त्रिपुरा के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता विज्ञान संचारक अंजन बनिक ESTIC 2026 में आमंत्रित
नई दिल्ली में 27 से 29 अक्टूबर तक आयोजित होगा अंतरराष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन
बिगुल जैन ✍️
अगरतला, त्रिपुरा, 27 अक्टूबर। त्रिपुरा के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित विज्ञान संचारक एवं शिक्षक अंजन बनिक का चयन नई दिल्ली के भारत मंडपम में 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC 2026) में आमंत्रित प्रतिनिधि के रूप में हुआ है। आयोजकों से प्राप्त आमंत्रण एवं प्रतिनिधि प्रवेश-पत्र की जानकारी के अनुसार, इस सम्मेलन में त्रिपुरा से आमंत्रित प्रतिनिधि के रूप में उनकी भागीदारी विशेष महत्त्व रखती है।
अंजन बनिक को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद (NCSTC) द्वारा वर्ष 2022–23 का राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार पुरस्कार प्रदान किया गया था। वे वर्तमान में त्रिपुरा सरकार के माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के अधीन सहायक शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। शिक्षण कार्य के साथ-साथ वे विद्यार्थियों, शिक्षकों और आमजन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा विज्ञान को सरल एवं जनसुलभ बनाने के लिए स्वैच्छिक रूप से सक्रिय हैं।
वे नेशनल काउंसिल ऑफ रिसर्चर टीचर साइंटिस्ट्स (NCRTS) इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी स्वैच्छिक सेवाएं दे रहे हैं। इस संगठन का पूर्व में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत विज्ञान प्रसार के VIPNET नेटवर्क से जुड़ाव रहा है।
नोबेल पुरस्कार विजेताओं और विश्वस्तरीय वैज्ञानिकों के बीच सहभागिता
ESTIC 2026 में 3,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की अपेक्षा है। सम्मेलन में प्रख्यात वैज्ञानिकों, नोबेल पुरस्कार विजेताओं, शोधकर्ताओं, नवाचारकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, उद्यमियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।
सम्मेलन की प्रचार सामग्री में शामिल प्रमुख वैज्ञानिकों में 1993 के नोबेल पुरस्कार विजेता सर रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स, 2017 के रसायन विज्ञान नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. जोआखिम फ्रैंक तथा 2010 के भौतिकी नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. कॉन्स्टेंटिन (कोस्त्या) नोवोसेलोव के नाम शामिल हैं।
इन वैज्ञानिकों ने क्रमशः आणविक जीवविज्ञान, क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी और ग्राफीन से संबंधित अनुसंधान में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। इनके साथ अन्य प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों एवं नवाचारकर्ताओं की भागीदारी सम्मेलन को वैज्ञानिक विचार-विमर्श का महत्त्वपूर्ण मंच बनाएगी।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ा सम्मेलन
ESTIC 2026 का प्रमुख उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, औद्योगिक विकास और सामाजिक आवश्यकताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। सम्मेलन में भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना के अनुरूप विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने लेख ‘ESTIC 2026: Connecting Science with Aspirations of Viksit Bharat’ में वैज्ञानिक उपलब्धियों को आमजन के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया है।
उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति एवं प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की वैज्ञानिक दृष्टि का उल्लेख करते हुए कहा है कि विज्ञान की वास्तविक उपयोगिता समाज की समस्याओं के समाधान, जनकल्याण और राष्ट्रीय विकास में निहित है। वैज्ञानिक अनुसंधान को उपयोगी तकनीक में बदलने के लिए परीक्षण, निवेश, अभियांत्रिकी और विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग आवश्यक है।
उभरती प्रौद्योगिकियों पर होगा मंथन
सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, क्वांटम संचार, समुद्र विज्ञान, कृषि प्रौद्योगिकी, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं, ऊर्जा प्रौद्योगिकी, इमर्सिव टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष विज्ञान सहित विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के 12 प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा प्रस्तावित है।
इसके अतिरिक्त युवा शोधकर्ताओं एवं नवाचारकर्ताओं को अपने विचार प्रस्तुत करने, नई तकनीकों का प्रदर्शन करने और वैज्ञानिक संस्थानों तथा उद्योग जगत के साथ सहयोग के अवसर प्राप्त करने के लिए विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे।
पूर्वोत्तर भारत में विज्ञान शिक्षा को मिलेगा नया प्रोत्साहन
अंजन बनिक की इस सम्मेलन में भागीदारी त्रिपुरा और पूर्वोत्तर भारत के लिए विशेष महत्त्व रखती है। एक राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षक एवं विज्ञान संचारक के रूप में वे विद्यालयी शिक्षा को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
NCRTS इंडिया के माध्यम से वे विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को वैज्ञानिक प्रयोगों, प्रश्न-आधारित शिक्षा, खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान और नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने के प्रयासों में सहभागी रहे हैं।
उनका मानना है कि विज्ञान शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, प्रयोग करने की प्रवृत्ति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना भी है।
भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में उनकी सहभागिता विद्यालयी स्तर पर विज्ञान के प्रसार और राष्ट्रीय वैज्ञानिक प्राथमिकताओं के बीच संवाद के नए अवसर उपलब्ध करा सकती है।
वैज्ञानिक जागरूकता से राष्ट्रीय विकास तक
ESTIC 2026 में अंजन बनिक की भागीदारी विज्ञान संचार, शिक्षक समुदाय और विद्यार्थियों को वैज्ञानिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण अवसर है। यह सहभागिता इस तथ्य को भी रेखांकित करती है कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति में प्रयोगशालाओं और अनुसंधान संस्थानों के साथ-साथ उन शिक्षकों एवं विज्ञान संचारकों की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका है, जो नई पीढ़ी में जिज्ञासा और नवाचार की भावना विकसित करते हैं।
उल्लेखनीय है कि अंजन बनिक भारत सरकार के DST–NCSTC द्वारा वर्ष 2022–23 के राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार पुरस्कार से सम्मानित हैं। वे त्रिपुरा सरकार के माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के अधीन सहायक शिक्षक तथा NCRTS इंडिया के स्वैच्छिक राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।






