-जितेंद्र कुमार शर्मा✍️
कोटा/चम्बल संसद ने नदी के शुद्धिकरण, प्रदूषण मुक्ति के लिए राष्ट्रपति के नाम संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपा और नदी को शोषण, प्रदूषण और अतिक्रमण से बचाऐ जाने की ठोस व्यवस्था की मांग की।
संसद के अध्यक्ष के केबी नंदवाना, संयोजक बृजेश विजयवर्गीय एवं वरिष्ठ अभियंता आरसी गुप्ता ने बताया कि चम्बल नदी राजस्थान व मध्य प्रदेश की जीवन रेखा है। घड़ियाल और मगरमच्छ इसकी शान है। कोटा क्षेत्र में यह नदी सर्वाधिक प्रदूषित हो गई है जिस जिस कारण मगरमच्छ और घड़ियाल जलीय जीवों की आबादी निरंतर कम होती जा रही है। घड़ियाल तो कोटा के आसपास लुप्त हो गए हैं। ऐसे में चंबल नदी को प्रशासनिक सुरक्षा कवच प्रदान करना बहुत आवश्यक है।चंबल को प्रदूषण मुक्त करने के लिए शुद्धिकरण योजनाएं लंबित है लेकिन उन पर कोई प्रभावी काम नहीं हो रहा है आज की स्थिति में सैकड़ो गंदे नाले चंबल में सीधे प्रवाहित हो रहे हैं। कोटा शहर का पेयजल स्रोत चंबल ही है जहां अकेलगढ़ जल शोधन संयंत्र से कोटा शहर को जल आपूर्ति की जाती है। चम्बल के इस अपस्ट्रीम वाले भाग में भी दर्जनों गंदे नाले की गिराऐ जा रहे हैं जो सीधा जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ है एवं वन्य जीव संरक्षण अधिनियम का भी उल्लंघन है।
इंदौर में जहरीले जल से जो हादसा हुआ उसकी कोटा में भी आशंका है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर चंबल के इस भाग को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत घोषितराष्ट्रीय घड़ियाल अभ्यारण कानून से मुक्त कर दिया है। इस कारण इसका सुरक्षा कवच समाप्त हो गया है। इस कानून के खत्म होने से सभी प्रकार की मानवीय और व्यावसायिक गतिविधियां यहां पर तेज हो जाएगी और चंबल के किनारों पर हैंगिंग ब्रिज तक खनन बढ़ने की आशंकाएं से और बीच का जंगल साफ हो जाएगा।। जिससे चंबल के ऊपर अतिक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। चंबल से खिलवाड़ ना किया जाए इसके लिए यहां के वनों को बचाना बहुत आवश्यक है एवं चंबल को प्रभावी शुद्धिकरण योजना प्रदान करने की आवश्यकता है। चंबल नदी के किनारे बसी अवैध बस्तियों को कहीं अन्य स्थापित किया जाना चाहिए अनियोजित विकास के नई बस्तियां एवं मानवीय गतिविधियां इस इलाके में नहीं बढ़ानी चाहिए।
नदी एवं पेयजल स्रोतों की रक्षा करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है उम्मीद करते हैं कि केंद्र एवं राज्य सरकार संवैधानिक निर्वाह का पालन करेगी। संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल ने नदी प्रदूषण पर गंभीरता से स्थिति को जाना और अप स्ट्रीम नदी के किनारे की बस्तियों के सीवरेज लाइन, ट्रीटमेंट प्लांट की समीक्षा के लिए नगर निगम और कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी






