कोटा।विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने अनंतपुरा स्वागत द्वार के पास स्थित वन भूमि पर पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर आयोजित एक विशेष संगोष्ठी को संबोधित करते हुए ऊर्जा मंत्री ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि लगाने से पहले उनके संरक्षण और उन्हें जीवित रखने की ठोस योजना होनी चाहिए। उन्होंने पौधों को बचाने के लिए आधुनिक ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनाने पर विशेष बल दिया।
संगोष्ठी के दौरान ऊर्जा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का जिक्र करते हुए आमजन से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए हमें पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करनी होगी। ईंधन की बचत से न केवल पर्यावरण सुरक्षित होगा, बल्कि देश के आर्थिक संसाधनों की भी बचत होगी। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए प्रदेश के 300 महत्वपूर्ण स्थानों पर 800 नए इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और विदेशी ईंधन के आयात में कमी आएगी।
संगोष्ठी में में बाबा निरंजन नाथ अवधूत महाराज, गोविंदाचार्य महाराज, महामंडलेश्वर डॉ. हेमा सरस्वती, पर्यावरणविद् राजेंद्र गंभीर, यज्ञ हाडा, वन अधिकारी इंद्रेश यादव, अनिरुद्ध सुखवाल, बृजेश विजय और प्रकाश जायसवाल प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। समारोह के दौरान एक प्रभावशाली नाट्य मंचन के माध्यम से उपस्थित जनसमुदाय को पर्यावरण बचाने का भावुक संदेश दिया गया। कार्यक्रम के समापन पर जीडी पटेल ने सभी अतिथियों और आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
प्रति व्यक्ति पेड़ों की संख्या 100 तक ले जाने का लक्ष्य
ऊर्जा मंत्री ने प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस समय राजस्थान में प्रति व्यक्ति पेड़ों का औसत मात्र 25 से 30 है। उन्होंने संकल्प जताते हुए कहा कि व्यापक स्तर पर पौधरोपण कर इस संख्या को प्रति व्यक्ति 100 पेड़ तक पहुँचाना हमारा मुख्य लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने सनातन संस्कृति की याद दिलाते हुए कहा कि हम नदी, जल, पहाड़, सूर्य और वायु के रूप में प्रकृति को पूजने वाले लोग हैं। हिंदू संस्कारों में हरियाली तीज जैसे त्योहारों का विशेष महत्व है और हमारी संस्कृति में पेड़ काटना एक गंभीर अपराध माना गया है। इसलिए, पौधारोपण को केवल एक सरकारी अभियान न मानकर, इसे अपने रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
वर्ष 2070 तक कार्बन जीरो उत्सर्जन और सोलर एनर्जी पर जोर
ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर बात करते हुए मंत्री नागर ने कहा कि सूर्य ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है और राजस्थान आज सोलर एनर्जी के मामले में सरप्लस उत्पादन की स्थिति में आ चुका है। दिन में उत्पादित होने वाली इस सौर ऊर्जा को अब बैटरी स्टोरेज के माध्यम से सुरक्षित किया जाएगा। जो भविष्य में डीजल जनरेटरों का एक बेहतरीन विकल्प बनेगी। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2070 तक ‘कार्बन जीरो उत्सर्जन’ के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करना है। इसके लिए घरों में बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा दिया जाएगा और कोयला आधारित ऊर्जा के विकल्पों को तेजी से तैयार किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ वातावरण मिल सके।
जियो-टैगिंग से होगी निगरानी; विदेशी बबूल का होगा खात्मा
मीडिया से बातचीत के दौरान ऊर्जा मंत्री ने घोषणा की कि राजस्थान सरकार ने इस वर्ष प्रदेश में 10 करोड़ पौधे लगाने का संकल्प लिया है। सरकारी विभागों द्वारा रोपे गए इन पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस बार ‘जियो-टैगिंग’ और ‘सैटेलाइट इमेजिंग’ जैसी आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। वन विभाग द्वारा पथरीली जमीनों पर किए जाने वाले कठिन पौधारोपण की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि हाड़ौती क्षेत्र में ‘धोकड़े’ के वन प्रचुर मात्रा में हैं, जो मानसून में पूरी तरह हरे-भरे हो जाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने सचेत किया कि रासायनिक खाद हमारी उपजाऊ धरती को बंजर बना रहे हैं। जिससे बचना बेहद जरूरी है। विलायती बबूल पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि इसे एक सोची-समझी साजिश के तहत भारत लाया गया था। जिसने हमारे स्थानीय पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाया है। अब राज्य सरकार ने इसे पूरी तरह से जड़-मूल से समाप्त करने का दृढ़ संकल्प ले लिया है।






