✍️डॉ नयन प्रकाश गांधी ,
मैनेजमेंट विश्लेषक , एनएलपी लाइफ करियर कोच
चैत्र नवरात्रि 2026 और हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) का पावन संगम 19 मार्च से शुरू हो रहा है, जो शक्ति की आराधना और नवसृजन का प्रतीक है। चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से शुरू होकर 27 मार्च 2026 तक चलेगी, जो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (हिंदू नववर्ष) से प्रारंभ हो रही है।इस वर्ष विक्रम संवत 2083 (रौद्र संवत्सर) का शुभारंभ होगा। यह नौ दिन आत्मशुद्धि, संयम और सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक हैं, जिनमें आदिशक्ति के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र माह के नवरात्र से होने के पीछे कुछ अन्य खास महत्व भी हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा होने के पीछे सृष्टि रचयिता ब्रह्मा हैं। उन्होंने आज के दिन ही संसार की रचना का कार्य शुरू किया था और इसकी प्रेरणा भगवान विष्णु को प्रदान की थी। देवी पुराण में उल्लेख है कि सृष्टि के आरंभ से पूर्व चहुं और अंधकार था ,तब आदि शक्ति जगदंबा देवी अपने कूष्मांडा अवतार में विभिन्न वनस्पतियों और दूसरी वस्तुओं को संरक्षित करते हुए सूर्यमंडल के मध्य व्याप्त थीं। सृष्टि जगत के निर्माण के दौरान माता ने ही त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव की भी रचना की। देवी पुराण में यह भी वर्णित है कि इसके बाद सत, रज और तम नामक गुणों से तीन देवियां यानी मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और मां काली की उत्पत्ति हुई। आदिशक्ति की कृपा से ही ब्रह्मा जी ने संसार की रचना की थी और देवी ने ही विष्णु को पालनहार तथा शिव को संहारकर्ता बनाया। देवी की कृपा से ही सृष्टि निर्माण का कार्य पूर्ण हुआ, इसलिए सृष्टि के आरंभ की तिथि से नौ दिनों तक चैत्र नवरात्रि में मां जगदंबा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दिन से ही पंचांग की गणना भी प्रारंभ होती है और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म भी इसी पावन काल में हुआ माना जाता है।
🌸 विद्यार्थियों के लिए: एकाग्रता और नई दिशा का अवसर
अंतराष्ट्रीय एनएलपी लाइफ करियर कोच एवं माँ गायत्री साधक डॉ नयन प्रकाश गांधी का मानना है कि चैत्र नवरात्रि केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि विद्यार्थियों, युवाओं, व्यापारियों और अस्वस्थ जीवनशैली से जूझ रहे लोगों के लिए आत्मपरिवर्तन का श्रेष्ठ अवसर है, इस पावन समय में संयम, उपवास और साधना के माध्यम से जहां विद्यार्थी अपनी एकाग्रता, स्मरण शक्ति और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत कर सकते हैं, वहीं युवा वर्ग नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच के साथ अपने करियर और जीवन की दिशा तय कर सकता है, व्यवसायी इस शुभ काल में नए कार्य, निवेश या संकल्प लेकर सफलता की ओर अग्रसर हो सकते हैं, और जो लोग अस्वस्थ या अनफिट हैं वे इस अवधि को शरीर और मन के शुद्धिकरण, संतुलित आहार, ध्यान और अनुशासन ,ब्रह्म जी के मुख से प्रवाहमान सबसे शक्तिशाली एवं सबसे सरल सद्बुद्धि के प्रेरक गायत्री मंत्र साधना के जरिए एक नई स्वस्थ जीवनशैली की शुरुआत के रूप में अपनाकर स्वयं को भीतर से मजबूत बना सकते हैं। यही कारण है कि नवरात्रि को केवल पूजा नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन के पुनर्निर्माण का पर्व माना गया है, जो वसंत ऋतु के साथ प्रकृति की तरह हमारे जीवन में भी नवचेतना और नव संभावनाएं लेकर आता है।देशभर में इसे अलग-अलग रूपों में जैसे गुड़ी पड़वा, उगादी और चेटीचंड के रूप में उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी समय से मौसम परिवर्तन होता है और नीम का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। नवरात्रि हमें यह संदेश देती है कि यह समय अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर कर आत्मबल जगाने, नई शुरुआत करने और जीवन को एक सकारात्मक दिशा देने का है।






