प्रतीक गोयल
अध्यक्ष, राजीवगांधी नगर ऑक्सीजोन विकास समिति, कोटा
कोटा, जिसे पारंपरिक रूप से भारत की “कोचिंग राजधानी” के रूप में जाना जाता है, अब एक महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र के रूप में उभरने की अपार क्षमता रखता है। चंबल रिवरफ्रंट, ऑक्सीजोन सिटी पार्क, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और गरड़िया महादेव, किशोर सागर तालाब जैसे विश्व स्तरीय आकर्षणों के बावजूद, पर्यटकों की कम संख्या शहर को अपनी पहचान पुनः परिभाषित करने और एक आक्रामक विपणन रणनीति अपनाने की आवश्यकता दर्शाती है। पर्यटन स्थल की व्यापक पब्लिसिटी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होनी चाहिए।
ब्रांडिंग और पहचान का पुनर्निर्माण
कोटा की वर्तमान छवि केवल छात्रों के शहर की है, जिसे बदलना आवश्यक है। कोटा को “राजस्थान की जल-नगरी” (Waterfront City of Rajasthan) के रूप में ब्रांड किया जाना चाहिए, जिसमें चंबल रिवरफ्रंट को केंद्र में रखा जाए।
कोटा-बूंदी के सांसद तथा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी के प्रयासों से हवाई सेवा के लिए ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट का निर्माण कार्य प्रगति पर है। एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन का विकास अनिवार्य है, जो पर्यटकों को सूचना और आसान बुकिंग की सुविधा प्रदान करे।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए, मथुराधीश जी के मंदिर को चंबल रिवरफ्रंट से कॉरिडोर के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। लेखक के विचार से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे 52 के निकट पवनपुत्र हनुमान जी की ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी’ जैसी विशाल प्रतिमा स्थापित की जा सकती है। इस स्थल पर जीप लाइन, स्नो पार्क, मिनी वाटर पार्क, मिरर/हॉरर हाउस, ‘फन हाउस’, रोप वे, बोलिंग, ट्राम्पोलाइन और ब्राइडल सुइट्स जैसी मनोरंजन सुविधाएँ विकसित की जा सकती हैं। एक हाड़ौती एक्सपीरियंस म्यूजियम, ओपन-एयर एम्पीथिएटर, थीमैटिक गार्डन, इंडोर हॉल, फ्यूल/ईवी चार्जिंग और बहुभाषी साइनेज का प्रावधान भी होना चाहिए। खान-पान की दृष्टि से कोटा-कचौरी, कोटा-दालबाटी, कत-चूरमा, जलेबी, इमारती, पकौड़ी, घेवर और बूँदी के लड्डू को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए। ये सभी प्रयास पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर संभव हैं और दो वर्षों में रोजगार, आर्थिक, आध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण परिणाम दे सकते हैं।
बुनियादी ढाँचा और सुगम कनेक्टिविटी
पर्यटन के लिए कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है। NH52, NH27 और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के माध्यम से सड़क मार्ग सुदृढ़ है। हवाई सेवा के संदर्भ में, कोटा में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण कार्य प्रगति पर है। शहर के भीतर पर्यटन स्थलों के बीच आवाजाही को सुगम बनाने के लिए रामपुरा जैसे बाजारों में सीमित समय के लिए पार्किंग व्यवस्था तथा “हॉप-ऑन हॉप-ऑफ” (Hop-on Hop-off) वातानुकूलित बस सेवा शुरू की जानी चाहिए।
अनुभव आधारित और रात्रि पर्यटन
आधुनिक पर्यटक अब अनुभवों की तलाश में रहते हैं। कोटा को अपनी पर्यटन रणनीति में “अनुभव आधारित पर्यटन” को प्रमुखता से शामिल करना चाहिए। चंबल नदी पर लग्जरी क्रूज, रिवरफ्रंट पर नियमित सांस्कृतिक प्रदर्शन और ऑक्सीजोन सिटी पार्क में भव्य लाइट एंड साउंड शो पर्यटकों को देर रात तक रुकने के लिए प्रेरित करेंगे। मुकुंदरा हिल्स में वन्यजीव सफारी और पुराने कोटा की तंग गलियों में “हेरिटेज वॉक” जैसे नवाचार कोटा की समृद्ध संस्कृति और विरासत से जोड़ेंगे।
विपणन, प्रचार और साझेदारी
विपणन के क्षेत्र में, कोटा को पारंपरिक विज्ञापनों से हटकर डिजिटल और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कोटा ट्रैवल मार्ट की भाँति प्रमुख ट्रैवल ब्लॉगर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को कोटा आमंत्रित कर उन्हें यहाँ के “अनदेखे रत्नों” का अनुभव कराना वैश्विक स्तर पर पहुँच बनाने का एक प्रभावी तरीका है। कोटा को एक “फिल्म-फ्रेंडली सिटी” के रूप में बढ़ावा देना चाहिए, जिससे राजस्व में वृद्धि होगी और फिल्मों के माध्यम से कोटा की सुंदरता करोड़ों लोगों तक पहुँचेगी।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
कोटा में प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक गहराई और आधुनिक मनोरंजन सब कुछ है। सरकार, स्थानीय प्रशासन और निजी क्षेत्र को मिलकर एक साझा दृष्टिकोण के साथ काम करना चाहिए। यदि इन रणनीतियों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता है, तो कोटा पूरे भारत में एक अनिवार्य पर्यटन गंतव्य के रूप में उभरेगा।






