दूंगा । इस प्रकार एक भक्त की हट पर श्री राम केवट को चरण धोने की आज्ञा प्रदान करते हैं और फिर नाव पर चढ़ते हैं “जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े” जैसे सुंदर भजनों पर केवट प्रसंग का मंचन होता है.. जिसमें सभी भक्ति भाव विभोर होकर भक्तिरस गोते लगाने लगते हैं। उधर जब मंत्रीवार सुमंत अयोध्या पहुंचते हैं और महाराज दशरथ को पता लगता है कि राम लक्ष्मण सीता वन से नहीं आए तो वह विलाप करने लगते हैं उन्हें श्रवण कुमार के माता-पिता का श्रापआप याद आता है जिसमें उन्होंने कहा था कि तुम्हारे चार पुत्र होंगे किंतु अंत समय में तुम्हारे मुख में पानी डालने वाला भी कोई नहीं होगा और इन्हीं दुख के दृश्य को याद करते हुए, महाराज दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं। दशरण मरण का भावुक दृश्य देख दर्शकों की आंखे भीग जाती है। महाराज की मृत्यु का समाचार सुनकर गुरुदेव वशिष्ठ भरत को बुलवाते हैं जब भरत अयोध्या आते हैं और सारा वृत्तांत पता लगता है तो वह कैकयी पर क्रोधित होते हैं और निर्णय करते हैं कि कल प्रातः काल होते ही वह श्री राम को मनाने वन में जाएंगे । वहां पर भारत मिलाप का मार्मिक मंचन किया जाता है। श्री राम भारत को 14 वर्ष के अवलंबन स्वरूप अपनी चरण पादुकाएं देते हैं तथा अयोध्या भेज देते हैं। उधर श्री राम वन में आगे की ओर प्रस्थान कर जाते हैं। केवट प्रसंग में गोविंद तिवारी द्वारा केवट, बृजराज गौतम द्वारा दशरथ तथा रंगलाल मेहरा द्वारा निषाद के अभिनय के लोगों ने खूब सराहा तथा तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह वर्धन किया। आज कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रह्लाद गुंजल, पूनम गोयल, मोहित विजय, शिक्षा क्षेत्र, योगेश विजय, ओम प्रकाश शर्मा,मोहनलाल नंदवाना पार्षद रहे।





