Sunday, April 19, 2026
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डाॅ. दयाकृष्ण विजय जयंती पर काव्य गोष्ठी का आयोजन

_भारत सिंह चौहान

कोटा। डॉ. दयाकृष्ण विजय स्मृति साहित्य संस्कृति संवर्धन समिति, कोटा के तत्वावधान में डॉ. दयाकृष्ण विजय की जयंती के अवसर पर बुधवार सायंकाल विजयवर्गीय भवन नयापुरा में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद, चित्तौड़ प्रांत के अध्यक्ष विष्णु शर्मा ‘हरिहर’, कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद गौतम , विशिष्ट अतिथि के रूप में रामेश्वर शर्मा ‘रामू भैया’ एवं कोटा जिला साहित्य परिषद अध्यक्ष पूर्व महापौर महेश विजय मंचस्थ रहे।

काव्य गोष्ठी का संचालन विष्णु शर्मा ‘हरिहर’ ने किया तथा आभार व्यक्त राष्ट्रवादी कवि डॉ. दयाकृष्ण विजय के पुत्र भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष हेमंत विजयवर्गीय ने किया।

अतिथियों नें साहित्यकार डॉ विजय के बारे में बताया कि ” डॉ दया कृष्ण विजय अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे एवम दो बार राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष रहे एवं उनकी 52 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों में से वे एक थे और उन्हें अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (अमेरिका) मैं भी सम्मानित किया गया। उनकी पुस्तकें देश-विदेश के पुस्तकालयों में संग्रहीत हैं। उन्होंने अनेक कालजयी रचनाओं की रचना की।”

आकाशवाणी कोटा के सहायक अधिकारी रामनारायण हलधर ने डॉ दयाकृष्ण विजय के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ड़ा. विजय साहित्य जगत में राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख मनीषी रहे हैँ, उनकी रचनाओं के आलोक में भी वे लंबे समय तक याद रहेंगे। उन्हें आसानी से भुलाया नहीं जा सकेगा। ”

युवा कवि हैम सिंह नें ” प्रेम में किंचित दोष नहीं” कविता पर तालियां बटोरी तो, महेश विजय मां भारती नें ” हे कृष्ण कृपा कीजो, हे कृष्णा दया कीजो, ई धरती पर फिर से दया कृष्णा दीजो ” के द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रेम शास्त्री ने संविधान के अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर ओजश्वी कविता प्रस्तुत की—

“धारा हट गई, घाटी बच गई, वरना हो रही थी बर्बाद,

जिंदाबाद, जिंदाबाद, राष्ट्रवादी जिंदाबाद।”

सुप्रसिद्ध कवि बाबू बंजारा ने महाराणा प्रताप के घायल चेतक पर कविता प्रस्तुत करते हुए संपूर्ण माहौल को भावुक कर दिया

” सूतो काँई रे चेतक,

युद्ध में पवन बेग सूं भाग रे ,

भायली ओर निभाले रे,

धरा की सेवा करलेंवा रे। ”

इसी प्रकार श्रीमती ममता ‘महक ‘ने मातृभूमि वंदना पर कविता प्रस्तुत की—

“नमन करो इसके कण-कण को, कंकड़ हो या पानी हो।”

काव्य गोष्ठी में अनेक कवियों ने डॉ. विजय के सम्मान में रचित कविताएं प्रस्तुत कीं तथा उनकी रचनाओं का वाचन किया। राष्ट्रवाद, संस्कार संवर्धन, देश विभाजन एवं सामाजिक समस्याओं जैसे विषयों पर काव्य पाठ हुआ।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से भगवती प्रसाद गौतम, रामेश्वर शर्मा ‘रामू भैया’, महेश विजय ‘मां भारती’, कवि बाबू बंजारा, योगीराज योगी, रामनारायण हलधर, देवकी दर्पण, विजय जोशी, हेमराज सिंह ‘हेम’, राजेंद्र शर्मा मोरपा, डॉ. इंदुबाला, श्रीमती शैलजा विजयवर्गीय, श्रीमती संगीता परमेन्द्र, कमलेश चौधरी ‘कमल’, श्रीमती रमा शर्मा ‘निर्भीक’, श्रीमती ममता ‘महक’, भगवत सिंह ‘मयंक’, नहुष व्यास, राम शर्मा कापरेन, डॉ. वीणा अग्रवाल, प्रेम शास्त्री, कालीचरण राजपूत, राम मनोहर कौशिक, देवकी दाधीच, जी.पी. खंडेलवाल ‘आनंद’, रघुनंदन ‘हठीला’ सहित अनेक साहित्यकारों नें काव्यपाठ किया ।

इसके अतिरिक्त महावीर विजय, रवि विजय, अरविंद सिसोदिया, रजनीश राणा, राजीव शाक्यवाल,प्रकाश विजय , प्रमोद विजय राजेन्द्र विजय, ओमप्रकाश विजय ,विनोद विजय, पुरुषोत्तम दाधीच, किशोर सिंह, अमित उराड़िया आदि गणमान्य जन भी उपस्थित रहे।

 

 

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