कोटा मण्डल के सीनियर डी.एफ.एम. एवं 2011 बैच के आई.आर.ए.एस. अधिकारी श्री राजकुमार प्रजापत द्वारा लिखित साहित्यिक कृति ‘कालेरा बास की बातें’ का विमोचन 20 सितम्बर को मण्डलीय सभागार में किया गया। हिंदी सप्ताह के अंतर्गत कोटा मंडल अनेक कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है इसी क्रम में पुस्तक विमोचन के इस साहित्यिक समागम में हिन्दी के अनेक नामचीन साहित्यकार और वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित हुए।
कहानी संग्रह ‘कालेरा बास की बातें’ सामाजिक एवं पारिवारिक मूल्यों पर केन्द्रित एक प्रेरणादायी कृति है। उपस्थित अतिथियों ने श्री राजकुमार प्रजापत की समाज के यथार्थ को चित्रित करने वाली गंभीर लेखनी तथा एक उत्कृष्ट कहानी संग्रह की रचना के लिए सराहना की। पुस्तक ‘कालेरा बास की बातें’ बाल विमर्श, स्त्री विमर्श, वृद्ध विमर्श, सामाजिक एवं पारिवारिक मूल्यों आदि पर मौलिक कहानियां एवं रेखाचित्र प्रस्तुत करती है जो भारतीय संदर्भ में एक उत्कृष्ट जीवन दर्शन है। साहित्यकारों ने एक स्वर में इसे एक नवीन विधा को चित्रित करने वाली उत्कृष्ट साहित्यिक कृति बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडल रेल प्रबंधक, कोटा श्री मनीष तिवारी ने की। कार्यक्रम के सभापति साहित्यकार डॉ. रघुराज सिंह कर्मयोगी, मुख्य अतिथि श्री जितेंद्र निर्मोही एवं डॉ. प्रभात कुमार सिंघल थे। कृति परिचय श्री भगवत सिंह मयंक, डॉ आदित्य गुप्ता दिया तथा कार्यक्रम का संचालन श्री कमलेश कमल एवं डीपीओ कोटा श्री अविरल शर्मा ने किया। इस साहित्यिक समागम में अपर मुख्य राजभाषा अधिकारी श्री आर. आर. के. सिंह, मंडल के वरिष्ठ अधिकारी, मुख्य परियोजना अधिकारी एवं शाखाअधिकारी सहित अनेक अधिकारी कर्मचारी तथा विविध क्षेत्रों 70 से अधिक प्रसिद्द कवि एवं लेखक शामिल हुए।
मंडल रेल प्रबंधक मनीष तिवारी, अपर मंडल रेल प्रबंधक आर.आर.सिंह, सभापति रघुराज सिंह कर्मयोगी, मुख्य अथिति साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही एवम् विशिष्ठ अथिति सूचना एवम् जनसंपर्क विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ.प्रभात कुमार सिंघल तथा उप निदेशक जनसंपर्क मोहम्मद मुस्तफा ने मंडल के सभागार में पश्चिम – मध्य रेलवे में कोटा में उप मुख्य वित्त सलाहकार की पुस्तक ” कालेरा बास की बातें ” कहानी संग्रह का समारोहपूर्वक विमोचन किया। इस अवसर पर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी और साहित्यकार उपस्थित रहे। समारोह का आयोजन हिंदी दिवस पर आयोजित रेल पखवाड़े के अंतर्गत किया गया।
मंडल रेल प्रबंधक तिवारी ने कहा कि यह किताब अंचल विशेष का प्रतिनिधित्व करती है, आंचलिक किताबों का अपना महत्व होता है। ग्रामीण परिवेश पर पुस्तक लेखन को सार्थक प्रयास बताया। उन्होंने कहा वे स्वयं भी लिखते हैं इस लिए जानते हैं कि लेखन का क्रम एक मुश्किल कार्य है, और इस से भी मुश्किल है लेखन को पूरा करना। प्रो आदित्य कुमार गुप्ता, भागवत सिंह मयंक और जितेंद्र निर्मोही में पुस्तक की विषय वस्तु के साथ इसके शिल्प, शैली, प्रभाव आदि के बारे में जानकारी दी। राजकुमार प्रजापत ने किताब लेखन से जुड़े संस्मरण बताते हर हुए कहा इसमें 22 कहानियों का संकलन हैं उन्होंने कालेरा बास पर 110 कहानियां लिखी है। प्रारंभ में अथितियां ने दीप प्रज्वलित कर मां शारदे की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
भावना काले ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अथियों का सम्मान भी किया गया।
साहित्यकार नरेंद्र शर्मा, राजकुमार प्रजापत जी के साथ





