ये खुदा तू ही बता
मेरी खता मेरी खता
मेरे आंसुओं की बारिशों का
उसको भी तो हो पता…..
बेखबर वो नहीं न ही अनजान है
नासमझ भी नहीं न ही नादान है
वफाओं का मेरी सिला उसने
बेवफ़ाई से किया है अता……
ये खुदा तू ही बता
मेरी खता मेरी खता
उसकी चाहत मे खुद को यूं शामिल किया
अपने मुकद्दर का रब उसको मुकम्मील किया
तोड़ के ख़्वाब सारे,तन्हा हूँ मैं
उसने दिया है जता ……
मेरे आंसुओं की बारिशों का
उसको भी तो हो पता…..
✍ कृष्ण ”राम” पंकज





