-भारत चौहान
कोटा। विज्ञान नगर स्थित दिगंबर जैन मंदिर इन दिनों अध्यात्म, साधना और आत्मचिंतन का पावन केंद्र बना हुआ है। परम पूज्य गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री 105 विभाश्री माताजी एवं आर्यिका श्री 105 विनयश्री माताजी (संघ सहित) के सान्निध्य में चल रहा 13 पिच्छियों का चातुर्मास उत्सव धार्मिक अनुशासन और गरिमा के साथ निरंतर जारी है। इसी क्रम में ऐतिहासिक कल्पद्रुम महामंडल विधान का तीसरा दिन श्रद्धा और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।
गौरवाध्यक्ष राजमल पाटौदी ने बताया कि इस अवसर पर भूमि पूजन, श्री मण्डपभूमि पूजन एवं अन्य धार्मिक विधान संपन्न किए गए। प्रवचन प्रदान करते हुए पूज्य विभाश्री माताजी ने कहा कि भक्ति और पूजन में मूलभूत अंतर है। भक्ति का अर्थ है भगवान के गुणों का गुणानुवाद करना तथा उनका निरंतर स्मरण करते रहना, जबकि पूजा का अर्थ है भगवान के बताए गुणों का अनुकरण कर उन्हें अपने जीवन में धारण करना।
माताजी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि केवल स्तुति या उपासना तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। सच्ची पूजा तभी है जब हम संयम, सहिष्णुता और करुणा जैसे आदर्शों को आचरण में उतारें। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को मंदिर और विधान तक सीमित न रहकर जीवन के हर क्षेत्र में धार्मिक मूल्यों को अपनाना चाहिए।
इस अवसर पर चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन और शास्त्र भेंट जैसे विविध धार्मिक कार्यक्रम भी सम्पन्न हुए। आयोजन में संरक्षक विमल जैन नांता, अध्यक्ष प्रकाश बज, ताराचंद गोयल, बाबूलाल जैन (ट्रेड सेंटर), अनिल अंजना जैन (आरके पुरम), अरुण पांडे, महावीर जी दलवासा, सुरेश सिंधी, अशोक पाटनी, प्रकाश जैन बालिता, प्रकाश ठौरा, पदम बडला, अनिल ठाई, पवन सेठी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।






