Thursday, May 28, 2026
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अनिश्चितता के महासागर में भारत का ‘मैराथन और स्प्रिंट’: वर्तमान आर्थिक समीक्षा का रणनीतिक उद्घोष

वैश्विक उथल-पुथल, आपूर्ति श्रृंखलाओं के विखंडन और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत को ‘उद्यमशील देश’ बनने और प्रक्रियात्मक सुधारों की ओर बढ़ने का स्पष्ट संदेश

✍️डॉ नयन प्रकाश गांधी मैनेजमेंट विश्लेषक ,पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट

हाल ही में संसद में केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत ‘आर्थिक समीक्षा 2025-26’ महज आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह एक बदलती हुई विश्व व्यवस्था में भारत के अस्तित्व और उत्कर्ष का एक दार्शनिक दस्तावेज है। इस समीक्षा का मूल स्वर स्पष्ट है, जब दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रही हो, तब ‘यथास्थिति’ सबसे बड़ा जोखिम है। समीक्षा ने जिस केंद्रीय रूपक का प्रयोग किया है “भारत को एक ही समय में मैराथन और स्प्रिंट दौड़नी होगी”,वह आगामी वर्ष के लिए देश की आर्थिक रणनीति का आधार स्तम्भ है।

2025 का विरोधाभास: घरेलू मजबूती बनाम वैश्विक अस्थिरता

आर्थिक समीक्षा ने वर्ष 2025 की विडंबना को बड़ी बेबाकी से रेखांकित किया है। एक तरफ भारत सात प्रतिशत से अधिक की विकास दर के साथ दशकों में अपना सबसे मजबूत व्यापक आर्थिक प्रदर्शन कर रहा है, तो दूसरी तरफ वैश्विक व्यवस्था चरमरा रही है और भारत लगातार बेहतरीन स्थिति में है। वह युग अब समाप्त हो चुका है जब वैश्विक प्रणाली मुद्रा स्थिरता या पूंजी प्रवाह की गारंटी देती थी। अमेरिका द्वारा लगाए गए लगातार नए टैरिफ और भू-राजनीतिक विखंडन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाएं अब एक अनुकूल नहीं, बल्कि एक शत्रुवत या कम से कम उदासीन वैश्विक वातावरण से टकरा रही हैं।

तीन वैश्विक परिदृश्य और भारत का सुरक्षा कवच

समीक्षा ने भविष्य के लिए तीन यथार्थवादी परिदृश्य प्रस्तुत किए हैं ‘नियंत्रित अव्यवस्था’, ‘अव्यवस्थित बहुध्रुवीय विघटन’, एवं ‘प्रणालीगत उथल-पुथल’। हालांकि अगर देखा जाए तो ये परिदृश्य डराने वाले लग सकते हैं, लेकिन समीक्षा का विश्लेषण आश्वस्त करता है कि भारत अपने विशाल घरेलू बाजार, कम वित्तीयकृत विकास मॉडल और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार के कारण अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है। फिर भी,यह ‘आत्मसंतुष्टि’ का नहीं, बल्कि ‘सतर्कता’ का समय है। समीक्षा स्पष्ट करती है कि पूंजी प्रवाह में व्यवधान और रुपये पर दबाव जैसे जोखिम तीनों परिदृश्यों में समान रहेंगे, और यह कोई अल्पकालिक समस्या नहीं बल्कि एक दीर्घकालिक विशेषता हो सकती है।

नीति से परे ‘प्रक्रिया’ सुधार: समय की मांग

शायद इस समीक्षा का सबसे महत्वपूर्ण बौद्धिक योगदान ‘नीति सुधार’ (Policy Reform) और ‘प्रक्रिया सुधार’ (Process Reform) के बीच किया गया अंतर है। सरकार ने सही तर्क दिया है कि केवल अच्छी नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है। हमें प्रशासनिक क्रियाओं, नियमों और प्रोत्साहनों को इस तरह ढालना होगा जो जोखिम से बचने के बजाय जोखिम का समय रहते प्रबंधन करें। निरीक्षण-आधारित नियंत्रण को विश्वास-आधारित अनुपालन (Trust-based compliance) से प्रतिस्थापित करना एक ‘उद्यमशील देश’ की निशानी है। सेमीकंडक्टर और हरित हाइड्रोजन जैसे मिशनों में यह बदलाव पहले ही दिखना शुरू हो गया है। यह बदलाव विनियमन से ‘सशक्तिकरण’ की ओर एक निर्णायक कदम है।

रणनीतिक संयम और रक्षात्मक निराशावाद

आर्थिक समीक्षा 2026 के लिए ‘रक्षात्मक निराशावाद’ के बजाय ‘रणनीतिक संयम’ की वकालत करती है। इसका सीधा मतलब है कि हमें भयभीत होकर संकुचित नहीं होना है, अपितु अपने मौजूदा संसाधनों को इतना मजबूत करना है कि हम ऐसे वर्तमान और भावी झटकों को झेल सकें। मैनेजमेंट विश्लेषक पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट डॉ नयन प्रकाश गांधी का मानना है कि आयात में वृद्धि अपरिहार्य है, इसलिए निर्यात आय और विदेशी मुद्रा के स्रोतों का विविधीकरण अब एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है।अंततः, आर्थिक समीक्षा का संदेश यह है कि भारत के पास अब निष्क्रिय रहने का विलासिता पूर्ण विकल्प नहीं है। “मैराथन को स्प्रिंट की तरह दौड़ना”-यानी दीर्घकालिक लक्ष्य विकसित भारत को प्राप्त करने हेतु निर्भीकता ,मजबूती के साथ तीव्र गति के साथ काम करना ही एकमात्र संजीवनी भारत जैसे देश के लिए है। राज्य क्षमता, समाज और विनियमन में ढील इन तीन तत्वों का संगम ही भारत को वैश्विक प्रभाव की दिशा में ले जाएगा। यह राह सरल या आरामदायक नहीं होगी, लेकिन जैसा कि समीक्षा में कहा गया है, यह “अपरिहार्य” है। भारत को अब अपनी प्रणाली को नवीन रूप देने और वैश्विक अनिश्चितता के उभरने से पहले ही भारत की समृद्धि ,प्रगति हेतु एक दीर्घकालिक सोच रणनीति के साथ आवश्यक मजबूत कार्यवाही करने वाले एक देदीप्यमान भारत देश के रूप में खुद को स्थापित करना होगा।

डॉ.नयन प्रकाश गांधी

मैनेजमेंट विश्लेषक ,पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट

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