Wednesday, May 20, 2026
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जेईई एडवांस 2026 के बाद अभिभावकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शुरू

केवल आईआईटी एनआईटी ट्रिपलआईटी नहीं, सही निर्णय भी बनाता है सफल इंजीनियर

डॉ.नयन प्रकाश गांधी ,करियर एक्सपर्ट एनएलपी लाइफ कोच

देशभर में लाखों विद्यार्थियों ने इस वर्ष जीईई एडवांस 2026 और जीईई मेन्स 2026 की परीक्षा दी। हर वर्ष की तरह इस बार भी कुछ विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट रैंक प्राप्त की, लेकिन बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की भी है जिनके अंक अपेक्षा के अनुरूप नहीं आए। अपेक्षित परिणाम परसेंटाइल रेंक नहीं आने के बाद सबसे अधिक चिंता विद्यार्थियों से अधिक उनके अभिभावकों के चेहरे पर दिखाई देती है। यही वह समय है जब परिवार को भावनात्मक दबाव नहीं, बल्कि समझदारी और दूरदृष्टि की आवश्यकता होती है।भारतीय समाज में लंबे समय से आईआईटी और एनआईटी ,ट्रिपल आईटी को ही सफलता का पर्याय मान लिया गया है।

अनेक अभिभावक यह मान बैठते हैं कि यदि बच्चा इन संस्थानों तक नहीं पहुँच पाया, तो उसका भविष्य सीमित हो जाएगा। जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। आज देश में गवर्नमेंट फंडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट, राज्य सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज,केंद्रीय विश्वविद्यालयों के तकनीकी संस्थान तथा अनेक प्रतिष्ठित निजी विश्वविद्यालय उच्चस्तरीय तकनीकी शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इन संस्थानों से पढ़कर हजारों विद्यार्थी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। परंतु जीईई में कम स्कोर रेंक वाले छात्रों के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता सही करियर काउंसलिंग मार्गदर्शन की है ताकि हर बच्चे को सही कालेज ,पेरेंट्स को सही बजट में उपयुक्त कॉलेज के लिए सहायता मिल पाए जो आज सबसे बड़ी चुनौती है ।करियर एक्सपर्ट डॉ नयन प्रकाश गांधी का मानना है कि समस्या यह है कि अधिकांश परिवार जल्दबाज़ी में निर्णय लेने लगते हैं और सही मार्गदर्शन नहीं मिलने के कारण बच्चे के रेंक अनुसार सही कालेज चयन नहीं कर पाते । कुछ केवल कॉलेज के नाम से प्रभावित हो जाते हैं, तो कुछ प्लेसमेंट के बड़े-बड़े विज्ञापनों के आधार पर काउंसलिंग में उन कॉलेजों के नाम भर देते है जो वे विज्ञापनों के माध्यम से देखते है और प्रभावित होते हैं। कई बार विद्यार्थी अपनी रुचि और क्षमता को समझे बिना केवल कंप्यूटर साइंस की दौड़ में शामिल हो जाते हैं। यही निर्णय आगे चलकर मानसिक तनाव, पढ़ाई में अरुचि और करियर असंतोष का कारण बनता है।

अभिभावकों को यह समझना होगा कि इंजीनियरिंग केवल एक डिग्री नहीं, बल्कि चार वर्षों की शैक्षणिक और मानसिक यात्रा है। इसलिए कॉलेज चयन करते समय केवल ब्रांड नहीं, बल्कि कई व्यावहारिक पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है। जैसे कॉलेज की मान्यता, फैकल्टी, लैब सुविधाएँ, इंटर्नशिप अवसर, वास्तविक प्लेसमेंट रिकॉर्ड, उद्योगों से जुड़ाव तथा फीस संरचना। आज कई सरकारी एवं गवर्नमेंट फंडेड कॉलेज कम फीस में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अच्छा प्लेसमेंट उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में विद्यार्थी इन कॉलेज तक पहुँच नहीं पाते,क्योंकि सही करियर एक्सपर्ट के मार्गदर्शन के बिना यह संभव नहीं है । एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि आने वाले समय में केवल डिग्री नहीं, बल्कि स्किल्स की मांग बढ़ने वाली है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में नए अवसर तेजी से विकसित हो रहे हैं। ऐसे में जिस विद्यार्थी के पास सीखने की क्षमता, तकनीकी कौशल और निरंतर मेहनत का दृष्टिकोण है, वह किसी भी संस्थान से सफल हो सकता है। आज उद्योग जगत केवल कॉलेज टैग नहीं, बल्कि वास्तविक क्षमता और समस्या समाधान कौशल को प्राथमिकता दे रहा है।

इस पूरे दौर में अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। कम अंक आने पर बच्चों की तुलना करना, ताने देना या भविष्य को लेकर भय पैदा करना स्थिति को और खराब कर सकता है। कई विद्यार्थी पहले से ही मानसिक दबाव और आत्मविश्वास की कमी से जूझ रहे होते हैं। उन्हें यह महसूस कराना आवश्यक है कि एक परीक्षा जीवन का अंतिम सत्य नहीं होती। सही दिशा, उचित कॉलेज चयन और सकारात्मक वातावरण उनके भविष्य को नई दिशा दे सकते हैं।आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज सफलता की परिभाषा को केवल आईआईटी एनआईटी , ट्रिपल आईटी तक सीमित न रखे। भारत जैसे विशाल देश में विभिन्न राज्यों में तकनीकी शिक्षा के अनेक रास्ते उपलब्ध हैं। यदि अभिभावक धैर्य, जानकारी और संतुलित सोच के साथ निर्णय लें, तो कम रैंक वाला विद्यार्थी भी उत्कृष्ट इंजीनियर और सफल पेशेवर बन सकता है। आखिरकार, सफलता केवल संस्थान नहीं, बल्कि दृष्टिकोण, मेहनत और अवसरों का सही उपयोग तय करता है।

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