Monday, September 7, 2026
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श्री हिंदी साहित्य समिति की 163 काव्य गोष्ठी संपन्न

   मोहब्बत की दौलत लुटाई है मैंने।

       बिगाड़ी नहीं बस बनाई है मैंने।

             जी हां। कोटा के प्रतिष्ठित गजलकार ज्ञान सिंह गंभीर की गजल की लाइनें हैं। जिन्होंने आज 163 वीं काव्य गोष्ठी को ऊंचाईयां दीं और संचालन भी किया। श्री हिंदी साहित्य समिति कोटा एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संयुक्त तत्वावधान में भगवत सिंह मयंक ने खेड़ली फाटक स्थित आवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता बाल साहित्यकार भगवती प्रसाद गौतम ने की। मुख्य अतिथि का पद पर डॉ. रघुराज सिंह कर्मयोगी आसीन थे। विशिष्ट अतिथि विष्णु शर्मा हरिहर रहे। कमलेश कमल ने सरस्वती वंदना कर काव्य गोष्ठी का आगाज किया। प्रथम कवि कालीचरण राजपूत रहे।

वरिष्ठ साहित्यकार भगवत सिंह मयंक के पुत्र कुं. शैलेंद्र सिंह जादौन ने मंचासीन कवियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इसके बाद कार्यक्रम में उपस्थित रचनाकारों ने मयंक जी को उनके 82 वें जन्मदिन के अवसर पर माल्यार्पण कर बधाइयां दीं। काव्य गोष्ठी में डॉ. रघुराज सिंह कर्मयोगी, भगवत सिंह मयंक, भगवती प्रसाद गौतम, विष्णु प्रसाद हरिहर, दीनानाथ त्रिपाठी, योगीराज योगी, कमलेश कमल, कालीचरण राजपूत, रामेश्वर रामू भैया, महेश पंचोली, भारती सिसोदिया, कुं. शैलेंद्र सिंह जादौन, ईशा सिसोदिया ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। बीएससी की पढ़ाई कर रही भारती सिसोदिया ने अपनी लिखी हुई कविताओं की प्रकाशित पुस्तक भी नाना जी भगवत सिंह मयंक को भेंट की। जिसे उपस्थितों की सराहना मिली।

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