कोटा। किसी ने सही कहा है कि “सूरज को दीपक दिखाने की आवश्यकता नहीं होती।” यह कहावत समाजसेवी, खेल प्रेमी और फिल्म जगत से जुड़े सरोज खान के व्यक्तित्व पर सटीक बैठती है।
कोटा की धरती पर जन्मे और अपना बचपन व युवावस्था यहीं बिताने वाले सरोज खान का शहर से आज भी गहरा जुड़ाव है। मुंबई में लंबे समय से सक्रिय रहने के बावजूद उन्होंने अपनी जन्मभूमि और यहां के लोगों से रिश्ता कभी नहीं तोड़ा।
सरोज खान ने फिल्म जगत के साथ-साथ खेल जगत में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। वे विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में कई पदक और सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। उनका व्यक्तित्व हमेशा कुछ नया करने की सोच और सकारात्मक कार्यों के लिए जाना जाता है।
समाजसेवा के क्षेत्र में भी सरोज खान लगातार सक्रिय रहते हैं। कोटा आने पर वे जरूरतमंद लोगों की हर संभव मदद करते हैं। किसी गरीब के इलाज के लिए आर्थिक सहायता हो, अस्पतालों में सहयोग देना हो या किसी जरूरतमंद की समस्या का समाधान करना—वे सदैव आगे रहते हैं। यही कारण है कि आमजन उन्हें सहज, सरल और मददगार व्यक्तित्व के रूप में देखते हैं।
ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भी उन्होंने अपनी सादगी और विनम्रता को बनाए रखा है। उनके मित्रों और शुभचिंतकों का मानना है कि सरोज खान का सेवा भाव, नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति समर्पण उन्हें एक सफल जननेता के गुणों से भी संपन्न बनाता है।
कोटा के लोगों का कहना है कि सरोज खान ने जिस प्रकार खेल, फिल्म और समाजसेवा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है, उसी प्रकार भविष्य में यदि वे सक्रिय राजनीति में आते हैं तो जनसेवा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।





















