हमारी हिंदी भाषा……..
हिंदी भाषा जानी पहचानी है,यह भाषाओं की रानी है ।
सशक्त रही है अपने में ही, इसका कोई नहीं सानी है ।।
छंद, अलंकारों की जान यही, नव रसों से बनी महारानी है ।
अनुलोम, विलोम भी प्यारे हैं, पर्यायों की क्या सानी है ।।
इसमें छंद, मंद_ मंद मुस्काते, दोहे, चौपाई गानी है ।
सोरठा गाता है राग अलग, ना अष्टक में नादानी है ।।
भजन, प्रार्थना गाते इसमें,आरती भी तो इसमें आनी है ।
इसमें नाटक, उपन्यास, कथाएं, प्रसन्न और कहानी है ।।
बहु आयाम विधाएं हैं इसमें, सब की जानी पहचानी है।
विविध लेख, कविताएं भी, साहित्यकारों ने बखानी है ।।
हिंदी जानी पहचानी है, सब भाषाओं की रानी है ।
सशक्त रही अपने में ही, ना इसका कोई सानी है ।।
ना इसका कोई सानी है……
रचना के.सी राजपूत, कोटा ।





