1 वक़्त ने दिये जो घाव तो वक़्त ही मरहम होगा ,
वक़्त बना गर बैरी तो वक़्त ही रहबर होगा ‘
वक़्त एक सा हुआ कब,कहाँ , किसी का ,
वक़्त बना जो दुश्मन तो फिर वक़्त ही दिलबर होगा !
2. कलम खामोश है ज्यूँ शब्दों ने मुंह फेर लिया हो ,
पड़ गया हो अकाल रेत के बवंडर ने घेर लिया हो ,
चलेगी फिर हवाएँ यूं के लफ़्जों की बारिशें होगी ,
फिर मेरी कलम होगी ओर होगा जानमाना अक्षरों का समंदर !
3. मैंने आज माँ का दिल दुखाया है, रब मुझे माफ न करे ,
मैंने दुआओं भरी आँखों को रुलाया है , रब मुझे माफ न करे ,
रब भूल जाएगा मगर मेरी हर गलती, हर गुस्तागी, के
मैंने माँ के आँचल में फिर सर छुपाया है , रब मुझे माफ न करे !
4. बर्बाद कर लिया खुद को मैंने एक तुझे अपना बनाने में ,
नासमझ बन बैठा हूँ खुद एक तुझे समझाने में ,
गुजर गया कहने को जो कीमती था वक़्त मेरा ,
कोई तक़ाज़ा-ए-उम्मीद नहीं अब तुझसे रूठने तुझे मनाने में !
5. गुमाँ आज भी इस बात का है ,
मैं उस परवरिश का हिस्सेदार हूँ ,
जहाँ रिश्तों की महक को ,
बनावट की खुशबू से नहीं तौला करते
कृष्ण ”राम” पंकज




