कंप्यूटर शिक्षा को हिंदी में वैश्विक पटल पर पहुंचाया, 32 से अधिक देशों में जुड़े हैं छात्र
आईटीआई इंग्लिश स्टेनो टॉपर, इंटेक लेडी विंग चेयरमैन और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हैं नीता शर्मा
मयूर सोनी✍️
बाराँ/अखिल विश्व गायत्री परिवार, बाराँ के तत्वावधान में आयोजित भव्य ‘नारी जागरण सम्मेलन एवं कन्या कौशल शिविर’ में तकनीकी शिक्षा, समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाली नीता शर्मा को भावभीना सम्मान प्रदान किया गया। राजस्थान की पहली महिला यूट्यूबर के रूप में विख्यात नीता शर्मा को मंच पर शॉल, प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर उनकी बहुआयामी उपलब्धियों की सराहना की गई।
उल्लेखनीय है कि नीता शर्मा राजस्थान में इंग्लिश स्टेनोग्राफी में आईटीआई की स्टेट टॉपर रही हैं। उन्होंने तकनीकी शिक्षा को जनसुलभ बनाने का बीड़ा उठाते हुए कक्षा 5 से लेकर एमसीए (MCA) और एमटेक (M.Tech) स्तर तक के संपूर्ण कंप्यूटर पाठ्यक्रम का सरल हिंदी में अनुवाद कर यूट्यूब पर अपलोड किया। वर्तमान में उनके मॉनिटाइज्ड यूट्यूब चैनल के माध्यम से भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के 32 से अधिक देशों के विद्यार्थी नि:शुल्क और सुगम कंप्यूटर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों में भी उनकी सक्रिय सहभागिता रही है। वे इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) लेडी विंग की चेयरपर्सन हैं तथा ऐतिहासिक ‘शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन’ में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। वर्तमान में वे इंटेक की‘चौपाल’ नामक विशेष गतिविधि के माध्यम से
महिलाओं की समस्याओं के त्वरित समाधान तथा प्राचीन ग्राम्य संस्कृति के संरक्षण व पुनरुद्धार का कार्य कर रही हैं।
सम्मान ग्रहण करने के उपरांत अपने संबोधन में नीता शर्मा ने गायत्री परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “तकनीक और ज्ञान पर केवल कुछ विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों का अधिकार नहीं होना चाहिए। जब मैंने कंप्यूटर शिक्षा को हिंदी में ढालना शुरू किया था, तब लक्ष्य यही था कि भाषा किसी भी ग्रामीण या हिंदी भाषी युवा की प्रगति में बाधा न बने। आज जब 32 से अधिक देशों के युवा इससे लाभान्वित हो रहे हैं, तो यह सिद्ध होता है कि अपनी भाषा में ज्ञान की सीमाएं अनंत हैं। हमारा दायित्व केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘चौपाल’ के जरिए जमीन पर उतरकर हमें अपनी लुप्त होती ग्राम्य संस्कृति, पर्यावरण और महिलाओं के स्वाभिमान की रक्षा भी करनी होगी। यह सम्मान मुझे समाज के प्रति और अधिक निष्ठा से कार्य करने का संकल्प देता है।”
अखिल विश्व गायत्री परिवार की जिला संयोजिका कैलाश मेवाड़ा ने कहा, “नारी जागरण सम्मेलन और कन्या कौशल शिविर गुरु चेतना का विस्तार है। नीता शर्मा जैसी विदुषी बहनें समाज के लिए प्रेरणापुंज हैं, जिन्होंने तकनीक जैसी जटिल विधा को सेवा का माध्यम बनाया। एक ओर वैश्विक स्तर पर तकनीकी ज्ञान बांटना और दूसरी ओर शाहबाद के जंगलों व अपनी जड़ों को बचाने के लिए संघर्ष करना महिलाओं के लिए प्रेरणादाई और सराहनीय कार्य है।
उप जिला संयोजिका चारु सिंह जादौन ने कहा कि “नीता शर्मा का आईटीआई टॉपर बनने से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का सफर यह साबित करता है कि यदि नारी को अवसर और संकल्प मिले, तो वह किसी भी क्षेत्र में शीर्ष पर पहुंच सकती है।”
चौपाल महिला समूह की उप संयोजक डिम्पल जयंत ने कहा, “नीता दीदी के नेतृत्व में संचालित ‘चौपाल’ पहल आज की महिलाओं के लिए एक मजबूत संबल बन चुकी है। चौपाल केवल समस्याओं पर चर्चा करने का मंच नहीं, बल्कि महिलाओं को उनकी झिझक तोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास है।
सम्मेलन के समापन पर उपस्थित मातृशक्ति एवं कन्याओं ने सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, पर्यावरण संरक्षण और समाज निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। चौपाल सदस्या डिंपल जयंत, प्रेमलता ओझा, शालिनी विजय, अनीता मीणा, प्रीति जादोन, मनीषा मीणा ने चौपाल संयोजिका के सम्मान हेतु गायत्री परिवार का धन्यवाद ज्ञापित किया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गायत्री परिवार के परिजन, विभिन्न महिला संगठनों की प्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।






