भारत सिंह चौहान
कोटा। विज्ञान नगर एरोड्रम रोड स्थित माहेश्वरी भवन में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। कथा प्रारंभ होने से पूर्व गायत्री मंदिर से भव्य कलश एवं शोभायात्रा निकाली गई। कार्यक्रम की शुरुआत ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान गणेश के पूजन से हुई। इसके बाद बैंड-बाजों और भजन-कीर्तन के साथ शोभायात्रा मुख्य मार्गों से होती हुई माहेश्वरी भवन पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
कथा व्यास आचार्य ऋतुराज गौतम ने श्रीमद्भागवत के तत्वज्ञान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शुकदेव भगवान प्रत्येक जीव में ब्रह्म का दर्शन करते थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का मूल तत्व दूध होता है, उसी प्रकार समस्त प्राणियों में ईश्वर का वास है। इसलिए सभी जीवों के प्रति समान दृष्टि और सम्मान का भाव रखना चाहिए।
आत्मदेव-धुंधकारी प्रसंग का वर्णन करते हुए आचार्य गौतम ने कहा कि जीवन में अर्पण और तर्पण का भाव सदैव बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पितरों की मुक्ति और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए श्राद्ध का विशेष महत्व है। श्राद्ध कर्म को आडंबरमुक्त और संक्षिप्त रूप से श्रद्धा के साथ संपन्न करना चाहिए।
व्यास तत्व की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि संकीर्ण सोच रखने वाला व्यक्ति कभी कथा व्यास नहीं हो सकता। प्रत्येक जीव मात्र के प्रति समान दृष्टिकोण और करुणा का भाव ही एक सच्चे कथा व्यास का मूल लक्षण है।
कथा के समापन पर भगवान की आरती की गई, जिसमें भगवानदास माहेश्वरी, रमेश माहेश्वरी, सत्यनारायण माहेश्वरी, घनश्याम माहेश्वरी, स्वप्निल माहेश्वरी, रुचि माहेश्वरी, आशीष मंडोरा एवं सत्यनारायण सोमानी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।
कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।





















