मोस्ट ब्रेकिंग ✍️
‘बेगमपुरा’ की उड़ान और आधुनिक भारत का संकल्प
काशी से आदमपुर तक: पीएम मोदी के विजन में गुरु रविदास की विरासत
आदमपुर हवाई अड्डे का नामकरण और सामाजिक समरसता के नए आयाम
हवाई अड्डा आधुनिकता, गति और वैश्विक जुड़ाव का प्रतीक है। जब वंचित समाज के सबसे बड़े प्रेरणापुंज का नाम इस बुनियादी ढांचे से जुड़ता है, तो यह करोड़ों लोगों के भीतर ‘स्वाभिमान’ की एक नई लहर पैदा करता है। यह इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमंत्री का विजन केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारत की सांस्कृतिक जड़ों को आधुनिक पहचान देने के प्रति भी समर्पित है
डॉ. नयन प्रकाश गांधी ✍️
भारतीय इतिहास के पन्नों में जब-जब सामाजिक जड़ता और भेदभाव ने सिर उठाया, तब-तब किसी न किसी महापुरुष ने अपनी वैचारिक आभा से अंधकार को दूर किया। संत शिरोमणि गुरु रविदास (रैदास) एक ऐसे ही जाज्वल्यमान नक्षत्र हैं, जिनकी 649वीं जयंती आज पूरा राष्ट्र ‘विरासत भी, विकास भी’ के नए संकल्प के साथ मना रहा है। गुरु रविदासजी मध्यकाल में एक भारतीय संत कवि सतगुरु थे। इन्हें संत शिरोमणि संत गुरु की उपाधि दी गई है। इन्होंने रविदासीया, पंथ की स्थापना की और इनके रचे गए कुछ भजन सिख लोगों के पवित्र ग्रंथ गुरुग्रंथ साहिब में भी शामिल हैं। इन्होंने जात पात का घोर खंडन किया और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाया। और यह दलित समाज के रविदासीय परिवार से आते थे। यह दलित समाज के लिए प्रमुख माने जाते है। गुरु ग्रन्थ साहिब मे इनके 41 पदे है जो इनके ही 16 रागो मे सकलित है इनका पहला राग गुरु ग्रन्थ साहिब मे सिरीराग है जो 93 अंग पर है गुरु ग्रन्थ साहिब मे इनके 16 राग है.गुरू रविदास जी(रैदास) का जन्म काशी में माघ पूर्णिमा दिन रविवार को संवत 1337 को हुआ था उनका एक दोहा प्रचलित है। चौदह सौ तैंतीस कि माघ सुदी पन्दरास। दुखियों के कल्याण हित प्रगटे श्री गुरु रविदास जी ।

रविदास चमार जाति में जन्में और जूते बनाने का काम किया करते थे औऱ ये उनका व्यवसाय था और अपना काम पूरी लगन तथा परिश्रम से करते थे और समय से काम को पूरा करने पर बहुत ध्यान देते थे। कई लोगों का मानना है कि संत रविदास जी का कोई गुरु नहीं था। कहा जाता है कि यह सनातनी हिंदू थे और कहा था “वेद धर्म सबसे बड़ा अनुपम सच्चा ज्ञान फिर क्यों छोड़ू इसे पढ लूँ झूठ कुरान” इन्होंने ब्राह्मणी धर्म (हिंदू धर्म ) में व्याप्त कुरीतियों और अज्ञानता के लिए आम जनमानस को धार्मिक अंधविश्वास और आडंबर से दूर रहने का संदेश दिया और कहा कि अगर मन पवित्र है तो गंगा में भी स्नान की आवश्यकता नहीं है ।”मन चंगा तो कठौती में गंगा”इनकी प्रसिद्ध उक्ति है जो इस बात पर प्रकाश डालती है । इस्लाम धर्म में फैली बुराइयों को भी इन्होंने समान रूप से अपनी अभिव्यक्ति में शामिल किया था । रैदास की वाणी भक्ति की सच्ची भावना, समाज के व्यापक हित की कामना तथा मानव प्रेम से ओत-प्रोत होती थी। इसलिए उसका श्रोताओं के मन पर गहरा प्रभाव पड़ता था। उनके भजनों तथा उपदेशों से लोगों को ऐसी शिक्षा मिलती थी जिससे उनकी शंकाओं का सन्तोषजनक समाधान हो जाता था और लोग स्वतः उनके अनुयायी बन जाते थे।उनकी वाणी का इतना व्यापक प्रभाव पड़ा कि समाज के सभी वर्गों के लोग उनके प्रति श्रद्धालु बन गये। कहा जाता है कि मीराबाई उनकी भक्ति-भावना से बहुत प्रभावित हुईं और उनकी शिष्या बन गयी थीं।वर्णाश्रम अभिमान तजि, पद रज बंदहिजासु की।सन्देह-ग्रन्थि खण्डन-निपन, बानि विमुल रैदास की ॥ आज भी सन्त रैदास के उपदेश समाज के कल्याण तथा उत्थान के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने अपने आचरण तथा व्यवहार से यह प्रमाणित कर दिया है कि मनुष्य अपने जन्म तथा व्यवसाय के आधार पर महान नहीं होता है।रैदास के ४० पद गुरु ग्रन्थ साहब में मिलते हैं जिसका सम्पादन गुरु अर्जुन साहिब ने १६ वीं सदी में किया था । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पंजाब के आदमपुर हवाई अड्डे का नाम ‘श्री गुरु रविदास जी हवाई अड्डा’ रखने की घोषणा और लुधियाना में हलवारा टर्मिनल का उद्घाटन, संत की शिक्षाओं को भौतिक विकास के साथ जोड़ने की एक ऐतिहासिक कड़ी है। ‘रविदासिया समाज’ गुरु रविदास जी के ‘कर्म ही पूजा है’ के सिद्धांत का जीवंत उदाहरण है। पंजाब से लेकर विदेशों (यूरोप, अमेरिका, कनाडा) तक फैला रविदासिया समाज आज भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का एक मजबूत हिस्सा है।इस समाज ने न केवल चर्मशिल्प और कुटीर उद्योगों के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी, बल्कि शिक्षा और स्वावलंबन के क्षेत्र में भी अनुकरणीय मिसाल पेश की है। गुरु रविदास जी ने सिखाया था कि जाति व्यक्ति की पहचान नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसका चरित्र और कर्म ही उसकी कसौटी है। रविदासिया समाज ने इसी शिक्षा को आत्मसात कर समाज के वंचित वर्गों के भीतर ‘आत्म-सम्मान’ (Self-Respect) का भाव जगाया। आज शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में इस समाज द्वारा संचालित डेरे और संस्थाएं देश के कोने-कोने में समरसता का प्रसार कर रही हैं।किसी हवाई अड्डे का नाम गुरु रविदास जी के नाम पर रखना महज एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है। हवाई अड्डा ‘उड़ान’, ‘प्रगति’ और ‘संपर्क’ का प्रतीक है। आदमपुर हवाई अड्डे का यह नया नाम इस बात का उद्घोष है कि अब वंचित समाज की आकांक्षाएं भी आसमान छूने को तैयार हैं। यह उस समाज को एक नई पहचान और गौरव प्रदान करता है, जिसे इतिहास के किसी मोड़ पर हाशिए पर धकेलने की कोशिश की गई थी। लुधियाना के हलवारा में नए टर्मिनल का उद्घाटन आर्थिक प्रगति की उस गति को दर्शाता है, जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का वादा वर्तमान सरकार ने किया है।गुरु रविदास जी ने 15वीं शताब्दी में ‘बेगमपुरा’ की परिकल्पना की थी-एक ऐसा शहर जहाँ न कोई दुःख हो, न भेदभाव, और न ही कोई भूखा सोए।

प्रधानमंत्री मोदी का ‘अंत्योदय’ और ‘सबका साथ-सबका विकास’ इसी बेगमपुरा का आधुनिक संस्करण प्रतीत होता है। जब प्रधानमंत्री कहते हैं कि “ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न,” तो वह रविदास जी की उसी चौपाई को शासन की नीति बना रहे होते हैं। 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, आयुष्मान कार्ड के जरिए स्वास्थ्य सुरक्षा और करोड़ों परिवारों को पक्के घर मिलना, वास्तव में ‘बेगमपुरा’ की उस सामाजिक सुरक्षा की दिशा में उठाए गए ठोस कदम हैं।गुरु रविदास की जन्मस्थली, वाराणसी के ‘सीर गोवर्धनपुर’ का कायाकल्प इस सरकार की प्राथमिकता रही है। वहां नवनिर्मित भव्य पार्क, लंगर हॉल और रविदासिया भक्तों के लिए सुगम गलियारा, आस्था और पर्यटन के संगम के रूप में उभरा है। यह स्थान आज दुनिया भर के रविदासिया समाज के लिए आस्था का वैश्विक केंद्र बन गया है। प्रधानमंत्री द्वारा व्यक्तिगत रूप से वहां जाकर मत्था टेकना और संगत के साथ लंगर छकना, उस ‘समरसता’ का संदेश देता है जो राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रनीति का हिस्सा बन चुकी है।यद्यपि सरकारी प्रयासों और नामकरण जैसी पहलों ने समाज में गौरव का भाव भरा है, लेकिन वास्तविक श्रद्धांजलि तभी पूरी होगी जब रविदास जी के सिद्धांतों को हम अपने आचरण में उतारेंगे। जातिगत वैमनस्य को जड़ से मिटाना और ‘मानवता’ को ही एकमात्र धर्म मानना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। गुरु रविदास जी ने कहा था- “जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात। रैदास मनुष ना जुड़ सके, जब तक जाति न जात। 649वीं जयंती के इस ऐतिहासिक पड़ाव पर आदमपुर हवाई अड्डे से उठने वाली गूँज पूरे देश में सामाजिक बदलाव की लहर पैदा करेगी। विरासत के प्रति सम्मान और विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ही वह मार्ग है, जिस पर चलकर भारत ‘विश्वगुरु’ बन सकता है। गुरु रविदास जी का दर्शन हमें सिखाता है कि बिना सामाजिक समानता के कोई भी आर्थिक प्रगति अधूरी है। आज जब विमान ‘श्री गुरु रविदास जी हवाई अड्डे’ से उड़ान भरेंगे, तो वे अपने साथ करोड़ों देशवासियों के मान-सम्मान और बराबरी के सपनों को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। यही ‘विकसित भारत’ की असली पहचान है, जहाँ संत की वाणी और आधुनिक तकनीक मिलकर एक समावेशी भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।

डॉ. नयन प्रकाश गांधी मैनेजमेंट विश्लेषक ,पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट






