✍️ डॉ नयन प्रकाश गांधी ,युवा मैनेजमेंट विश्लेषक ,पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट
“अर्बन रीजनल प्लानिंग पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट डॉ एन पी गांधी के अनुसार राज्य बजट के 16,430 किलोमीटर नई सड़कों के निर्माण और लगभग 42,000 किलोमीटर सड़क नेटवर्क के उन्नयन–सुदृढ़ीकरण का लक्ष्य , 15 प्रमुख रेल–क्रॉसिंग पर ROB/RUB निर्माण तथा 26 अतिरिक्त क्रॉसिंग पर डीपीआर से शहरों–कस्बों में सुरक्षित, तेज़ आवागमन की राह बनेगी। जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर आदि कई शहरों के लिए मास्टर ड्रेनेज, सीवरेज, एसटीपी, स्मार्ट रोड, फ्लाईओवर और पार्किंग जैसे पैकेज शहरी जीवन–स्तर सुधार की ठोस तैयारी हैं”
दिल्ली में जब हर साल केंद्रीय बजट पेश होता है, तो उसकी भाषा में “विकसित भारत 2047”, मल्टी–ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था, हरित विकास और अमृतकाल जैसे बड़े शब्द गूंजते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर खींचा गया यह खाका पूरे देश के लिए दशा एवं दिशा तय करता है, लेकिन इसकी असली परीक्षा तब होती है जब राज्य स्तर के बजट उसी विज़न को अपनी स्थानीय हकीकत भूगोल, जनसंख्या, युवा महिला विकास ,तकनीकी उन्नयन ,शिक्षा कौशल , आधारभूत संसाधन और सामाजिक संरचना के अनुरूप ज़मीन पर उतारने की कोशिश करते हैं।राजस्थान इसका सटीक उदाहरण है। एक तरफ यह देश का सबसे बड़ा राज्य, लगभग दस प्रतिशत भूभाग, लेकिन पानी कुल राष्ट्रीय जल संसाधनों के एक प्रतिशत से भी कम, दूसरी ओर तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या, युवा आबादी का उच्च अनुपात और मरुस्थलीय जलवायु के बीच रोज़गार एवं खेती, उद्योग और शहरीकरण की कठिन चुनौतियाँ आखिर कार इसी
पृष्ठभूमि में माननीय वित्त मंत्री दीया कुमारी का 2026–27 का “विकसित राजस्थान एट 2047” बजट सामने आता है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के विज़न को मरुधरा की ज़मीन पर ढालने की कोशिश एवं सबका साथ सबका विकास करता नज़र आता है।केंद्रीय बजट जहाँ पूरे देश के लिए कर–संरचना, अवसंरचना और सामाजिक सुरक्षा की व्यापक तस्वीर खींचता है, वहीं राजस्थान का यह बजट उसी सोच को अपने जल–संकट, बिखरी बस्तियों, सीमांत किसानों, बढ़ते शहरों और पर्यटन–औद्योगिक केंद्रों वाले भू–संदर्भ में “स्थानीय ब्लूप्रिंट” में बदलने की एक बेजोड़ कोशिश एवं उत्कृष्ट समन्वय है। “हर घर जल”, “हरित ऊर्जा”, “डिजिटल इंडिया” और “नारी शक्ति” जैसे नारे जैसलमेर के टीले, भीलवाड़ा–भिवाड़ी–नीमराना के औद्योगिक पट्टे, कोटा के कोचिंग नगरों और अजमेर–बांसवाड़ा की ग्रामीण–आदिवासी बस्तियों में अलग–अलग अर्थ लेते हैं। यही से इस बजट की शहरी कहानी शुरू होती है।
बुनियादी ढांचा: सड़कों से शहरों तक विकास की रेखाचित्र
इस बजट का सबसे ठोस संदेश है कि राजस्थान अगले दशक में भौतिक ढांचे पर अभूतपूर्व निवेश के लिए तैयार है। 2024–25 में लगभग ₹30,427 करोड़ के पूंजीगत व्यय के बाद 2026–27 के लिए कुल कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ाकर करीब ₹53,978 करोड़ तक ले जाने की रूपरेखा रखी गई है। यह अब तक का सर्वाधिक अनुमानित पूंजीगत निवेश है, जो कि लगभग 36.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ दृष्टिगत है। अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान मुंबई विश्विद्यालय के अर्बन रीजनल प्लानिंग में प्रशिक्षित एलुमनाई एन पी गांधी का मानना है कि इस अतिरिक्त संसाधन का बड़ा हिस्सा सड़कों, शहरी विकास, जल–निकासी और सीवरेज प्रोजेक्टों पर केन्द्रित रखा गया है जिसके अंतर्गत सड़क क्षेत्र में सरकार ने 16,430 किलोमीटर नई सड़कों के निर्माण और लगभग 42,000 किलोमीटर सड़क नेटवर्क के उन्नयन–सुदृढ़ीकरण का लक्ष्य तय किया है। सैकड़ों ग्रामीण सड़कें, राज्य राजमार्ग, मिसिंग लिंक, कच्ची सड़कों का पक्का होना, तथा ROB/RUB, फ्लाईओवर और एलिवेटेड कॉरिडोर की घोषित भावी लंबी सूची यह साफ़ बताती है कि “कनेक्टिविटी” को विकसित राजस्थान 2047 का आधार–स्तंभ माना गया है। यही नहीं सड़क–रेल इंटरफेस पर भी महत्वपूर्ण फ़िक्स रखा गया है। 15 प्रमुख रेल क्रॉसिंग पर रेलवे ओवरब्रिज और अंडरब्रिज निर्माण की घोषणा, 26 और क्रॉसिंग पर डीपीआर तैयार करने का निर्णय, तथा पाँच राज्य राजमार्ग कॉरिडोर को उच्च स्तरीय “स्मार्ट कॉरिडोर” के रूप में विकसित करने की योजना, परिवहन दक्षता के साथ सड़क सुरक्षा को भी नीति के केंद्र में रखती है। इन निवेशों से न केवल यात्रा–समय घटने और ईंधन–बचत की उम्मीद है, बल्कि शहरों और कस्बों में दुर्घटनाओं की आशंका भी कम की जा सकती है और यह शहरी विकास के साथ समग्र विकास के लिए सबसे अहम माना जा रहा है।
शहरों के लिए समग्र पैकेज: ड्रेनेज से स्मार्ट रोड तक
राजस्थान का शहरी परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा, अजमेर, टौंक, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ जैसे शहर प्रशासनिक या सांस्कृतिक केंद्र ही नहीं, बल्कि शिक्षा, उद्योग, पर्यटन और सेवाक्षेत्र के नए धुरे बन रहे हैं। बजट में इन शहरों के लिए जो पैकेज घोषित किए गए हैं, वे यह दिखाते हैं कि सरकार शहरी विकास को महज़ “सीमेंट–कंक्रीट” नहीं, बल्कि जीवन–गुणवत्ता, रोज़गार और निवेश–आकर्षण के लिए निर्णायक मानने लगी है। कई शहरों के लिए मास्टर ड्रेनेज योजनाएँ तैयार कर बजटीय प्रावधान किए गए हैं, ताकि हर बारिश में जलभराव और नालों के उफान वाली तस्वीर बदली जा सके।
पुराने, जर्जर सीवर नेटवर्क के पुनर्वास, नए सीवर लाइन बिछाने और आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने की योजनाएँ स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ–साथ नदियों, तालाबों और भूजल की रक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं।प्रमुख सड़कों को “स्मार्ट रोड” के रूप में विकसित करने की योजना, जिनमें बेहतर सड़क सतह, भूमिगत यूटिलिटी डक्ट, पैदल–पथ, साइकिल–ट्रैक, एलईडी–स्ट्रीट लाइट और समन्वित सिग्नलिंग शामिल हैं, शहरों को आधुनिक और पर्यावरण–संगत बनाने की दिशा में कदम हैं ,जो शहरों को एक ग्लोबल स्तरीय खूबसूरती प्रदान करेगा जिससे राजस्थान में स्मार्ट शहरों में ऐतिहासिक पर्यटन उभरेगा और अप्रत्यक्ष रूप से जॉब रोजगार के अवसर युवाओ के लिए पैदा होंगे ।
जाम वाले चौराहों पर नए फ्लाईओवर और अंडरपास, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मल्टी–लेवल पार्किंग, और एनर्जी इनेबल स्ट्रीट–लाइटिंग व्यवस्था, नागरिकों के रोजमर्रा के अनुभव को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाले सुधार हैं।इसके साथ–साथ, हेरिटेज शहरों जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़ आदि में ढांचागत सुधार, हेरिटेज–वॉक, घाट विकास, पार्कों और ओपन–स्पेस का संवर्द्धन, और पर्यटन–सुविधाओं में निवेश, पर्यटन–आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा देने का प्रयास है। बजट की भाषा में यह सब “शहरी सुंदरीकरण” है, लेकिन प्रभाव के स्तर पर यह रोज़गार, छोटे व्यवसाय और स्थानीय अस्मिता से भी जुड़ता है।
जल, ऊर्जा और हरित दृष्टि का शहरी सन्दर्भ
मरुस्थलीय राजस्थान के लिए जल–प्रबंधन सबसे बड़ी नीति–चुनौती है। बजट में “सभी के लिए सुरक्षित पेयजल” और “घर–घर नल से जल” को 2047 तक प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में 14 लाख से अधिक नए नल–कनेक्शनों, 400 से अधिक नई जल योजनाओं और 83 नगरों में सेवा स्तर सुधार की योजनाओं का उल्लेख, शहरी और अर्ध–शहरी इलाकों के लिए भी जल सुरक्षा का भरोसा साफ साफ दिखाई दे रहा है।ऊर्जा के स्तर पर 19,000 मेगावाट से अधिक नवीकरणीय क्षमता, नए ग्रिड सब–स्टेशनों और स्मार्ट–ग्रिड–डिजिटल मीटरिंग जैसी घोषणाएँ सीधे शहरों के बिजली–ढांचे को प्रभावित करेंगी। 2025–26 के पहले “ग्रीन बजट” के बाद 2026–27 में लगभग ₹33,476 करोड़ का हरित–उन्मुख प्रावधान, वृक्षारोपण, कचरा–प्रबंधन, प्रदूषण–नियंत्रण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे घटकों के ज़रिए शहरी विस्तार को “कंक्रीट का जंगल” नहीं, बल्कि अपेक्षाकृत संतुलित, हरित–सक्षम विकास की दिशा में ले जाने का संकेत है।
मरुधरा के शहरों की नई कहानी
राजस्थान को हम लंबे समय तक “मारवाड़–मेवाड़ की धरती” और “रेगिस्तान किलों” की पहचान से देखते रहे हैं। लेकिन बदलते समय में कोटा के कोचिंग हॉस्टल, जयपुर–जोधपुर–उदयपुर के पर्यटन–क्लस्टर, भीलवाड़ा–भिवाड़ी–नीमराना के औद्योगिक ज़ोन और अलवर–जयपुर–राजसमंद की बढ़ती हाउसिंग कॉलोनियाँ यह साफ़ कर रही हैं कि राज्य का कल का भविष्य निर्णायक रूप से उसके भावी उच्चस्तरीय शहरी में ही लिखा जा रहा है।
भजनलाल सरकार के नेतृत्व में वित्त मंत्री दीया कुमारी द्वारा प्रस्तुत 2026–27 का बजट इस बदलती सच्चाई को स्वीकार करते हुए शहरी विकास और बुनियादी ढांचे को केवल “इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट” नहीं, बल्कि सामाजिक–आर्थिक परिवर्तन के उपकरण के रूप में स्थापित करता है,जो देदीप्यमान भारत के साथ देदीप्यमान राजस्थान की परिकल्पना को साकार करता हुआ दिखाई देता है । लगभग ₹53,978 करोड़ का पूंजीगत व्यय, 16,430 किलोमीटर नई सड़कों का लक्ष्य, 42 हज़ार किलोमीटर से अधिक नेटवर्क उन्नयन, दर्जनों ROB/RUB, फ्लाईओवर–अंडरपास और बड़े शहरों के लिए ड्रेनेज–सीवरेज–स्मार्ट रोड पैकेज, यह सब मिलकर मरुधरा के शहरों के लिए नई पटकथा लिखने की कोशिश हैं।सरकार कह रही है कि “विकसित राजस्थान एट 2047” के विज़न के तहत ये निवेश केवल यातायात सुगम या शहर सुंदर बनाने के लिए नहीं, बल्कि रोज़गार, व्यापार, स्वास्थ्य और नागरिक–सुविधाओं में वास्तविक सुधार के लिए हैं। आम नागरिक के लिए सवाल सीधा है,क्या इन घोषणाओं का असर उसकी अपनी गली, मोहल्ले, बाज़ार और कॉलोनी में दिखेगा? क्या जयपुर की कॉलोनियाँ, जोधपुर के बाज़ार, बीकानेर–कोटा की बस्तियाँ और अजमेर–भीलवाड़ा के कस्बे सचमुच महसूस करेंगे कि सफ़र आसान हुआ है, पानी जल्दी नहीं भरता, नालियाँ बदबू नहीं मारतीं और रात को गलियाँ ज़्यादा सुरक्षित व रोशन हैं?भजनलाल शर्मा की सरकार और दीया कुमारी का यह बजट इस सवाल का जवाब “हाँ” में देने की एक महत्वाकांक्षी शुरुआत है। अब ज़िम्मेदारी उच्चस्तरीय प्रशासनिक अधिकारियों ,उच्च से लेकर निचले स्तर तक के कार्मिकों के ऊपर निर्भर है है कि कागज़ पर खींची गया यह शहरी रेखाचित्र बिना बिगड़े उसी रूप में ज़मीन पर भी उतरे और वो भी पारदर्शिता के साथ । अगर ऐसा हुआ, तो यह बजट केवल आंकड़ों की दस्तावेज़ी नहीं रहेगा, बल्कि राजस्थान के साधारण शहरवासी के रोज़मर्रा जीवन में दिखने वाला असली बदलाव बन जाएगा और यही किसी भी लोकतांत्रिक बजट की सबसे बड़ी कसौटी है।
डॉ. नयन प्रकाश गांधी , भारत सरकार के अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान मुंबई से अर्बन रीजनल प्लानिंग में प्रशिक्षित एलुमनाई रहे है ,विभिन्न सरकारी ,गैर सरकारी प्रोजेक्ट में कंसलटेंट रह चुके है ,वे भारत के सबसे युवा लोक नीति विशेषज्ञ है एवं उच्च स्तरीय प्रोजेक्ट इंस्पेक्शन, मॉनिटरिंग इवेल्यूएशन , कैपेसिटी बिल्डिंग एवं सीएस आर,सोशल इंजीनियरिंग के एक्सपर्ट है ।










जाम वाले चौराहों पर नए फ्लाईओवर और अंडरपास, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मल्टी–लेवल पार्किंग, और एनर्जी इनेबल स्ट्रीट–लाइटिंग व्यवस्था, नागरिकों के रोजमर्रा के अनुभव को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाले सुधार हैं।इसके साथ–साथ, हेरिटेज शहरों जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़ आदि में ढांचागत सुधार, हेरिटेज–वॉक, घाट विकास, पार्कों और ओपन–स्पेस का संवर्द्धन, और पर्यटन–सुविधाओं में निवेश, पर्यटन–आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा देने का प्रयास है। बजट की भाषा में यह सब “शहरी सुंदरीकरण” है, लेकिन प्रभाव के स्तर पर यह रोज़गार, छोटे व्यवसाय और स्थानीय अस्मिता से भी जुड़ता है।




