Wednesday, September 30, 2026
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कोटा: मथुराधीश जी मंदिर कॉरिडोर परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, 23 मकानों के अधिग्रहण के बाद शुरू हुआ ध्वस्तीकरण

-ललित जैन हरसोरा की रिपोर्ट

कोटा। करीब साढ़े पांच महीने पहले हुए शिलान्यास के बाद अब 66.25 करोड़ रुपए की श्री मथुराधीश जी मंदिर कॉरिडोर परियोजना के काम ने धरातल पर रफ्तार पकड़ ली है। परियोजना के पहले चरण के तहत नंदग्राम क्षेत्र में चिन्हित मकानों को हटाने की कार्रवाई तेज कर दी गई है।

शुक्रवार से निर्माण एजेंसी ने मौके पर एलएनटी मशीन उतारकर मलबा हटाने और शेष निर्माण को हटाने का काम शुरू कर दिया। मशीन के पहुंचते ही मौके पर मौजूद लोगों ने श्री मथुराधीश प्रभु के जयकारे लगाए। स्थानीय नागरिक ललित हरसोरा के अनुसार, अब तक करीब डेढ़ दर्जन मकानों के हिस्सों को आंशिक रूप से हटाया जा चुका है।

18.24 करोड़ रुपए के पहले चरण में होंगे बड़े विकास कार्य

परियोजना के पहले चरण में करीब 18.24 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके तहत मथुराधीश मंदिर तक पहुंचने वाले मौजूदा मार्ग को चौड़ा करने के साथ आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

योजना के प्रमुख हिस्से के रूप में करीब 200 मीटर लंबा और 40 फीट चौड़ा एलिवेटेड रोड बनाया जाना प्रस्तावित है। यह मार्ग चंबल रिवर फ्रंट के गणेशपोल घाट को सीधे मथुराधीश मंदिर से जोड़ेगा।

परियोजना में मंदिर परिसर की करीब 15 हजार वर्गफीट भूमि को भी शामिल किया गया है।

अगले चरण में हेरिटेज थीम पर होगा विकास

विधायक संदीप शर्मा के अनुसार, कॉरिडोर परियोजना का अगला चरण भी महत्वपूर्ण होगा। इसमें टिपटा चौराहा, भूरिया गणेशजी, पाटनपोल दरवाजा और मथुराधीश मंदिर के परिक्रमा मार्ग को हेरिटेज थीम के अनुरूप विकसित करने की योजना है।

इससे पुराने कोटा शहर की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को पर्यटन से जोड़ने में मदद मिलेगी।

आखिर 23 मकानों को क्यों हटाया जा रहा है?

केडीए एक्सईएन सुमित चित्तौड़ा के अनुसार, मथुराधीश मंदिर तक पहुंचने वाला मौजूदा रास्ता लंबे समय से संकरा है। धार्मिक आयोजनों और प्रमुख उत्सवों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने पर यहां यातायात दबाव और जाम की स्थिति बनती रही है।

कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य केवल सड़क को चौड़ा करना नहीं है। इसके तहत चंबल रिवर फ्रंट, कोटा परकोटा क्षेत्र और मथुराधीश मंदिर को एक समेकित धार्मिक एवं पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की योजना है।

23 मकानों के अधिग्रहण के बाद मार्ग को आवश्यक चौड़ाई मिलेगी। इससे प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के साथ पैदल यात्रियों और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।

धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय कारोबार को भी उम्मीद

परियोजना पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर तक पहुंचना आसान होने की उम्मीद है। साथ ही आसपास के होटल, प्रसाद, पूजा सामग्री, दुकानों और अन्य स्थानीय कारोबार को भी पर्यटकों और श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही का लाभ मिल सकता है।

मथुराधीश मंदिर कॉरिडोर के विकसित होने से चंबल रिवर फ्रंट और पुराने कोटा शहर के धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी बनने की उम्मीद है। ऐसे में यह परियोजना आने वाले समय में कोटा के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल हो सकती है।

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