-भारत सिंह चौहान
कोटा। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल, जयपुर के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने देश की सुरक्षा एजेंसियों को सावधान करते हुए कहा है कि, “वर्तमान डिजिटल युग में भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं, प्रशासनिक व्यवस्थाओं तथा चुनावी प्रक्रियाओं की साइबर सुरक्षा एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषय बन गई है। वहीं डीप फेक सामग्री झूठ का बाजार खड़ा कर, निगेटिव नैरेटिव आधारित विकृति के रूप में बड़ी सामाजिक चुनौती बन चुकी है। हाल के वर्षों में विभिन्न घटनाओं और सूचनाओं ने यह संकेत दिया है कि डिजिटल, इंटरनेट एवं साइबर तकनीकों का उपयोग कर भारतीय लोकतंत्र और प्रशासनिक तंत्र को प्रभावित करने तथा उसके माध्यम से भारत में अराजकता उत्पन्न करने के गंभीर प्रयोग हुए हैं और प्रशासन सहित जनमत को भी सावधान रहना होगा।”
सिसोदिया ने कहा कि, “भारत की मतदाता सूची में ब्राजीलियन मॉडल का चित्र लगना संयोग नहीं, प्रयोग था और इसकी जानकारी राहुल गाँधी को होना संदेश उत्पन्न करता है। इसी तरह पाँच राज्यों के चुनाव परिणाम प्रभावित करने हेतु भारत चुनाव आयोग की वेबसाइट पर हजारों साइबर अटैक होना अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्र के स्पष्ट संकेत देता है। वहीं भारत की हजारों सिमों का कंबोडिया जैसे विदेशों से सक्रिय होना इस बात का संकेत है कि साइबर अपराधी विदेशों में बैठकर देश को धोखा दे रहे हैं। इसी तरह कॉकरोज पार्टी के फर्जी और विदेशी फॉलोवर्स की सुनामी आना यह बताता है कि इंटरनेट तकनीक के जरिये भारतीय लोकतंत्र में अराजकता उत्पन्न करने की संगठित एवं सामूहिक कोशिश हो रही है।”
सिसोदिया ने कहा कि, “मतदाता सूची से संबंधित विवादों, चुनावी प्रक्रियाओं पर उठे प्रश्नों, चुनाव आयोग की वेबसाइट पर बड़ी संख्या में साइबर हमलों की रिपोर्टों तथा सोशल मीडिया पर फर्जी अथवा विदेशी स्रोतों से संचालित खातों की सक्रियता जैसे मामलों ने यह आवश्यकता रेखांकित की है कि भारत को अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना होगा। इनसे उत्पन्न होने वाली आशंकाओं और खतरों को कतई नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।”
सिसोदिया ने कहा कि, “लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनमत को प्रभावित करने, भ्रम फैलाने, सामाजिक तनाव उत्पन्न करने अथवा चुनावी वातावरण को प्रभावित करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्मों और साइबर माध्यमों का दुरुपयोग एक वैश्विक चुनौती के रूप में सामने आया है। भारत जैसे विशाल लोकतंत्र के लिए यह आवश्यक है कि प्रशासनिक संस्थाएं, चुनाव प्रबंधन तंत्र, राजनीतिक दल, मीडिया तथा आम नागरिक सभी साइबर सुरक्षा सहित जनमत-जागृति के प्रति सजग रहें।”
सिसोदिया ने कहा कि, “केंद्र एवं राज्य सरकारों, निर्वाचन आयोग सहित व्यापक व्यवस्थागत सेवा एवं संचालन कार्यक्षेत्र वर्तमान में डिजिटल सेवाओं पर आधारित हो चुके हैं। इसलिए साइबर सुरक्षा एजेंसियों तथा तकनीकी विशेषज्ञों को भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं और शासन-प्रशासन की डिजिटल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करनी होगी।”
सिसोदिया ने नागरिकों से भी अपील की कि, “सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सूचनाओं की सत्यता की सावधानीपूर्वक जांच करें तथा किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार या संदिग्ध डिजिटल गतिविधि की सूचना संबंधित प्राधिकरणों के ध्यान में लाएं।”
सिसोदिया ने कहा कि, “भारत का लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। अब इसकी सुरक्षा केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल और साइबर क्षेत्र में सतत सतर्कता एवं सुदृढ़ सुरक्षा तंत्र के माध्यम से भी सुनिश्चित करनी होगी।”





















