Tuesday, June 2, 2026
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अधिकारियों और कर्मचारियों को जवाबदेही बनाने के लिए जनता को ताकत देना जरूरी – पारस बंजारा

-श्याम सुंदर शर्मा

कोटा/सूचना एवं रोज़गार अधिकार अभियान राजस्थान के नेतृत्व में राजस्थान में सशक्त जवाबदेही कानून को तत्काल पारित करने की मांग को लेकर राज्यव्यापी ‘जवाबदेही जन-संवाद यात्राओं’ की शृंखला का आज कोटा सहित पांच संभागों से भव्य शुभारंभ हुआ। यह यात्रा 26 नवम्बर 2025 को जयपुर में एक विशाल राज्यस्तरीय नागरिक सम्मेलन में परिणत होगी।

पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना

​यह यात्रा राज्य सरकार को नागरिकों के प्रति जवाबदेह बनाने की दिशा में जनसमर्थन जुटाने और राजस्थान जवाबदेही कानून के शीघ्र पारित होने की मांग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निकाली जा रही है। अभियान की मुख्य मांगें नागरिकों के अधिकारों की रक्षा, सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने पर केंद्रित हैं।

अभियान के प्रतिनिधियों ने आज कोटा कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें राज्य स्तरीय मांगों के साथ-साथ कोटा के गंभीर स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। शहर के मुख्य मार्ग अशोक स्तम्भ के आस-पास रैलियाँ निकाली गईं, पर्चे बांटे गए और जवाबदेही कानून के समर्थन में जनता के हस्ताक्षर लिए गए।*

कोटा के स्थानीय मुद्दे, जो कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में शामिल थे

​कोटा में नागरिकों को रोज़गार और मूलभूत अधिकारों से वंचित रखने वाले कई मामले सामने आए, जिन्हें अभियान ने प्रमुखता से उठाया:

शहरी रोज़गार गारंटी में काम की कमी- ट्रांसपोर्ट नगर जी गोबरियां बावड़ी सर्कल बस्ती, आहूजा नगर बस्ती, जागा बस्ती केला मैया रोड, और प्रेम नगर बस्ती के निवासियों ने शिकायत की कि वे शहरी रोज़गार में काम करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें काम उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।

आवासीय पट्टों का अभाव: -डोलियां ग्राम पंचायत में भील गरासिया समुदाय के कई परिवार वन क्षेत्र में वर्षों से रहने के बावजूद आवासीय पट्टों से वंचित हैं।

मनरेगा का बंद होना: -डोलियां ग्राम पंचायत में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) पूरी तरह से बंद है, बजट का अभाव बताकर आवेदन नहीं लिए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिक छीतर सिंह ने अभियान से मिलकर मनरेगा को पुनः शुरू करने की आशा व्यक्त की।

​पेंशन सत्यापन में विसंगतियाँ- मांग की गई कि पेंशन का वार्षिक सत्यापन सामाजिक अंकेक्षण प्रक्रिया से हो। डोलियां में एक जीवित लाभार्थी भंवरी देवी को मृत बताकर पेंशन बंद कर दी गई, और कई लोगों की पेंशन ‘आउट ऑफ स्टेट’ बताकर रोकी गई है।

​जातिगत भेदभाव- मिड डे मील वितरण के समय बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का जातिगत भेदभाव न हो, इसके लिए विशेष जांच और ध्यान देने की मांग की गई है।

अन्य मांगें: -घरेलू कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा कल्याण बोर्ड का निर्माण, जनसंवाद के लिए कोटा में निःशुल्क स्थान का निर्धारण, और भवन एवं सन्निर्माण श्रमिकों के लिए सामाजिक कल्याण योजनाओं से जोड़ने हेतु विशेष शिविरों में नागरिक संगठनों को शामिल करने की मांग भी की गई।

जवाबदेही कानून की महत्ता और लोकतंत्र में उसकी भूमिका पर अभियान से जुड़े प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए

​निखिल डे (प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्त्ता)

​“राज्य की जवाबदेही ही लोकतंत्र की आत्मा है। जनता ने जिन कानूनों और संस्थाओं के लिए संघर्ष किया है, उन्हें लागू करने की जिम्मेदारी सरकार की है। जवाबदेही कानून नागरिकों के अधिकार और शासन की ईमानदारी की कसौटी है।”

कोमल वर्मा (सूचना एवं रोज़गार अधिकार अभियान)

जवाबदेही कानून केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का माध्यम नहीं, बल्कि यह नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति सशक्त करने का औज़ार है। यह यात्रा सरकार को याद दिलाने की पहल है कि जनता ही असली मालिक है।

महिला अधिकरो के नेत्री – चंद्र कला शर्मा ने कहा की महिलाओं के सम्मान व अधिकार के प्रति प्रशासन लापरवाही कर रहा है उनके ममलों की सुनवाई सही प्रकार से नहीं की जा रहीं है.

अभियान की मुख्य मांगें

​यात्रा में उठाई जा रही मुख्य मांगें इस प्रकार हैं-

राजस्थान जवाबदेही कानून को तत्काल विधानसभा में पारित किया जाए।

सुनवाई का अधिकार अधिनियम (2012) का प्रभावी क्रियान्वयन हो।

​स्वास्थ्य का अधिकार कानून, गिग वर्कर्स अधिनियम, और न्यूनतम आय गारंटी अधिनियम के नियम जारी कर तत्काल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

​नरेगा में मजदूरों को अतिरिक्त 25 दिन और शहरी रोजगार गारंटी में 125 दिन की गारंटी मिले।

पेंशन में प्रतिवर्ष 15% वृद्धि लागू की जाए और न्यूनतम मज़दूरी ₹800 प्रतिदिन तय की जाए।

​शहीद स्मारक को शांतिपूर्ण जन आंदोलनों के लिए पुनः उपलब्ध कराया जाए।

​​कोटा से आरंभ हुई यह मजबूत पहल 26 नवम्बर को जयपुर में अन्य संभागों की यात्राओं के साथ मिलकर जवाबदेही की मांग को एक राज्यव्यापी और सशक्त आवाज़ देगी। अभियान का मानना है कि जवाबदेही कानून ही शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और न्याय सुनिश्चित कर सकता है।

 

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