Wednesday, May 20, 2026
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विश्व संग्रहालय दिवस पर होटल फेडरेशन ऑफ़ राजस्थान, बाराँ इकाई द्वारा विशेष कार्यक्रम सम्पन्न 

अखिल नामा

बाराँ/ विश्व संग्रहालय दिवस के पावन अवसर पर होटल फेडरेशन ऑफ़ राजस्थान, बाराँ इकाई के अध्यक्ष हरिओम अग्रवाल के नेतृत्व में एक प्रेरणादायक दौरा एवं अवलोकन सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर होटल फेडरेशन के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं नागरिकों की बड़ी संख्या मौजूद रही।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः राजकीय जिला संग्रहालय, बाराँ के भ्रमण से हुई, जहाँ सदस्य एवं उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने संग्रहालय में संरक्षित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का अवलोकन किया तथा निरंतर संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के महत्व पर गहन चर्चा की।

दोपहर के पश्चात होटल फेडरेशन के सदस्यों ने राष्ट्रीय राज मार्ग NH-27 पर स्थित “हाड़ौती पैनोरमा” का भी अवलोकन किया। इस पैनोरमा में बाराँ जिले की समृद्ध पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को दृश्यात्मक रूप में दर्शाया गया है। इस स्थल पर पहुंचे सदस्यों में

आनंद बंसल,दिनेश बंसल,भानु पोरवाल,निधन महाजन,मनोज भारद्वाज,महेंद्र शर्मा,अंकित खंडेलवाल,हितेश खंडेलवाल,किशन मेहर,नितिन मीणा शामिल हुए।

कार्यक्रम में पर्यटन एवं सांस्कृतिक संवर्धन पर गहन चर्चा की गई और निर्णय लिया गया कि इस पैनोरमा जैसे दर्शनीय स्थलों का व्यापक प्रचार एवं स्थानीय समुदाय, पर्यटक तथा युवा पीढ़ी को इससे जोड़ा जाएगा ताकि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सम्मान और संरक्षण सुनिश्चित हो सके ।

होटल फेडरेशन ऑफ़ राजस्थान, बाराँ इकाई के मीडिया प्रभारी राजेंद्र कुमार शर्मा , कन्वीनर इंटैक बारां चैप्टर जितेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया कि “पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु हाड़ौती पैनोरमा समेत अन्य सभी प्रमुख दर्शनीय स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर और प्रमुखता से शामिल करने के जिले के सभी संगठनों के सामूहिक प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।”

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी पदाधिकारी, सदस्य तथा समर्थक संगठन सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। आगामी दिनों में पर्यटन एवं सांस्कृतिक संवर्धन के लिए और भी पहल की योजना बनाई जा रही है।

विश्व संग्रहालय दिवस के इस अवसर पर होटल फेडरेशन ऑफ़ राजस्थान बारां ईकाई अध्यक्ष हरिओम अग्रवाल ने कहा कि “हमारा उद्देश्य न केवल संग्रहालयों एवं ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन करना है, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर की महत्ता को समझना और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना है। पर्यटन विकास के माध्यम से ही हम स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक संरक्षण में संतुलन ला सकते हैं। हम उन सभी नागरिकों एवं पदाधिकारियों का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाया।”

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